तमिलनाडु के कोविलपट्टी से आने वाले राजा मुथुपंडी ने जीवन की मुश्किलों से पार पाते हुए ग्लासगो कॉमनवेल्थ गेम्स सिल्वर मेडल अपने नाम किया. भारत के लिए यह चौथा पदक था. इससे पहले झंडू कुमार ने ब्रॉन्ज, मीराबाई चानू ने गोल्ड और ऋषिकांता ने सिल्वर मेडल अपने नाम किया था. पुरुषों के 65 किलोग्राम भार वर्ग में रजत जीतने वाले राजा मुथुपंडी का जीवन काफी संघर्ष भरा रहा है.

माता-पिता करते थे मजदूरी
राजा मुथुपंडी का जन्म 12 जनवरी 2000 को तमिलनाडु के कोविलपट्टी में हुआ थे. उनके पिता माचिस बनाने वाली फैक्ट्री में मजदूरी करते थे. वहीं उनकी माता एक मिठाई की दुकान पर सफाई करने का काम करती थी. घर की माली हालत इतनी खराब थी कि कभी-कभी तो उन्हें दो वक्त की रोटी के लिए भी संघर्ष करना पड़ता था. 

भाई का सपना, राजा ने मुकम्मल किया
सिल्वर मेडल जीत कर देश का नाम रौशन करने वाले राजा का सपना कभी भी वेटलिफ्टर बनना नहीं था. उनके बड़े भाई वेटलिफ्टिंग करते थे. राजा भी उनके साथ जिम करने लगे. पर किस्मत को कुछ और ही मंजूर था. घर की खराब आर्थिक स्थिति के कारण उनके बड़े भाई ने परिवार चलाने की जिम्मेदारी अपने कंधों पर ले लिया. राजा ने भी अपने भाई के इस कुर्बानी को जाया नहीं होने दिया और लगातार मेहनत करते हुए इस खेल में अपनी एक खास जगह बनाई.

छोड़ देना चाहते थे वेटलिफ्टिंग
राजा ने अपने करियर में बहुत उतार चढ़ा देखा है. एक वक्त ऐसा भी आया था जब वह इस खेल को छोड़ देना चाहता थे. लगातार चोट, आर्थिक परेशानियां और लंबे समय तक रिहैबिलिटेशन में रहने के  कारण वह मानसिक रूप से भी काफी परेशान थे. इसी चक्कर में उन्होंने स्ट्रेंथ एंड कंडीशनिंग का कोर्स करने का मन बनाया और भुवनेश्वर पहुंच गए ताकि एक नया करियर बना सकें. लेकिन किस्मत को कुछ और ही मंजूर था. वहां बाकी खिलाड़ियों को ट्रेनिंग करते देख उनके अंदर के खिलाड़ी ने उन्हें फिर से खेल के मैदान में आने को मजबूर कर दिया. उसके बाद उन्होंने फिर कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा.

मुश्किलों को मात देकर राजा मुथुपंडी ने यह साबित कर दिया की मेहनत के साथ किया गया हर काम देर से ही सही पर सफल जरूर होता है. राजा ने 65 किलोग्राम भार वर्ग में कुल 286 किलो वजन उठाकर रजत पदक अपने नाम किया. उन्होंने 126 किलोग्राम स्नैच में और 160 किलोग्राम क्लीन एंड जर्क में उठाकर यह कारनामा किया. ग्लासगो कॉमनवेल्थ गेम्स में भारत ने एक गोल्ड, दो रजत और एक ब्रॉन्ज के साथ कुल चार मेडल अपने नाम किए हैं.
 

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