दिल्ली में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के तहत जिन 31.63 लाख मतदाताओं को नोटिस भेजे जा रहे हैं, उनमें चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और कई शीर्ष सेवारत व सेवानिवृत्त अधिकारी भी शामिल हैं. रिकॉर्ड के मुताबिक CBI निदेशक प्रवीण सूद का ब्योरा भी पिछले SIR की मतदाता सूची से मेल नहीं खा सका.
किन अधिकारियों के नाम सूची में?
चुनाव आयोग ने 18 सितंबर को नोटिस जारी किए जाने वाले मतदाताओं की बूथवार सूची अपलोड की है. ये नोटिस दो वजहों से भेजे जा रहे हैं. पहली, मतदाता पिछले गहन पुनरीक्षण की सूची से ‘मैप’ नहीं हो सके, और दूसरी, मौजूदा और पिछली सूची में उनके ब्योरे में ‘तार्किक विसंगतियां’, पाई गईं है.
तीन सदस्यीय चुनाव आयोग के सदस्य संधू का नाम नई दिल्ली के मोतीबाग के दो बूथों की सूची में है. यह सरकारी आवासीय कॉलोनी है, जहां वरिष्ठ पदाधिकारी और नौकरशाह रहते हैं. उनका नाम ‘स्वयं के नाम में अंतर’ (self name mismatch) की श्रेणी में चिह्नित हुआ है. यानी 2000 के दशक की शुरुआत में देशभर में हुए पिछले गहन पुनरीक्षण और मौजूदा रिकॉर्ड में उनका नाम अलग दर्ज है.
दिल्ली कैंट के निर्वाचन पंजीकरण अधिकारी (ERO) कार्यालय ने रविवार को बयान जारी कर बताया कि संधू के दिए ब्योरे, तथ्यों और दस्तावेज़ों का सत्यापन हो चुका है. उनकी प्रविष्टि को मान्य कर अंतिम मतदाता सूची में शामिल करने के लिए रखा गया है.
सेवानिवृत्त अधिकारी भी सूची में
सेवानिवृत्त अधिकारियों में नीति आयोग के पूर्व उपाध्यक्ष अरविंद पनगढ़िया, पूर्व चुनाव आयुक्त अरुण गोयल और जेएनयू के पूर्व कुलपति व यूजीसी के पूर्व अध्यक्ष एम जगदीश कुमार के नाम हैं. इनके साथ पूर्व पशुपालन सचिव अलका उपाध्याय, पूर्व उपभोक्ता मामलों के सचिव रोहित कुमार सिंह, उनकी पत्नी व पूर्व CISF महानिदेशक नीना सिंह, पूर्व रक्षा सचिव गिरिधर अरमाने और पूर्व पर्यावरण सचिव लीना नंदन भी सूची में हैं. मोतीबाग के इन दो बूथों पर कुल 594 मतदाताओं को नोटिस जारी हुए हैं, जहां ज़्यादातर बड़े अफसरों के सरकारी आवास हैं.
दिल्ली के मुख्य निर्वाचन अधिकारी का पक्ष
‘VIP’ मतदाताओं को नोटिस मिलने की खबरों पर दिल्ली के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO) ने रविवार को बयान जारी किया है. उन्होंने कहा कि नोटिस मिलने का अर्थ यह नहीं कि नाम मतदाता सूची से हटा दिया जाएगा.
ये सिस्टम से बने नोटिस हैं, जो मतदाताओं का डेटा ECINET पर ठीक कराने के लिए भेजे जा रहे हैं. CEO के अनुसार सुनवाई का अवसर दिए बिना और विधिवत, तर्कसंगत व अपील योग्य आदेश के बिना कोई नाम नहीं काटा जा सकता.
अब तक की प्रक्रिया और आगे की तारीखें
चुनाव आयोग ने 31 अगस्त को दिल्ली की ड्राफ्ट मतदाता सूची प्रकाशित की थी. इसके लिए 47.56 लाख मतदाताओं के नाम हटाए गए, जिन्हें अनुपस्थित, स्थानांतरित, मृत या दोहरी प्रविष्टि वाला बताया गया. इसके बाद आयोग के केंद्रीकृत ECINET पोर्टल से ड्राफ्ट सूची के मतदाताओं को नोटिस बनने लगे.
19 सितंबर को दिल्ली CEO कार्यालय ने बताया था कि 31,63,930 नोटिस तैयार हो चुके हैं और संबंधित मतदाताओं तक पहुंचाए जा रहे हैं. नोटिस मिलने पर मतदाताओं को संबंधित ERO के पास जवाब और ज़रूरी दस्तावेज़ जमा करने होंगे. नोटिसों का निपटारा 29 अक्टूबर 2026 तक पूरा किया जाना है. नाम हटने या चिह्नित होने पर दावे और आपत्तियां 30 अक्टूबर तक दर्ज कराई जा सकती हैं. अंतिम मतदाता सूची 4 नवंबर को प्रकाशित होगी.
ERO सामान्यतः SDM स्तर के अधिकारी होते हैं और निर्वाचक पंजीकरण के लिए वैधानिक प्राधिकारी हैं. शहरभर में उनके कार्यालयों में सुनवाई चल रही है, जहां नोटिस पाने वाले मतदाता पात्रता साबित करने के लिए दस्तावेज़ देते हैं.
देशभर में SIR का दायरा
द इंडियन एक्सप्रेस ने रविवार को रिपोर्ट किया था कि दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता, पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल, नई दिल्ली की सांसद बांसुरी स्वराज और दिल्ली भाजपा के पूर्व अध्यक्ष वीरेंद्र सचदेवा समेत राजधानी के 33 लाख मतदाताओं से अपने ब्योरे की पुष्टि करने को कहा गया है.
2025 में बिहार से शुरू हुआ SIR अब तक 30 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में लागू हो चुका है. ड्राफ्ट सूचियों में इससे कुल 13 करोड़ नाम हटे हैं. पहली बार आयोग ने नोटिस भेजने के लिए केंद्रीकृत प्रणाली का इस्तेमाल किया है, जिसके बाद लाखों नाम कटे हैं. पश्चिम बंगाल में आयोग के एल्गोरिदम से चिह्नित होने के बाद 27.16 लाख नाम हटाए गए.
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