नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने 28 सितंबर को ₹2,000 से ज्यादा के कुछ UPI पर्सन-टू-मर्चेंट (P2M) लेनदेन पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) लगाने के केंद्र के फैसले पर रोक लगाने से इनकार कर दिया. यह व्यवस्था 15 अक्टूबर से लागू होनी है. हालांकि कोर्ट ने इस मामले में केंद्र सरकार, भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) और भारतीय राष्ट्रीय भुगतान निगम (NPCI) को नोटिस जारी किया है.
चार हफ्ते में मांगा जवाब
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी. मोहना की पीठ ने केंद्र को चार हफ्ते के भीतर जवाबी हलफनामा (काउंटर एफिडेविट) दाखिल करने का निर्देश दिया. सीजेआई ने कहा कि यह मामला कानूनी से ज्यादा तकनीकी है और सरकार को अपने फैसले का आधार हलफनामे में बताना होगा.
यह याचिका अधिवक्ता अंजन दत्ता ने दायर की है. इसमें वित्त मंत्रालय की 14 और 15 सितंबर की गजट अधिसूचनाओं को चुनौती दी गई है. याचिका में केंद्र, RBI, NPCI और UPI एंड सर्विसेज स्टीयरिंग कमेटी को पक्षकार बनाया गया है.
कोर्ट में क्या हुआ?
सुनवाई के दौरान केंद्र की ओर से अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल (ASG) एन. वेंकटरमन ने कहा कि शुल्क 15 अक्टूबर से ही लागू होगा. उन्होंने बताया कि 96 प्रतिशत लेनदेन पर यह शुल्क नहीं लगेगा और जरूरी सेवाओं के लिए शुल्क की सीमा ₹5 तय की गई है. उन्होंने कहा, ‘यह न तो टैक्स है और न ही फीस.’
जस्टिस बागची ने सवाल किया कि अगर यह फीस नहीं है, तो इसे लगाने का कार्यकारी आधार क्या है और इसके बदले कौन सी सेवा दी जा रही है. इस पर ASG ने कहा कि यह किसी की संपत्ति लेना नहीं है. सरकार इस शुल्क से एक भी रुपया नहीं ले रही, यह पेमेंट एग्रीगेटर और बैंकों के बीच का सेटलमेंट शुल्क है.
ASG के मुताबिक, बैंकों को इलेक्ट्रॉनिक लेनदेन पर लागत आती है. क्रेडिट और डेबिट कार्ड लेनदेन पर शुल्क लगता है, जबकि UPI अब तक इससे मुक्त रहा है. उन्होंने कहा कि पूरा तंत्र कुशलता से चलता रहे, इसके लिए यह शुल्क जरूरी है.
नोटिस जारी होने के दौरान याचिकाकर्ता के वकील ने रोक की मांग की. उनका तर्क था कि इस कदम से काले धन के लेनदेन बढ़ सकते हैं. पीठ ने रोक लगाने से इनकार कर दिया. याचिका में यह चिंता भी जताई गई है कि कारोबारी अतिरिक्त लागत ग्राहकों पर डाल सकते हैं.
क्या है नई व्यवस्था?
सरकार ने कुछ खास उच्च-मूल्य वाले कमर्शियल UPI लेनदेन पर MDR की अनुमति देने वाला ढांचा तैयार किया है, जबकि आम लोगों और छोटे कारोबारियों के लिए UPI मुफ्त रहेगा. यह कदम पेमेंट एंड सेटलमेंट सिस्टम्स एक्ट, 2007 में संशोधन और सितंबर 2026 में जारी वित्त मंत्रालय की अधिसूचनाओं के बाद उठाया गया है.
वित्त मंत्रालय की 14 सितंबर की अधिसूचना अधिनियम की धारा 10A के तहत जारी हुई. इसमें RuPay डेबिट कार्ड भुगतान और ₹2,000 तक के UPI लेनदेन को ऐसे इलेक्ट्रॉनिक माध्यम बताया गया है, जिन पर बैंक और सिस्टम प्रोवाइडर भुगतान करने या लेने वाले से सीधे या परोक्ष रूप से कोई शुल्क नहीं ले सकते. यानी यह अधिसूचना तय सीमा तक के लेनदेन को संरक्षण देती है, हर UPI भुगतान पर शुल्क नहीं लगाती.
सरकार ने बाद में स्पष्ट किया कि व्यक्ति से व्यक्ति (P2P) लेनदेन राशि चाहे जितनी हो, हमेशा मुफ्त रहेंगे. ₹2,000 तक के मर्चेंट भुगतान और छोटे कारोबारियों के लिए जीरो-MDR ढांचे के तहत आने वाले लेनदेन भी मुफ्त रहेंगे.
ग्राहकों पर असर
MDR प्रोसेसिंग से जुड़ा शुल्क है. यह भुगतान तंत्र के भीतर वसूला जाता है और बैंकों तथा पेमेंट सर्विस प्रोवाइडर जैसी संस्थाओं में बंटता है. यह सरकार या NPCI द्वारा वसूला जाने वाला टैक्स नहीं है. वित्त मंत्रालय ने बैंकों से कहा है कि वे सुनिश्चित करें कि कारोबारी यह शुल्क उपभोक्ताओं पर न डालें. UPI ऐप प्रोवाइडर को भी उपयोगकर्ताओं से प्लेटफॉर्म फीस या छिपे शुल्क वसूलने से रोका गया है. सरकार के अनुसार, करीब 96 प्रतिशत मर्चेंट लेनदेन प्रभावित नहीं होंगे, क्योंकि वे या तो ₹2,000 से कम हैं या जीरो-MDR के दायरे में आते हैं.
अब निगाहें केंद्र के जवाबी हलफनामे पर रहेंगी, जिसमें उसे इस शुल्क का कानूनी और कार्यकारी आधार बताना होगा.
-ममता सिंह
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