टूटा है गाबा का घमंड विवेक राजदान के कमेंट्री के यह शब्द आपके कानों में आज भी गूंज रहे होंगे, एक टीम जिसके कई रेगुलर प्लेयर इंजरी के कारण नहीं खेल रहे थे. फिर भी उस टीम ने ऑस्ट्रेलिया को उसी के घर में पटखनी दी थी, उस टीम के कप्तान ने आज संन्यास ले लिया है. 

कराटे में रहाणे को मिला है ब्लैक बेल्ट
एक कहावत है कि पढ़ने वाले कहीं भी पढ़ लेते हैं अजिंक्य ने इसी मिशाल को खेल में भी कर दिखाया. पैसे की तंगी के कारण अजिंक्य के घर वाले उन्हें अच्छी एकेडमी नहीं भेज पाए, लेकिन  कहते हैं न, कि अच्छे हुनर संघर्षों की आंच में तप कर ही पकते हैं. अजिंक्य रहाणे वैसे ही आग से तप कर निकले हीरे थे. जिनके कद का अंदाजा उनके रनों और स्टैट्स को देख के नहीं लगाया जा सकता. रहाणे हमेशा ही शांत स्वभाव के थे जो उनके पूरे क्रिकेट करियर में भी दिखता है, पर आपको जानकारी हैरानी होगी कि रहाणे ने 12 साल की उम्र में ही कराटे में ब्लैक बेल्ट हासिल कर लिया था. शायद यही कारण है कि वह मैच के अहम मौकों पर भी इतने मजबूती और संयम के साथ अड़े रहते थे.  

आंकड़ो से बड़े हैं कारनामे
2011 में इंग्लैंड के खिलाफ टी-20 क्रिकेट से करियर की शुरुआत करने वाले रहाणे भारत के सबसे भरोसेमंद टेस्ट बैट्समैन के रूप में जाने जाते हैं. उन्होंने इंटरनेशनल करियर में 8 हजार से ज्यादा रन, 15 शतक और 50 से ज्यादा अर्धशतक बनाए हैं पर उनका योगदान भारतीय क्रिकेट में इन आंकड़ो से बहुत ज्यादा है. जिस विराट कोहली की कप्तानी के दौर को भारत के टेस्ट क्रिकेट का सबसे स्वर्णिम समय माना जाता है उस राज्य के राजा का सेनापति रहाणे ही थे. 

विदेशी पिचों पर भारत की उम्मीद
भारत के विदेशी दौरों में जीत का एक सबसे बड़ा कारण थे रहाणे. विराट कोहली, चेतेश्वर पुजारा और रहाणे की बैटिंग तिकड़ी से पार पाने में बड़े-बड़े गेंदबाजों के पसीने छूट जाते थे. विराट कोहली पिछले साल मई में टेस्ट से संन्यास ले चुके हैं, चेतेश्वर पुजारा ने संन्यास की घोषणा तो नहीं कि पर अब वह टीम के प्लानिंग का हिस्सा नहीं है और अब उस दौर का आखिरी पिलर भी क्रिकेट से दूर हो गया.

सबसे कम टीम स्कोर से ऐतिहासिक सीरीज जीत तक
अजिंक्य ने वैसे तो कई पारियां खेली जो हमें ताउम्र याद रहेंगी पर 2020-2021 के ऑस्ट्रेलिया दौरे पर उनकी बैटिंग और कप्तानी इतिहास के सुनहरे पन्नों में दर्ज हैं. हुआ कुछ यूं की पहले मैच में भारत  ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ पहले मैच में 8 विकेट से हार जाता है. इस मैच में भारत ने पहली पारी में सिर्फ 36 रन बनाए जो अबतक भारत का सबसे कम स्कोर है. इस मैच के बाद टीम के कप्तान विराट कोहली पैटर्निटी लीव पर वापस भारत लौट आते हैं. अब टीम की कमान अजिंक्‌य रहाणे के हाथों में थी. दुनिया भर के क्रिकेट पंडितों ने भारत की सीरीज हार पर मुहर लगा दी थी. 

मेलबर्न में हुए दूसरे मैच में रहाणे ने अपनी कप्तानी और बल्ले से भारतीय टीम और फैंस की उम्मीदों में जान फूंक दी. उन्होंने मेलबर्न में 112 रन बनाए और भारत यह मैच 8 विकेट से जीत गया. टीम प्लेयर्स के चोटों से परेशान था और उमेश यादव , शमी जैसे बॉलर्स टीम में नहीं थे. अगला मैच हनुमा विहारी और अश्विन के ज्जबे की वजह से ड्रॉ हो गया.

सीरीज का आखीरी मैच गाबा में था जो ऑस्ट्रेलिया का अभेद किला माना जाता था, उस मैच में पंत ने गजब की बल्लेबाजी की और भारत को मैच जिताया और फिर हमने कॉमेंट्री में वो आइकॉनिक लाइन सुनी टूटा है गाबा का घमंड. दुनिया ने तब अजिंक्य के नेतृत्व क्षमता का लोहा माना. जब उन्होंने टेस्ट के मेन प्लेयर्स की गैर मौजूदगी में भी ऑस्ट्रेलिया को उसके ही घर में मात दी.

खुद से पहले देश
अपने रिटायरमेंट के नोट में उन्होंने लिखा है कि उनके नाम का मतलब अजेय है पर वह कई बार हारे हैं,बस एक जगह नहीं हारे हैं और वह हैं लोगों के दिल में जगह और यह बात एकदम उनके क्रिकेट के टेक्निक की तरह ही काफी सटीक है. उन्होंने यह भी कहा कि वह खुद से पहले देश को रखते हैं.

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