महाराष्ट्र के IAS अधिकारी तुकाराम हरिभाऊ मुंढे अपनी सख्त लेकिन ईमानदार कार्यशैली के लिए जाने जाते हैं. उनकी कहानी सिर्फ एक अफसर की नहीं, बल्कि संघर्ष करके आगे बढ़ने की कहानी है.
बीड जिले के एक किसान परिवार में जन्मे तुकाराम मुंढे ने बचपन में आर्थिक परेशानियां देखीं. सीमित साधनों के बावजूद उन्होंने पढ़ाई नहीं छोड़ी. मेहनत के दम पर उन्होंने औरंगाबाद के डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर मराठवाड़ा विश्वविद्यालय से अपनी उच्च शिक्षा पूरी की.
मुंढे ने साल 2004 में UPSC परीक्षा पास की और पूरे देश में 20वीं रैंक हासिल की. इसके बाद वे 2005 बैच के महाराष्ट्र कैडर के IAS अधिकारी बने.
करीब 20 साल के करियर में उन्होंने कई बड़ी जिम्मेदारियां संभालीं. वे सहायक कलेक्टर, जिला कलेक्टर और नगर आयुक्त जैसे पदों पर रहे. उन्होंने PMPML के अध्यक्ष और प्रबंध निदेशक के तौर पर भी काम किया.
मुंढे की पहचान ऐसे अधिकारी के रूप में बनी, जो नियमों से समझौता नहीं करते. उनकी सादगी, मेहनत और अपने काम के प्रति ईमानदारी ने उन्हें लोगों के बीच एक अलग पहचान दिलाई.
25 तबादले, फिर भी नहीं बदला अंदाज
तुकाराम मुंढे अपने सख्त और बेबाक अंदाज के लिए जाने जाते हैं. करीब 20 साल की नौकरी में उनका 25 बार तबादला हो चुका है. नांदेड़, वाशिम, जालना, सोलापुर, नवी मुंबई, नासिक, नागपुर और पुणे जैसे कई शहरों में उन्होंने जिम्मेदारी संभाली.
मुंढे जहां भी गए, उन्होंने नियमों को सख्ती से लागू किया. मुंबई में भी उनकी कार्रवाई से कई रेस्तरां मालिकों में डर का माहौल बना. उन्होंने सिर्फ दो महीनों में 1,100 से ज्यादा छापे मारे.
गुटखा नेटवर्क पर भी कसा शिकंजा
गुटखा नेटवर्क के खिलाफ उन्होंने MCOCA जैसी सख्त कार्रवाई का इस्तेमाल किया. इतना ही नहीं, मुंबई की करीब 100 साल पुरानी कुछ संस्थाओं के लाइसेंस भी नियमों के उल्लंघन पर निलंबित कर दिए.
यही सख्त रवैया तुकाराम मुंढे को दूसरे अधिकारियों से अलग पहचान देता है. उनके लिए पद से ज्यादा जरूरी नियम और जिम्मेदारी रही है.
मुंबई के खाद्य कारोबार से जुड़े लोग अब तुकाराम मुंढे की कार्यशैली से अच्छी तरह वाकिफ हैं. उनसे मिलना आसान है, लेकिन नियमों में ढील की उम्मीद करना मुश्किल है.
महाराष्ट्र FDA आयुक्त का कार्यालय बांद्रा-कुर्ला कॉम्प्लेक्स में है. हर कार्यदिवस शाम 4 से 5 बजे तक उनका दरवाजा लोगों के लिए खुला रहता है. कोई भी व्यक्ति अपनी बात रखने के लिए उनसे मिल सकता है.
जनता की सेहत से खिलवाड़ पर सख्त चेतावनी
पद संभालने के बाद अपने पहले ही आधिकारिक बयान में मुंढे ने साफ कर दिया था कि जनता की सेहत से खिलवाड़ करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी. उन्होंने कहा था कि ऐसे किसी भी व्यक्ति या संस्थान के साथ प्रशासन किसी तरह की नरमी नहीं बरतेगा.
उनकी यही साफ सोच और सख्त रवैया उन्हें एक अलग पहचान देता है. उनके लिए सबसे पहले जनता की सेहत और नियमों का पालन है.
FDA आयुक्त बनते ही शुरू हुआ बड़ा एक्शन
25 मई 2026 को FDA आयुक्त का पद संभालने के बाद तुकाराम मुंढे ने मिलावट और नियम तोड़ने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई शुरू की.
उनके नेतृत्व में महाराष्ट्र FDA ने अब तक 1,100 से ज्यादा निरीक्षण किए हैं. इस दौरान करीब 50 करोड़ रुपये का खाद्य सामान जब्त किया गया. इसमें 1.6 लाख लीटर कथित मिलावटी दूध भी शामिल है.
मुंढे ने संगठित गुटखा नेटवर्क के खिलाफ MCOCA के तहत कार्रवाई की. इसके अलावा नियमों का उल्लंघन करने वाले 56 रेस्तरां के लाइसेंस भी निलंबित किए गए.
क्यों कहलाते हैं महाराष्ट्र के ‘रियल सिंघम’?
इन कार्रवाइयों से साफ है कि मुंढे जनता की सेहत से जुड़े मामलों में किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त करने के मूड में नहीं हैं. संघर्ष से लेकर IAS बनने और लगातार तबादलों के बावजूद अपने सख्त रवैये पर कायम रहने तक, उनकी कहानी एक ऐसे अफसर की है जो पद से ज्यादा नियम और जिम्मेदारी को महत्व देता है.
"महाराष्ट्र के IAS अधिकारी तुकाराम हरिभाऊ मुंढे अपनी सख्त लेकिन ईमानदार कार्यशैली के लिए जाने जाते हैं. उनकी कहानी सिर्फ एक अफसर की नहीं, बल्…"
