पंजाब में अगले साल फरवरी में विधानसभा चुनाव होने की संभावना है, और BJP ने अभी से अपने चुनावी अभियान की रूपरेखा तैयार करनी शुरू कर दी है. पार्टी की योजना है कि आंतरिक सुरक्षा, आतंकवाद, अपराध, भ्रष्टाचार और बेरोजगारी जैसे मुद्दों को केंद्र में रखकर एक ‘व्यापक’ अभियान चलाया जाए.

दिल्ली और बंगाल मॉडल की झलक
पार्टी सूत्रों के मुताबिक यह अभियान दिल्ली और पश्चिम बंगाल के हालिया चुनावी अनुभवों से प्रेरित होगा, जहां BJP ने सत्ता-विरोधी भावना को मध्यम वर्ग की चिंताओं और कल्याणकारी योजनाओं के साथ जोड़कर भुनाया था.
हालांकि पंजाब में पार्टी जाति के मुद्दे पर भी खास ध्यान देगी, क्योंकि राज्य की अनुसूचित जाति (SC) आबादी 30% से ज्यादा है. 
एक वरिष्ठ BJP नेता के मुताबिक 'तीन C', क्राइम, करप्शन और चिट्टा (नशा), के साथ-साथ जाति का मुद्दा भी अभियान का अहम हिस्सा होगा, और दिल्ली-बंगाल की सफल रणनीति की झलक पंजाब की जमीन पर भी दिखेगी.

युवाओं पर फोकस
पार्टी के भीतर की जानकारी के अनुसार, BJP अपने अभियान में युवाओं को केंद्र में रखना चाहती है. नशाखोरी, रोजगार की कमी और बढ़ती अराजकता जैसे मुद्दे प्रमुखता से उठाए जाएंगे. पार्टी राज्य में जबरन वसूली (extortion) के मामलों में हुई कथित बढ़ोतरी को भी निशाना बनाने की तैयारी में है.

इसके साथ ही BJP संत रविदास जी को लेकर एक ‘सकारात्मक जनसंपर्क’ अभियान भी चलाएगी, जो पार्टी के हाल के राष्ट्रीय अभियान का ही विस्तार है. पंजाब के एक वरिष्ठ BJP नेता का कहना है कि नशे और भ्रष्टाचार के मुद्दे पर न तो AAP और न ही कांग्रेस अपना बचाव कर पाएंगी, और यही BJP को दोनों पार्टियों के खिलाफ बढ़त दिलाएगा.

कांग्रेस पर 1984 का निशाना, AAP पर खालिस्तान का आरोप
BJP कांग्रेस को 1984 के सिख-विरोधी दंगों के मुद्दे पर फिर घेरने की तैयारी में है. पार्टी नेताओं के मुताबिक सज्जन कुमार को लेकर कांग्रेस का रुख इस मुद्दे को हवा देने के काम आ सकता है.

वहीं AAP सरकार पर पार्टी खालिस्तान-समर्थक तत्वों से कथित नजदीकी और राज्य में कानून-व्यवस्था बिगड़ने का आरोप लगाएगी. एक अन्य BJP नेता के मुताबिक AAP सरकार को यह जवाब देना होगा कि उसने कथित खालिस्तानी तत्वों का खुलेआम सम्मान और पार्टी में शामिल क्यों किया, साथ ही राज्य में बढ़ती जबरन वसूली को लेकर भी सवाल उठेंगे.

कब लॉन्च होगा अभियान
सूत्रों के मुताबिक पार्टी फिलहाल अपनी चुनावी संभावनाओं का आकलन कर रही है और अभियान के मुख्य मुद्दे तय कर रही है. औपचारिक रूप से पंजाब अभियान की शुरुआत दिवाली के आसपास होने की उम्मीद है. 
इसके अलावा केंद्र सरकार के ‘नशा मुक्त भारत’ अभियान से जुड़ा एक राज्यव्यापी कार्यक्रम भी 18 से 30 सितंबर के बीच होने वाला है, जिसका नेतृत्व केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह कर सकते हैं.

BJP की चुनौतियां
पंजाब की राजनीति में BJP का जनाधार अब भी सीमित है. 2022 विधानसभा चुनाव में AAP ने 117 में से 92 सीटें जीती थीं, जबकि 2017 में उसे सिर्फ 20 सीटें मिली थीं. कांग्रेस 77 से घटकर 18 सीटों पर सिमट गई, शिरोमणि अकाली दल (SAD) को 15 से घटकर सिर्फ 3 सीटें मिलीं, और BJP को 2017 की 3 सीटों के मुकाबले सिर्फ 2 सीटें मिलीं. गौरतलब है कि 2022 में BJP और SAD ने अलग-अलग चुनाव लड़ा था, क्योंकि 2020 में कृषि कानूनों को लेकर SAD ने NDA से नाता तोड़ लिया था.

अकाली दल से गठबंधन की अटकलें
पिछले महीने SAD अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल की संसद में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात के बाद दोनों पुराने सहयोगियों के फिर साथ आने की अटकलें तेज हो गई हैं. BJP सूत्रों के मुताबिक पार्टी ने संभावित गठबंधन को अपनी रणनीति में शामिल कर लिया है, और सितंबर के अंत तक इस पर स्पष्टता आने की उम्मीद है.

अकाली दल का पंथक वोट बैंक, जिसमें विभिन्न डेरों और हलकों से जुड़े मतदाता शामिल हैं, BJP के लिए अब भी अहम फैक्टर है. हालांकि एक नेता के मुताबिक SAD की तुलना में BJP गठबंधन को लेकर कम उत्सुक है, और अकाली दल को खालिस्तान समर्थक भावनाओं के प्रति नरमी तथा खडूर साहिब सांसद अमृतपाल सिंह के ‘अकाली दल वारिस पंजाब दे’ जैसे संगठनों की बढ़ती लोकप्रियता के बीच संतुलन बनाना होगा.

 

-ममता सिंह 

"पंजाब में अगले साल फरवरी में विधानसभा चुनाव होने की संभावना है, और BJP ने अभी से अपने चुनावी अभियान की रूपरेखा तैयार करनी शुरू कर दी है. पार…"