ब्रेस्ट कैंसर दुनियाभर में तेजी से बढ़ती गंभीर बीमारियों में शामिल है. इसका सबसे ज्यादा असर महिलाओं पर होता है. हालांकि, पुरुषों में भी ब्रेस्ट कैंसर के मामले सामने आ सकते हैं.

अब एक नई ग्लोबल स्टडी ने आने वाले समय को लेकर चिंता बढ़ा दी है. द लैंसेट ऑन्कोलॉजी में प्रकाशित इस स्टडी के मुताबिक, 2023 में दुनियाभर में करीब 23 लाख नए ब्रेस्ट कैंसर के मामले सामने आए थे. अनुमान है कि 2050 तक यह संख्या बढ़कर 35.6 लाख से ज्यादा हो सकती है. वहीं, ब्रेस्ट कैंसर से होने वाली सालाना मौतें 2023 के करीब 7.64 लाख से बढ़कर 2050 तक लगभग 14 लाख तक पहुंच सकती हैं.

204 देशों के आंकड़ों का किया गया अध्ययन

यह स्टडी ग्लोबल बर्डन ऑफ डिजीज यानी GBD 2023 के आंकड़ों पर आधारित है. इसमें 1990 से 2023 तक 204 देशों और क्षेत्रों में ब्रेस्ट कैंसर के मामलों और मौतों का अध्ययन किया गया. इसके बाद 2050 तक के अनुमान लगाए गए.

स्टडी में एक बड़ी चिंता यह भी सामने आई है कि ब्रेस्ट कैंसर का बोझ सिर्फ अमीर देशों तक सीमित नहीं रह गया है. लो और लोअर-मिडिल इनकम वाले देशों में इसके मामले और मौतें तेजी से बढ़ रही हैं.

भारत में भी बढ़ रहा है ब्रेस्ट कैंसर का खतरा

भारत के लिए भी आंकड़े चिंता बढ़ाने वाले हैं. 1990 से 2023 के बीच देश में ब्रेस्ट कैंसर की उम्र के हिसाब से सामान्यीकृत घटना दर काफी बढ़ी है. वहीं, मौतों की दर में भी बढ़ोतरी हुई है. रिपोर्ट के मुताबिक भारत में 2023 में करीब 2.03 लाख नए मामले सामने आए और करीब 1.02 लाख मौतें हुईं.

इसके अलावा, युवा महिलाओं में भी मामलों को लेकर चिंता बढ़ी है. 20 से 54 साल की महिलाओं में 1990 के बाद नए मामलों की दर में करीब 29 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई है.

इलाज और स्क्रीनिंग की सुविधा में अंतर

स्टडी में यह भी सामने आया कि ब्रेस्ट कैंसर का असर हर देश में एक जैसा नहीं है. ज्यादा आय वाले देशों में स्क्रीनिंग, जल्दी पहचान और इलाज की सुविधाएं बेहतर हैं. इससे वहां मौतों की दर में कमी देखने को मिली है.

वहीं, कम आय वाले देशों में बीमारी का पता अक्सर देर से चलता है. इसके अलावा, इलाज की सुविधाओं और जरूरी स्वास्थ्य सेवाओं की कमी भी बड़ी समस्या है. यही वजह है कि इन देशों में ब्रेस्ट कैंसर से होने वाली मौतों का बोझ ज्यादा बढ़ रहा है.

लाइफस्टाइल भी एक बड़ी वजह

स्टडी के मुताबिक, 2023 में दुनियाभर में ब्रेस्ट कैंसर से जुड़े करीब 28 प्रतिशत हेल्थ बर्डन का संबंध छह ऐसे रिस्क फैक्टर्स से था, जिनमें कुछ बदलाव किए जा सकते हैं.

इनमें अनहेल्दी डाइट, स्मोकिंग, हाई ब्लड शुगर, ज्यादा वजन, शराब का सेवन और शारीरिक गतिविधि की कमी शामिल हैं.

इसलिए एक्सपर्ट्स का कहना है कि सिर्फ इलाज पर ध्यान देना काफी नहीं है. बीमारी से बचाव, समय पर जांच और स्वस्थ लाइफस्टाइल पर भी ध्यान देना जरूरी है.

जागरूकता और समय पर जांच जरूरी

ब्रेस्ट कैंसर के बढ़ते मामलों के बीच सबसे जरूरी बात है जागरूकता. शरीर में कोई असामान्य बदलाव नजर आए तो उसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए. समय पर डॉक्टर से सलाह लेना और उम्र व व्यक्तिगत जोखिम के हिसाब से उचित स्क्रीनिंग कराना बीमारी की जल्दी पहचान में मदद कर सकता है.

नई स्टडी का संदेश साफ है. आने वाले वर्षों में ब्रेस्ट कैंसर का बोझ बढ़ सकता है. ऐसे में जागरूकता, समय पर पहचान और बेहतर इलाज की सुविधा बढ़ाना इस खतरे को कम करने के लिए बेहद जरूरी होगा.

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