28 सितंबर को उज्जैन में विकास कार्यों को लेकर हो रहे प्रदर्शन के दौरान तनाव फैल गया. प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच झड़प हुई. शाही मस्जिद परिसर के आसपास बड़ी संख्या में पुलिस बल तैनात किया गया है. इलाके में प्रदर्शन और पथराव की घटनाएं सामने आई हैं. 

सड़क चौड़ीकरण परियोजना के तहत शाही मस्जिद के एक हिस्से को हटाने की कार्रवाई के बाद विवाद भड़का. यह काम 2028 में होने वाले सिंहस्थ कुंभ मेले की तैयारियों से जुड़ा है. भीड़ को नियंत्रित करने के लिए पुलिस ने आंसू गैस के गोले छोड़े. मौके पर रैपिड एक्शन फोर्स (RAF) के जवान भी तैनात किए गए हैं. 

पुलिस का पक्ष
पुलिस अधीक्षक प्रदीप शर्मा ने कहा कि सभी समुदायों और वर्गों का सहयोग मिल रहा है. उनके अनुसार शाही मस्जिद में ध्वस्तीकरण का काम मस्जिद कमेटी की ओर से ही किया जा रहा है. एहतियात के तौर पर पूरे इलाके की घेराबंदी कर दी गई है और वहां सभी के प्रवेश पर रोक है. 

उन्होंने बताया कि कुछ उपद्रवियों ने माहौल बिगाड़ने की कोशिश की और पथराव किया. इसके बाद मौके पर मौजूद पुलिसकर्मियों ने आंसू गैस और हल्के बल का इस्तेमाल कर भीड़ को तितर-बितर किया. उनके मुताबिक मुस्लिम समुदाय के नेता भी वीडियो संदेश जारी कर शांति की अपील कर रहे हैं. स्थिति अब पूरी तरह नियंत्रण में है. 

एक पुलिस अधिकारी ने कहा कि प्रशासन को ऐसी स्थिति का पहले से अंदेशा था और इसके लिए कई बैठकें और ब्रीफिंग की गई थीं. इसी योजना के तहत छत्री चौक इलाके को पूरी तरह खाली करा लिया गया था. पथराव में कुछ पुलिसकर्मियों को मामूली चोटें आईं, लेकिन वे ड्यूटी पर तैनात हैं. 

अधिकारी के अनुसार पूरे क्षेत्र की निगरानी सीसीटीवी और ड्रोन से की जा रही है. सोशल मीडिया पर भी नज़र रखी जा रही है. उन्होंने बताया कि जिले के बाहर से आकर माहौल बिगाड़ने की कोशिश करने वालों को बीती रात सीमा पर हिरासत में लेकर अलग-अलग थानों में रखा गया है. सीसीटीवी और ड्रोन फुटेज से उपद्रवियों की पहचान कर उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज की जाएगी. 

अधिकारी ने यह भी बताया कि कुछ महिलाओं ने सड़क जाम करने की कोशिश की. समझाने और वीडियो फुटेज दिखाने के बाद उन्होंने जाम हटा लिया और अब सड़क खुली है. उन्होंने लोगों से सहयोग की अपील की और कहा कि गड़बड़ी करने वालों पर सख्त कार्रवाई होगी. 

मौके पर क्या हुआ?
रिपोर्ट के अनुसार प्रदर्शनकारियों ने संकरी गलियों से होकर उस इलाके की ओर बढ़ने की कोशिश की. भीड़ के आगे कुछ महिलाएं भी दिखाई दीं. इसी दौरान तैनात पुलिसकर्मियों पर पत्थर फेंके गए. सुरक्षा बल हालात बिगड़ने से रोकने के लिए मौके पर डटे रहे और तनाव बना हुआ है. 

कांग्रेस सांसद ने उठाए सवाल
कांग्रेस सांसद इमरान प्रतापगढ़ी ने इस कार्रवाई की आलोचना की और मध्य प्रदेश सरकार से जनभावनाओं का ध्यान रखने की अपील की. उन्होंने कहा कि सड़क चौड़ीकरण के बहाने उज्जैन की शाही मस्जिद को गिराने की प्रशासनिक कोशिश और संवेदनशील होनी चाहिए. उनके अनुसार, 600 साल पुरानी धरोहर को विकास के नाम पर गिराना नफ़रत की पराकाष्ठा है. 

प्रतापगढ़ी ने दावा किया कि मामला अदालत में लंबित है. उन्होंने सवाल उठाया कि ऐसे में प्रशासन बार-बार मस्जिद की घेराबंदी करके क्या संदेश देना चाहता है. उन्होंने कहा कि उज्जैन के हज़ारों युवा इस मुद्दे पर आवाज़ उठा रहे हैं. उन्होंने प्रशासन से आग्रह किया कि सड़क चौड़ीकरण के लिए ज़रूरी ज़मीन दूसरी ओर से ली जाए. 

सिंहस्थ के लिए चौड़ीकरण
उज्जैन में सड़क चौड़ीकरण की यह कार्रवाई एक बड़ी योजना का हिस्सा है. 2028 के सिंहस्थ की तैयारियों के तहत प्रशासन ने कुल 272 संरचनाओं को हटाने के लिए चिह्नित किया है. 

इससे पहले मुख्यमंत्री मोहन यादव ने अपने पैतृक घर के ध्वस्तीकरण कार्य में हिस्सा लिया था. उन्होंने कहा था कि जहां वे बचपन में खेले-बढ़े, उसे अपने हाथों से तोड़ना भावनात्मक रूप से कठिन है, लेकिन सिंहस्थ के लिए ज़रूरी हो तो यह त्याग करना होगा। उनके मुताबिक इस कदम का मकसद प्रभावित अन्य निवासियों को प्रशासन के साथ सहयोग के लिए प्रेरित करना भी था. 

उज्जैन नगर निगम की अध्यक्ष कलावती यादव ने बताया कि सिंहस्थ की तैयारियों में कई बड़ी बुनियादी परियोजनाएं शामिल हैं. शिप्रा नदी के तट पर हर 12 साल में लगने वाले इस मेले में करोड़ों श्रद्धालुओं के आने की उम्मीद है. उनके अनुसार लगभग 29 किलोमीटर के नए घाट, डायवर्जन परियोजना और बांध जैसे काम चल रहे हैं. श्रद्धालुओं की भारी संख्या को देखते हुए सड़क चौड़ीकरण ज़रूरी हो गया है. 

 

-ममता सिंह 

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