देश की राजधानी के जंतर-मंतर पर बीते 20 जुलाई को कॉकरोच जनता पार्टी यानी सीजेपी के प्रदर्शन के दौरान हुए हंगामे की अब सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में जांच होगी. प्रदर्शनकारियों पर पुलिस द्वारा किए गए बल प्रयोग के आरोपों को सुप्रीम कोर्ट ने बेहद गंभीरता से लिया है. मामले की तह तक जाने के लिए अदालत ने एक पांच सदस्यीय विशेष समिति का गठन कर दिया है. यह समिति यह तय करेगी कि पुलिस का एक्शन हालात के मुताबिक था या फिर इसमें किसी तरह की ज्यादती की गई.
क्या हैं प्रदर्शनकारियों के आरोप
CJP समर्थकों ने संसद की तरफ मार्च निकालने की कोशिश की थी जिसे पुलिस ने रोक दिया था. इसके बाद दोनों पक्षों में भारी टकराव देखने को मिला था. इस पूरे मामले में प्रदर्शनकारियों का साफ तौर पर आरोप है कि पुलिस ने बिना किसी ठोस वजह के पैलेट गन और आंसू गैस का बहुत ज्यादा इस्तेमाल किया. इसके अलावा शांति से आगे बढ़ रहे लोगों पर बेरहमी से लाठियां बरसाई गईं. यहां तक कि महिला प्रदर्शनकारियों के साथ भी हिंसक बर्ताव किया गया और भीड़ को नियंत्रित करने के पुलिस के तरीके पूरी तरह से अमानवीय थे.
दिल्ली पुलिस की दलील और बचाव
इस मामले में delhi police ने भी अपना पक्ष अदालत में मजबूती से रखा है. पुलिस प्रशासन ने मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट को बताया कि यह मार्च पूरी तरह से गैरकानूनी था क्योंकि इसके लिए कोई पहले से अनुमति नहीं ली गई थी. पुलिस की दलील है कि प्रदर्शन करने वालों की भीड़ में कई ऐसे लोग भी शामिल हो गए थे जिनका पुराना आपराधिक रिकॉर्ड रहा है.
दिल्ली पुलिस ने आगे कहा, उग्र भीड़ ने बैरिकेड्स तोड़कर ड्यूटी पर तैनात पुलिसकर्मियों पर हमला किया. इसलिये कानून व्यवस्था को कायम रखने के लिए पुलिस को मजबूरी में बल प्रयोग करना पड़ा, जो कि जरूरत से ज्यादा बिल्कुल नहीं था.
इन दिग्गजों के हाथों में है जांच की कमान
इस पूरे विवाद की निष्पक्ष जांच के लिए सुप्रीम कोर्ट ने जिन पांच दिग्गजों की समिति बनाई है, उसकी कमान सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज जस्टिस आर सुभाष रेड्डी को सौंपी गई है. उनके साथ पंजाब-हरियाणा उच्च न्यायालय के पूर्व चीफ जस्टिस रवि शंकर झा, दिल्ली उच्च न्यायालय की पूर्व जज जस्टिस शलिंदर कौर, सीबीआई के पूर्व डायरेक्टर ऋषि कुमार शुक्ला और मेघालय के पूर्व डीजीपी डॉक्टर एलआर बिश्नोई को भी इस अहम समिति का हिस्सा बनाया गया है. यह समिति जल्द ही अपनी विस्तृत रिपोर्ट सर्वोच्च न्यायालय को सौंपेगी जिससे घटना की असली सच्चाई सामने आ सकेगी.
"देश की राजधानी के जंतर-मंतर पर बीते 20 जुलाई को कॉकरोच जनता पार्टी यानी सीजेपी के प्रदर्शन के दौरान हुए हंगामे की अब सुप्रीम कोर्ट की निगरा…"
