ममता बनर्जी के 20 बागी सांसदों ने खुद को अलग समूह बताते हुए 18 मई को लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को पत्र लिखा था. खबरों के मुताबिक, इस पत्र में उन्होंने तृणमूल कांग्रेस से अलग रुख अपनाने और लोकसभा में एक अलग समूह के तौर पर मान्यता प्राप्त करने का प्रस्ताव रखा था. इसी बीच सूत्रों के हवाले से 19 सांसदों के नाम सार्वजनिक हो गए हैं.

आइए, इन सांसदों की राजनीतिक पारी और प्रभाव समझते हैं.

काकोली घोष दस्तीदार

काकोली घोष दस्तीदार बंगाल और तृणमूल की वरिष्ठ नेता रही हैं. पेशे से डॉक्टर हैं. घोष की राजनीतिक शुरुआत भी ममता की तरह कांग्रेस के छात्र आंदोलन से हुई थी. बाद में वे ममता बनर्जी के साथ जुड़ीं और तृणमूल कांग्रेस की संस्थापक सदस्य बनीं. पार्टी की प्रमुख महिला चेहरों में गिनी जाने वाली काकोली 2009 में बारासात लोकसभा सीट से पहली बार सांसद चुनी गईं. जीत का यह सिलसिला 2014, 2019 और 2024 में भी जारी रहा. ममता की भरोसेमंद मानी जाने वाली काकोली ही कथित 20 बागी सांसदों का नेतृत्व कर रही हैं.

माला रॉय 

माला रॉय बंगाल की राजनीति में तृणमूल का शहरी चेहरा मानी जाती थीं. उनके नाम कोलकाता नगर निगम की पहली महिला चेयरपर्सन बनने की उपलब्धि भी दर्ज है. तृणमूल की सबसे अनुभवी नेताओं में गिनी जाने वाली रॉय का राजनीतिक सफर जमीनी रहा है. 1995 में पहली बार कोलकाता नगर निगम की पार्षद चुनी गईं और इस पद पर 2019 तक आसीन रहीं. 2019 में ममता बनर्जी ने उन्हें कोलकाता दक्षिण जैसी प्रतिष्ठित लोकसभा सीट से उम्मीदवार बनाया, जहां उन्होंने जीत दर्ज कर संसद में प्रवेश किया. 2024 में भी उन्होंने अपनी सीट बरकरार रखी.

कांग्रेस और एनसीपी के साथ राजनीतिक पारी खेलने के बाद, 2015 में रॉय टीम ममता में शामिल हो गईं और तेजी से पार्टी के शीर्ष नेतृत्व का विश्वास हासिल किया. माला रॉय को कोलकाता में तृणमूल कांग्रेस के सबसे प्रभावशाली प्रशासनिक और संगठनात्मक चेहरों में माना जाता है.

सायोनी घोष

“दिल में है काबा, आंखों में मदीना” गाने के चलते बंगाल चुनाव के दौरान सुर्खियों में आई सायोनी घोष भी बागी नेताओं में शामिल हैं. अभिनेत्री और गायिका सायोनी की राजनीतिक पारी 2021 में तृणमूल के साथ शुरू होती है. इसी वर्ष घोष को आसनसोल दक्षिण की विधानसभा सीट से उम्मीदवार बनाया गया था. चुनाव हारने के बावजूद पार्टी नेतृत्व ने उन पर भरोसा जताते हुए उन्हें तृणमूल युवा कांग्रेस का अध्यक्ष नियुक्त किया. इसके बाद वे राज्य में पार्टी के सबसे आक्रामक और लोकप्रिय युवा प्रचारकों में शामिल हो गईं.

2024 में ममता ने फिर से उन पर भरोसा जताया और सायोनी को लोकसभा चुनाव में जादवपुर से उतार दिया गया. इस बार जीत ने उनका दामन पकड़ा और वे लोकसभा पहुंच गईं.

खलीलुर रहमान 

खलीलुर रहमान पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद जिले से आने वाले उद्योगपति हैं. रहमान तृणमूल कांग्रेस (TMC) के वरिष्ठ सांसदों में गिने जाते हैं. वे जंगीपुर लोकसभा सीट का प्रतिनिधित्व करते हैं, जो कभी पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी और उनके पुत्र अभिजीत मुखर्जी का राजनीतिक गढ़ मानी जाती थी.

2019 में इस सीट पर जीत दर्ज कर खलीलुर रहमान ने TMC के लिए एक महत्वपूर्ण राजनीतिक सफलता हासिल की थी. 2024 में भी यह जीत का सिलसिला जारी रहा. रहमान पार्टी के भरोसेमंद मुस्लिम नेताओं में गिने जाते थे. सीट को TMC के पक्ष में बनाए रखने में उनकी अहम भूमिका रही है.

ताहेर खान

मुर्शिदाबाद जिले के सबसे प्रभावशाली मुस्लिम नेताओं में गिने जाने वाले अबू ताहेर खान ने कांग्रेस में लंबी राजनीतिक पारी खेलने के बाद 2019 में तृणमूल कांग्रेस की सदस्यता ले ली थी. इसी वर्ष वे मुर्शिदाबाद लोकसभा सीट से जीत दर्ज कर संसद भी पहुंचे थे. 2024 के लोकसभा चुनाव में भी उन्होंने अपनी सीट बरकरार रखी और जिले में TMC की स्थिति मजबूत बनाए रखी.

