तमिलनाडु में मुख्यमंत्री सी. जोसेफ के नेतृत्व में तमिलगा वेत्री कषगम (TVK) की सरकार ने 17 अगस्त को अपने शासन के 100 दिन पूरे कर लिए. मुख्यमंत्री कार्यालय (CMO) के अनुसार, "100 दिनों का शासन - पीढ़ियों के लिए एक सरकार" थीम के तहत सरकार ने महिला सुरक्षा, किसान कल्याण, युवा कौशल विकास और पारदर्शी प्रशासन पर ध्यान केंद्रित करने का दावा किया है.
सरकार के अपने आंकड़ों के मुताबिक, वेत्री तमिलनाडु निवेशक सम्मेलन में 97 समझौतों के जरिए 67,542 करोड़ रुपये के निवेश आकर्षित हुए, कुल मिलाकर एक लाख करोड़ रुपये से ज्यादा के निवेश वादे हुए, 717 शराब की दुकानें बंद की गईं, और नवजात शिशुओं के लिए स्वर्ण योजना जैसी कल्याणकारी घोषणाएं की गईं, लेकिन जब इन दावों को स्वतंत्र स्रोतों से मिले आंकड़ों पर परखा जाता है, तो शासन की कई गंभीर खामियां सामने आती हैं.
महिला सुरक्षा: टास्क फोर्स बनी, पर आंकड़े नहीं सुधरे
सरकार बनने के तुरंत बाद महिलाओं की सुरक्षा के लिए "सिंगप्पेन स्पेशल टास्क फोर्स" गठित की गई थी. लेकिन पुलिस द्वारा संकलित आंकड़ों के मुताबिक, सरकार गठन के बाद पहले 15 दिनों (11 से 26 मई) में ही राज्य में 28 हत्याएं और महिलाओं व बच्चों के खिलाफ 40 अपराध दर्ज हुए.
जून में तिरुवल्लूर में एक तीन वर्षीय बच्ची के साथ बलात्कार और हत्या की घटना ने टास्क फोर्स की प्रभावशीलता पर सवाल खड़े कर दिए. इसी रिपोर्ट के अनुसार, राष्ट्रीय अपराध रिकार्ड ब्यूरो (NCRB) के आंकड़े बताते हैं कि तमिलनाडु में महिलाओं के खिलाफ 2022 में 9,207 अपराध, 2023 में 8,943 और 2024 में बढ़कर 11,363 अपराध तक पहुंच गए, यानी 2024 में पिछले साल की तुलना में 27 प्रतिशत की बढ़ोतरी, जिसमें 419 बलात्कार के मामले भी शामिल हैं.
इससे भी बड़ी चिंता की बात यह है कि द प्रिंट की एक रिपोर्ट (21 अप्रैल 2026) के मुताबिक, राज्य सरकार ने 2023 के बाद से NCRB को आधिकारिक आंकड़े देना बंद कर दिया है, यानी गृह विभाग के आंकड़े उपलब्ध ही नहीं हैं.
बिजली आपूर्ति: "मुफ्त बिजली" के साथ रोज़ाना कटौती
सरकार ने घरेलू उपभोक्ताओं (500 यूनिट तक) को हर दो महीने में 200 यूनिट मुफ्त बिजली देने की योजना को अपनी बड़ी उपलब्धि बताया. लेकिन इसी दौरान तमिल नाडु जनरेशन एण्ड डिस्ट्रब्यूशन कॉर्परेशन लिमिटेड (TANGEDCO) के अपने रखरखाव शेड्यूल दिखाते हैं कि चेन्नई सहित कई जिलों में लगभग हर हफ्ते बिजली कटौती जारी है.
6 अगस्त को अड्यार, तांबरम और रेड हिल्स में सुबह 9 से दोपहर 2 बजे तक, 12 अगस्त को के.के. नगर, पलावक्कम और पल्लावरम में, और 27 जुलाई को भी कई इलाकों में इसी तरह की कटौती दर्ज की गई.
मुफ्त यूनिट देने का वादा तभी सार्थक है जब बिजली की उपलब्धता निर्बाध हो, नियमित "रखरखाव" कटौती यह बताती है कि राज्य के बिजली ढांचे में बुनियादी सुधार अभी भी लंबित है.
वित्तीय हालत: व्हाइट पेपर में सुधार का कोई ठोस रोडमैप नहीं
सरकार ने जून 2026 में जारी अपने वित्तीय श्वेत पत्र में दावा किया कि पिछली सरकार के कार्यकाल में राज्य पर प्रत्यक्ष कर्ज बढ़कर लगभग 10 लाख करोड़ रुपये हो गया, और गारंटी व अन्य देनदारियां जोड़ने पर यह 13.18 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया.
कर्ज-GSDP अनुपात 28.3 प्रतिशत तक पहुंच गया, जो गुजरात (17.6%) और महाराष्ट्र (19.7%) से काफी ज्यादा है. ब्याज भुगतान अकेले 67,050 करोड़ रुपये तक पहुंच गया, जो कुल राजस्व प्राप्तियों का करीब 23 प्रतिशत है.
द फेडरल में अर्थशास्त्री कलैयारसन अरुमुगम के हवाले से छपी रिपोर्ट (18 जून 2026) के मुताबिक, वेतन, पेंशन और ब्याज पर होने वाला "प्रतिबद्ध व्यय" कुल राजस्व प्राप्तियों का 64.4 प्रतिशत तक पहुंच चुका है, जिससे विकास कार्यों के लिए बहुत कम गुंजाइश बचती है.
समस्या यह है कि सरकार ने अब तक इस संकट को केवल पिछली सरकार पर आरोप के तौर पर पेश किया है, लेकिन राजस्व बढ़ाने की ठोस, समयबद्ध योजना अभी सार्वजनिक नहीं की गई है.
आंकड़े दिखाना आसान, बदलाव लाना मुश्किल
100 दिन किसी भी सरकार का आकलन करने के लिए भले ही कम समय हो, लेकिन उपलब्ध आंकड़े यह जरूर बताते हैं कि निवेश सम्मेलनों और कल्याणकारी घोषणाओं की चमक के पीछे कानून-व्यवस्था, बुनियादी ढांचे और राजकोषीय अनुशासन के मोर्चे पर काम अभी अधूरा है.
जिस पार्टी ने "अलग तरह के शासन" का वादा करके सत्ता हासिल की, उसे अब यह साबित करना होगा कि उसके दावे केवल प्रेस विज्ञप्तियों तक सीमित नहीं, बल्कि सत्यापित आंकड़ों में भी झलकते हैं.
-ममता सिंह
"तमिलनाडु में मुख्यमंत्री सी. जोसेफ के नेतृत्व में तमिलगा वेत्री कषगम (TVK) की सरकार ने 17 अगस्त को अपने शासन के 100 दिन पूरे कर लिए. मुख्यमं…"
