पश्चिम बंगाल विधानसभा ने सोमवार (29 जून) को अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) आरक्षण व्यवस्था में बड़ा बदलाव करते हुए दो महत्वपूर्ण संशोधन विधेयक पारित कर दिए. नए कानून के तहत राज्य में OBC आरक्षण को 17 प्रतिशत से घटाकर 7 प्रतिशत कर दिया गया है. इसके साथ ही पिछली सरकार के दौरान OBC लिस्ट में शामिल की गई 113 अतिरिक्त जातियों को भी लिस्ट से बाहर कर दिया गया है.

कोलकाता हाईकोर्ट के फैसले को बनाया आधार
सरकार का कहना है कि OBC आरक्षण में किया गया यह बदलाव साल 2024 में Calcutta High Court के दिए गए फैसले के अनुरूप है. अदालत ने केवल मूल 66 OBC श्रेणियों को मान्यता दी थी, जिसके बाद राज्य सरकार ने पुरानी आरक्षण व्यवस्था को फिर से लागू करने का फैसला किया.

विधानसभा में पारित कए गए संशोधन विधेयक के अनुसार पश्चिम बंगाल में पिछड़ा वर्ग आयोग को फिर से केंद्रीय भूमिका दी गई है. किसी भी नए जाति को OBC में शामिल करने से पहले आयोग सामाजिक और शैक्षणिक पिछड़ेपन का अध्यन करेगा. उसकी सिफारिश मिलने के बाद ही राज्य सरकार आगे का निर्णय लेगी.

113 नई जातियां ममता सरकार हुईं थीं शामिल 
राज्य सरकार का कहना है कि पूर्ववर्ती सरकार ने राजनीतिक लाभ को ध्यान में रखते हुए जल्दबाजी में 113 नई जातियों और उपजातियों को OBC सूची में शामिल किया था. सरकार के मुताबिक, इनमें मुस्लिम समुदाय की कई उपजातियां भी शामिल थीं. दावा है कि इन समुदायों को शामिल करने की प्रक्रिया राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग की विस्तृत जांच और निर्धारित मानकों का पालन किए बिना पूरी की गई, जिसे बाद में हाईकोर्ट ने भी असंवैधानिक और अवैध ठहराया.

नए कानून के तहत अनुसूचित जाति (SC) और अनुसूचित जनजाति (ST) की आरक्षण व्यवस्था में कोई बदलाव नहीं किया गया है. केवल OBC लिस्ट में बाद में जोड़े गए समुदायों को हटाया गया है. साथ ही सरकार ने यह दावा किया है की भविष्य में अगर कोई समुदाय शैक्षणिक और सामाजिक रूप से पिछड़ा पाया जाता है और आयोग उसकी सिफारिश करेगा तो उस प्रक्रिया के तहत उसे OBC लिस्ट में शामिल कर दिया जाएगा.

 

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