तृणमूल कांग्रेस के राज्यसभा सांसद सुखेंदु शेखर रॉय, सुष्मिता देव और प्रकाश चिक बारीक ने अपने पद से इस्तीफा देने के बाद गुरुवार को कोलकाता में बीजेपी की सदस्यता ग्रहण की. इसके तुरंत बाद बीजेपी ने 24 जुलाई को पश्चिम बंगाल की रिक्त हुई तीन राज्यसभा सीटों के उपचुनाव के लिए तीनों को उम्मीदवार घोषित कर दिया. चूंकि ये सीटें उनके इस्तीफों के कारण खाली हुई हैं और प्रत्येक सीट पर अलग-अलग चुनाव होगा, इसलिए उनकी जीत की संभावना काफी मजबूत मानी जा रही है.

क्या टीएमसी से और नेताओं का होगा पलायन?
सूत्रों का दावा है कि राज्यसभा में टीएमसी से नेताओं के बाहर जाने का सिलसिला अभी थमा नहीं है. पार्टी की सांसद रुक्मणी मलिक पहले ही इस्तीफा दे चुकी हैं, हालांकि उन्होंने अपना त्यागपत्र ईमेल के माध्यम से भेजा है. बताया जा रहा है कि औपचारिक प्रक्रिया पूरी करने के लिए वह जल्द ही उपसभापति से मुलाकात कर सकती हैं. इसके अलावा, राज्यसभा में टीएमसी के कुछ अन्य सांसदों के भी पार्टी छोड़ने की अटकलें लगाई जा रही हैं. यदि ऐसा होता है, तो उनके बीजेपी में शामिल होकर दोबारा राज्यसभा पहुंचने की संभावना पर भी चर्चा तेज हो सकती है.

राज्यसभा में बदलते समीकरण से  बढ़ सकता है दबाव
राज्यसभा में हालिया घटनाक्रम के बाद टीएमसी की स्थिति पहले की तुलना में कमजोर होती दिख रही है. पार्टी के पास पहले 13 सांसद थे, लेकिन कुछ नेताओं के अलग होने से उसकी संख्या घट गई है. राजनीतिक जानकारों का मानना है कि इसी परिस्थिति को ध्यान में रखते हुए बीजेपी ने इस्तीफा देने वाले नेताओं को उपचुनाव में उम्मीदवार बनाकर उन्हें दोबारा राज्यसभा भेजने की रणनीति अपनाई है. इस कदम से एक ओर बीजेपी उच्च सदन में अपनी ताकत बढ़ाने की कोशिश कर रही है, वहीं दूसरी ओर टीएमसी की राजनीतिक स्थिति पर भी असर पड़ सकता है.

टीएमसी नेताओं की एंट्री पर उठे राजनीतिक सवाल
टीएमसी के पूर्व नेताओं को बीजेपी में शामिल किए जाने के बाद पार्टी की पहले की घोषित नीति पर चर्चा तेज हो गई है. बीजेपी ने पहले संकेत दिए थे कि वह विपक्षी दलों के उन नेताओं को शामिल करने से बचेगी जिन पर गंभीर आरोप लगे हों. हालांकि प्रदेश अध्यक्ष शमिक भट्टाचार्य ने हाल ही में पार्टी में शामिल हुए नेताओं को विशेष परिस्थितियों का मामला बताते हुए उनका बचाव किया. उनका कहना था कि हर नेता का मूल्यांकन उसके व्यक्तिगत राजनीतिक रिकॉर्ड और योगदान के आधार पर किया जाता है.

राज्यसभा में बीजेपी की बढ़ती ताकत
7 मनोनीत और 3 निर्दलीय दल के समर्थन को मिलने से बीजेपी इस बार 117 के ऐतिहासिक आकड़े को पार कर जाएगी. 24 जुलाई को  bjp को  बहुमत  साबित करने के लिए सिर्फ 6 सीटे दूर है. वहीं अगर छोटी पार्टियों ने समर्थन कर दिया तो  यह आकड़ा 127 सीटों को पार कर जायेगा. इससे बीजेपी के  सहयोगी दलों का आकड़ा 26 हो  जायेगा. वहीं सहयोगी दलों के साथ यह संख्या दो तिहाई के आंकड़े यानी 164 के करीब पहुंच रही है. दूसरी ओर, सहयोगी दलों के सांसदों को जोड़ने पर एनडीए की कुल ताकत 153 तक पहुंच सकती है, जो राज्यसभा में दो-तिहाई बहुमत के आंकड़े से केवल 11 सीट कम है.

लोकसभा में  बदल सकते हैं सियासी समीकरण
टीएमसी को लोकसभा में पूरी तरह से खतम करने के लिए बीजेपी ने नई रड़नीति के तहत काम करना शुरू कर दिया है. सूत्रों के अनुसार एनसीपी के 28 में से 20 सांसदों ने एनडीए को समर्थन दे दिया है. अगर इस पर स्पीकर की मुहर लग जाती है, तो एनडीए की संख्या लोकसभा में बढ़ जाएगी. हालांकि इसके बावजूद भी एनडीए दो तिहाई आंकड़े से पीछे है.

क्या छीन जाएगी ममता बनर्जी से TMC?
पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी की पार्टी TMC पर कब्जे के लिए बड़ा राजनीतिक खेल शुरू हो गया है. कोलकाता में रितुब्रता बनर्जी की अगुवाई में 60 से अधिक विधायकों ने बगावत कर दी है, जिन्हें स्पीकर ने 'नेता विपक्ष' मान लिया है. रितुब्रता ने खुद को असली TMC बताते हुए चुनाव आयोग में पार्टी और निशान पर दावा ठोक दिया है. ममता बनर्जी अब दोतरफा कानूनी जंग में घिर गई हैं. कोलकाता में जहां उन्हें अपनी ही पार्टी पर हक साबित करना है, वहीं दिल्ली में संसद के 20 बागी सांसदों को अयोग्य घोषित कराने की चुनौती है. इन सांसदों ने एक अन्य दल में विलय की तैयारी की है, जिसे ममता गुट ने सुप्रीम कोर्ट के महाराष्ट्र (शिवसेना) वाले फैसले का हवाला देकर लोकसभा अध्यक्ष के सामने चुनौती दी है.

 

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