CJP (कॉकरोच जनता पार्टी) के संस्थापक अभिजीत दीपके ने भारत आते ही CPI(M) की वरिष्ठ नेता बृंदा करात से बातचीत की है, यह खबर सुबह से ही सूत्रो के हवाले से आ रही है . इस दावे को लेकर चर्चाएं तेज हो गई है. कुछ लोगों का कहना है कि अभिजीत दीपके ने सिर्फ सलाह लेने या बातचीत के लिए बृंदा करात को फोन किया होगा. दूसरे लोगो का मानना हैं कि यह CJP और वामपंथी विचारधारा के बीच नज़दीकी का संकेत हो सकता है.

हाल की रैलियों और सभाओं में लोगों ने वामपंथी संगठनों जैसी नारेबाज़ी सुनी. इसी वजह से CJP की सोच और उसकी दिशा को लेकर चर्चा बढ़ गई है. कुछ लोग इसे नई पीढ़ी की राजनीति मानते हैं, जबकि कुछ इसे पुराने वामपंथी विचारों का नया रूप कह रहे है.

कौन है बृंदा करात?

बृंदा करात भारत की वामपंथी राजनीति की एक जानी-मानी नेता हैं. वह CPI(M) के सबसे बड़े निर्णय लेने वाले समूह, पोलित ब्यूरो में शामिल होने वाली पहली महिला थी. साथ ही 2005 से 2011 तक पश्चिम बंगाल से CPI की राज्यसभा सदस्य भी रही थीं.

उन्होंने लंबे समय तक महिलाओं के अधिकार, मजदूरों के हित और सामाजिक न्याय के लिए काम किया है.

हालांकि वह अक्सर विवादों और चर्चाओं में बनी रहती हैं. कश्मीर, अनुच्छेद 370, मृत्युदंड और राष्ट्रीय मुद्दों पर उनके विचारों को लेकर अक्सर अलग-अलग राय और बहस होती रही है. उनके समर्थक मानते हैं कि ये बातें लोकतंत्र और अधिकारों से जुड़ी चर्चा का हिस्सा हैं, जबकि विरोधी इन्हें देश के हितों के खिलाफ बताते हैं. इसी वजह से अभिजीत दीपके और वृंदा करात के बीच कथित संपर्क को लेकर राजनीतिक अटकलें लगातार चल रही हैं.

फिलहाल, इस पूरे घटनाक्रम ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या भारत की नई राजनीतिक शक्तियां वास्तव में नए विचार लेकर आ रही हैं, या फिर वे पहले से मौजूद वैचारिक धाराओं को नए चेहरे और नए मंच के साथ आगे बढ़ाने का प्रयास कर रही हैं. आने वाले समय में CJP की नीतियां, कार्यक्रम और राजनीतिक रुख ही इस बहस का वास्तविक जवाब देंगे.

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