देश में चीनी का औसत भाव अब करीब 52.30 रुपए प्रति किलो तक पहुंच चुका है. कुछ बाज़ारों में, खासकर पंजाब में, यह दर 65 रुपए प्रति किलो तक जा पहुंची है. पिछले साल इसी समय चीनी का औसत भाव सिर्फ 46.34 रुपए प्रति किलो था, यानी महज़ एक साल के भीतर चीनी करीब 13% महंगी हो चुकी है.
दाम बढ़ने की वजह क्या है?
कीमतों में इस उछाल के पीछे दो बड़ी वजहें बताई जा रही हैं. पहली, गणेश चतुर्थी, दशहरा और दिवाली जैसे त्योहारों के चलते चीनी की मांग में एकाएक बढ़ोतरी हुई है. दूसरी, गन्ने की फसल और आने वाले सीज़न के उत्पादन को लेकर बाज़ार में अनिश्चितता बनी हुई है, जिसका सीधा असर सप्लाई और कीमतों पर पड़ रहा है.
सरकार ने उठाए ये कदम
बढ़ती महंगाई को थामने के लिए सरकार ने अहम फैसला लिया है. 10 लाख टन कच्ची चीनी के ड्यूटी-फ्री आयात को मंज़ूरी दी गई है, करीब एक दशक बाद सरकार ने ऐसा कोई कदम उठाया है.
इसके अलावा, बड़े खरीदारों की जमाखोरी पर भी लगाम कसी गई है. 1 सितंबर से बड़े खरीदार सिर्फ 15 दिन की ज़रूरत जितना ही स्टॉक अपने पास रख सकेंगे, और यह नियम 30 नवंबर तक लागू रहेगा.
सरकार के इन कदमों का मकसद साफ है, जमाखोरी पर रोक लगाना और त्योहारों के दौरान बाज़ार में चीनी की सप्लाई बनाए रखना, ताकि कीमतों पर और दबाव न बने.
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