क्षेत्र में उनकी मजबूत संगठनात्मक पकड़ और जनाधार के कारण उन्हें TMC का महत्वपूर्ण जिला स्तरीय चेहरा माना जाता है.

अगर उनकी राजनीतिक पारी की बात करें तो, अबू ताहेर खान ने 2001 में नाओदा विधानसभा सीट से चुनाव जीतकर पश्चिम बंगाल विधानसभा में प्रवेश किया था. इसके बाद 2006, 2011 और 2016 में भी वे लगातार विधायक चुने गए थे.

मुर्शिदाबाद पश्चिम बंगाल की सबसे महत्वपूर्ण मुस्लिम-बहुल राजनीतिक पट्टियों में से एक है और अबू ताहेर खान को इस क्षेत्र में TMC के सबसे प्रभावशाली नेताओं में गिना जाता है.

शताब्दी रॉय

बांग्ला सिनेमा की लोकप्रिय अभिनेत्री शताब्दी रॉय की राजनीतिक शुरुआत 2009 में हुई थी. उन्होंने बीरभूम सीट से 2009, 2014, 2019 और 2024 में लगातार जीत दर्ज की है. लोकप्रियता के चलते रॉय को TMC के सबसे सफल संसदीय चेहरों में गिना जाता रहा है. 2025 में लोकसभा में पार्टी की उपनेता भी बनाई गई थीं.

जून 2026 में TMC के भीतर कथित बगावत के दौरान शताब्दी रॉय का नाम प्रमुख रूप से सामने आया था. रिपोर्टों के अनुसार, विद्रोही सांसदों की कई बैठकों का आयोजन उनके दिल्ली आवास पर हुआ है.

रचना बनर्जी

रचना बनर्जी भी ममता की फिल्मी राजनीति के तहत चुनी गई थीं. दरअसल, ममता केंद्र में अधिकतर पारंगत वक्ताओं और सफल चेहरों को भेजती रही हैं. इसी क्रम में बंगाली सिनेमा और टेलीविजन जगत में लंबे समय तक लोकप्रिय रहीं रचना को 2024 लोकसभा चुनाव के दौरान हुगली से उतारा गया था. शहरी मानी जाने वाली यह सीट पार्टी का गढ़ रही है.

बापी हल्दार

बापी हल्दार पश्चिम बंगाल की राजनीति में युवा चेहरे के तौर पर जाने जाते हैं. छात्र राजनीति से शुरुआत करने वाले हल्दार जमीनी और संगठन दोनों में पकड़ रखते हैं. मथुरापुर से सांसद हल्दार दक्षिण बंगाल के कई क्षेत्रों में पार्टी संगठन को मजबूत करने में अहम भूमिका निभा चुके हैं.

दीपक अधिकारी (देव)

दीपक अधिकारी (देव) भी बंगाली सिनेमा से आते हैं. 2014 में तृणमूल कांग्रेस के टिकट पर पहली बार घाटल लोकसभा सीट से चुने गए थे. इसके बाद 2019 और 2024 में भी उन्होंने अपनी सीट बरकरार रखी.

जून मालिया

जून मालिया भी बंगाली फिल्म और टेलीविजन जगत से जुड़ी हुई हैं. 2021 विधानसभा चुनाव में तृणमूल का दामन थामकर मेदिनीपुर विधानसभा सीट से जीत दर्ज की थी. यह सीट भाजपा का मजबूत गढ़ मानी जाती थी, इसलिए उनकी जीत ने सुर्खियां बटोरी थीं. 2024 में ममता ने उन्हें मिदनापुर लोकसभा सीट से उतारा था.

प्रसून बंद्योपाध्याय

पूर्व फुटबॉलर प्रसून बंद्योपाध्याय भारतीय फुटबॉल के दिग्गज नामों में गिने जाते हैं. दरअसल, बंगाल में फुटबॉल लोकप्रिय है और बंद्योपाध्याय कोलकाता के प्रमुख क्लबों के लिए खेल चुके हैं. उपलब्धियों और लोकप्रियता को देखते हुए तृणमूल कांग्रेस ने उन्हें 2014 में हावड़ा लोकसभा सीट से उतारा था. इसके बाद 2014, 2019 और 2024 में इस शहरी सीट से वे सांसद रहे. हावड़ा क्षेत्र में उनका मजबूत जनाधार माना जाता है.

जगदीश बर्मा बसुनिया

जगदीश बर्मा बसुनिया उत्तरी बंगाल के कूचबिहार क्षेत्र से आने वाले प्रभावशाली आदिवासी नेता हैं. तृणमूल कांग्रेस (TMC) के वरिष्ठ सांसद बसुनिया राजबंशी समाज के दिग्गज नेताओं में गिने जाते हैं.

