प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तीन दिवसीय ऑस्ट्रेलिया यात्रा ने भारत–ऑस्ट्रेलिया के रिश्तों को नई दिशा दी है. इस यात्रा के दौरान दोनों देशों ने रक्षा, परमाणु ऊर्जा, खनिज, साइबर सुरक्षा, शिक्षा और व्यापार जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने के लिए 18 महत्वपूर्ण समझौते किए.
मेलबर्न में आयोजित तीसरे भारत–ऑस्ट्रेलिया वार्षिक शिखर सम्मेलन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री एंथनी अल्बनीज़ ने दोनों देशों के व्यापार बढ़ाने, परमाणु ऊर्जा समझौते को लागू करने और साइबर सुरक्षा, नई तकनीक तथा ज़रूरी सामान की आपूर्ति को मजबूत बनाने के लिए मिलकर काम करने पर सहमति जताई. के क्षेत्र में नई साझेदारी शुरू करने पर सहमति व्यक्त की.
इन समझौतों से पता चलता है कि भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच दोस्ती और सहयोग लगातार बढ़ रहा है. दोनों देश व्यापार, तकनीक और सुरक्षा के क्षेत्र में साथ काम कर रहे हैं और हिंद-प्रशांत क्षेत्र में शांति व विकास के लिए मिलकर आगे बढ़ रहे हैं.
समुद्री सुरक्षा सहयोग योजना की हुई शुरुवात
इस यात्रा में सबसे जरूरी बात रक्षा और हिंद-प्रशांत क्षेत्र की सुरक्षा रही. भारत और ऑस्ट्रेलिया ने 2009 के पुराने समझौते को बदलकर एक नया रक्षा और सुरक्षा समझौता किया.
दोनों देशों ने सेना के सहयोग, हथियारों के उद्योग, साइबर सुरक्षा, आतंकवाद से लड़ाई, समुद्री सुरक्षा और आपदा के समय मदद जैसे मुद्दों पर काम करने पर सहमति जताई.
उन्होंने समुद्र की सुरक्षा बढ़ाने और जानकारी साझा करने के लिए एक नई योजना समुद्री सुरक्षा सहयोग योजना (Maritime Security Cooperation) शुरू की.
भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच भरोसा बढ़ रहा है. इसी कारण भारतीय तटरक्षक बल और ऑस्ट्रेलिया की समुद्री सुरक्षा एजेंसी ने आपस में सहयोग का समझौता किया. इसके अलावा, ऑस्ट्रेलिया 2028–2029 में अपने रक्षा कॉलेज में एक भारतीय सैन्य अधिकारी को शिक्षक के रूप में नियुक्त करेगा. इससे दोनों देशों की सेनाओं के बीच समझ और सहयोग और मजबूत होगा.
इसके तहत 2014 के परमाणु समझौते को लागू किया गया, जिससे ऑस्ट्रेलिया भारत के शांतिपूर्ण परमाणु कार्यक्रम के लिए यूरेनियम उपलब्ध करा सकता है.
ऊर्जा और खनिज क्षेत्र में नई साझेदारी
इसके साथ दोनों देशों ने जरूरी खनिजों और स्वच्छ ऊर्जा के क्षेत्र में साथ काम करने का फैसला किया. प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत और ऑस्ट्रेलिया मिलकर जरूरी खनिजों की व्यवस्था मजबूत करेंगे, जिससे स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा मिलेगा. इसके अलावा, गुजरात की रूफटॉप सोलर ट्रेनिंग अकादमी में लगभग 2,000 महिलाओं और युवाओं को सौर ऊर्जा की तकनीक सिखाई जाएगी.
मोदी और अल्बनीज़ ने दोनों देशों के बीच व्यापार और निवेश बढ़ाने पर सहमति जताई. मोदी ने ऑस्ट्रेलियाई कंपनियों से भारत में निवेश करने को कहा, क्योंकि भारत में तकनीक, विमानन, खाद्य और खनिज जैसे क्षेत्रों में कई अवसर हैं.
व्यापार और शिक्षा के क्षेत्र में नई शुरुआत
इस शिखर सम्मेलन से भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच शोध और शिक्षा के क्षेत्र में सहयोग बढ़ा है. दोनों देशों ने भुवनेश्वर में माइनिंग टेक्नोलॉजी के लिए एक सेंटर ऑफ एक्सीलेंस बनाने का फैसला किया. ऑस्ट्रेलिया ने गुरुग्राम में विक्टोरिया यूनिवर्सिटी और बेंगलुरु में फ्लिंडर्स यूनिवर्सिटी के कैंपस खोलने की मंजूरी भी दी.
शिक्षा और शोध के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने के लिए सत्यजीत रे फिल्म और टेलीविजन संस्थान और ग्रिफिथ फिल्म स्कूल के साथ-साथ सीएसआईआर और यूनिवर्सिटी ऑफ मेलबर्न के बीच नई साझेदारियां की जाएंगी.
भविष्य के रिश्तों को मजबूती
ऑस्ट्रेलिया ने भारत की तीन प्राचीन मूर्तिया नंदी की मूर्ति, भद्रकाली का त्रिशूल और कार्तिकेय की मूर्ति वापस भारत को सौंपीं. यह दोनों देशों के बीच मजबूत होते सांस्कृतिक रिश्तों का प्रतीक है.
मेलबर्न में भारतीय समुदाय के हजारों लोगों को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि विकसित भारत का सपना 140 करोड़ भारतीयों के संयुक्त प्रयासों से पूरा होगा. उन्होंने विदेशों में रहने वाले भारतीयों को "दूध में चीनी" जैसा बताया, जो अपने नए देशों को और बेहतर बनाते हैं.
ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री एंथनी अल्बानीज़ ने नरेंद्र मोदी को भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच एक जीवित पुल बताया.
मोदी ने ऑस्ट्रेलिया के उस कानून की सराहना की, जिसमें 16 साल से कम उम्र के बच्चों के सोशल मीडिया इस्तेमाल पर रोक लगाई गई है. उन्होंने कहा कि भारत इंटरनेट पर बच्चों की सुरक्षा के लिए ऑस्ट्रेलिया के अनुभव से सीख रहा है.
हालांकि, भारत ने अभी तक ऑस्ट्रेलिया जैसा सोशल मीडिया बैन लगाने की कोई योजना नहीं बनाई है. मोदी के बयान केवल नीति में रुचि को दिखाते हैं, यह कोई नया कानून बनाने का फैसला नहीं है.
इस यात्रा के दौरान रक्षा, यूरेनियम, महत्वपूर्ण खनिज, शिक्षा, तकनीक और संस्कृति से जुड़े कई समझौते हुए. इससे भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच संबंध और मजबूत हुए हैं और ऑस्ट्रेलिया भारत का इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण रणनीतिक साझेदार बना है.
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