जगदीश ने अपने राजनीतिक जीवन की शुरुआत स्थानीय राजनीति से की थी. सामाजिक पकड़ के कारण वे धीरे-धीरे उत्तर बंगाल में तृणमूल कांग्रेस के प्रमुख नेताओं में शामिल हो गए. कूचबिहार और आसपास के क्षेत्रों में संगठन को मजबूत करने में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही है. 2024 के लोकसभा चुनाव में उन्होंने कूचबिहार सीट से जीत दर्ज की थी.

उत्तर बंगाल में लंबे समय से भाजपा और तृणमूल कांग्रेस के बीच राजनीतिक संघर्ष चल रहा है. जहां दक्षिण बंगाल में तृणमूल मजबूत मानी जाती है, वहीं उत्तर बंगाल में भाजपा की पकड़ मजबूत है. ऐसे में जगदीश बर्मा बसुनिया को कूचबिहार और राजबंशी बहुल इलाकों में TMC का महत्वपूर्ण जनाधार वाला चेहरा माना जाता रहा है.

कालीपदा सोरेन

बंगाल में आदिवासी समुदाय के प्रमुख नेताओं में गिने जाने वाले कालीपदा सोरेन झाड़ग्राम लोकसभा क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करते हैं. सोरेन ने लंबे समय तक जमीनी स्तर पर राजनीति की और आदिवासी क्षेत्रों में संगठन को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है. झाड़ग्राम और जंगलमहल क्षेत्र में उनकी पहचान एक जनाधार वाले नेता के रूप में स्थापित है. जंगलमहल और आदिवासी बहुल क्षेत्रों में तृणमूल कांग्रेस की राजनीतिक पकड़ मजबूत करने में कालीपदा सोरेन की अहम भूमिका मानी जाती है.

यूसुफ पठान

पूर्व अंतरराष्ट्रीय क्रिकेटर यूसुफ पठान 2024 के लोकसभा चुनाव में बहरामपुर सीट से कांग्रेस के दिग्गज नेता अधीर रंजन चौधरी को हराकर राष्ट्रीय राजनीति में उतरे थे. हालांकि, खबरों के मुताबिक चुनाव हारने के बाद ममता ने इस सीट से चुनाव लड़ने की योजना बनाई थी, लेकिन सूत्रों के हवाले से खबर आई थी कि पठान ने इस्तीफा देने से मना कर दिया था.

शर्मिला सरकार

शर्मिला सरकार ने 2024 के लोकसभा चुनाव में पूर्व बर्धमान (बर्दवान पूर्व) लोकसभा सीट से जीत दर्ज की थी. शर्मिला सरकार को TMC की नई पीढ़ी के प्रमुख चेहरों में गिना जाता है. उन्होंने तृणमूल कांग्रेस के संगठन में भी लंबे समय तक काम किया है.

असित कुमार माल

दलित नेता असित कुमार माल बीरभूम जिले की राजनीति में तीन दशक से अधिक समय से सक्रिय हैं. असित कुमार 2019 से बोलपुर (अनुसूचित जाति) लोकसभा सीट का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं. असित कुमार माल हंसन विधानसभा क्षेत्र से कई बार विधायक रहे हैं. 2014 में कांग्रेस छोड़कर तृणमूल कांग्रेस में शामिल हुए थे, जिसके बाद पार्टी संगठन में उनका कद लगातार बढ़ता गया.

2019 में TMC ने उन्हें बोलपुर लोकसभा सीट से उम्मीदवार बनाया, जहां उन्होंने जीत दर्ज कर संसद में प्रवेश किया. 2024 में भी जीत का सिलसिला जारी रहा. असित कुमार को बीरभूम जिले में TMC के सबसे अनुभवी नेताओं में गिना जाता है. वे संगठन और चुनावी राजनीति दोनों में मजबूत पकड़ रखते हैं.

अरूप चक्रवर्ती

अरूप चक्रवर्ती ट्रेड यूनियन की राजनीति से आते हैं. उन्होंने अपने राजनीतिक जीवन की शुरुआत श्रमिक आंदोलनों और ट्रेड यूनियन से की थी. पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस के श्रमिक संगठन से जुड़े रहने के कारण उन्होंने जमीनी स्तर पर मजबूत नेटवर्क तैयार किया है. 2024 के लोकसभा चुनाव में उन्होंने बांकुड़ा सीट से जीत हासिल की थी. यही कारण है कि उन्हें पश्चिम बंगाल में TMC के महत्वपूर्ण जमीनी रणनीतिकारों में माना जाता है.

मिताली बाग

मिताली बाग ने स्थानीय स्तर पर संगठनात्मक राजनीति और सामाजिक कार्यों के माध्यम से अपनी पहचान बनाई है. 2024 के लोकसभा चुनाव में उन्होंने आरामबाग जैसी महत्वपूर्ण सीट से जीत हासिल की थी. उन्होंने भाजपा उम्मीदवार अरूप कांती दिगार को हराया था.

आरामबाग लंबे समय तक वामपंथी राजनीति का गढ़ माना जाता रहा है. ऐसे में मिताली बाग की जीत सुर्खियों में आ गई थी.

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