वैश्विक संकेतों में कमजोरी, विदेशी निवेशकों की बिकवाली और डॉलर-बॉन्ड यील्ड से जुड़ी चिंताओं के बीच भारतीय शेयर बाजार में गुरुवार को जोरदार गिरावट रही. बीएसई सेंसेक्स 1,247.71 अंक यानी 1.67 प्रतिशत टूटकर 73,580.54 पर बंद हुआ. निफ्टी भी 23,100 के स्तर से नीचे चला गया.
सेंसेक्स 74,272.40 पर खुला और शुरुआती कारोबार में 74,362.29 का उच्चतम स्तर बनाया. बाद में बिकवाली बढ़ने से यह 73,563.92 तक फिसल गया. अंततः 73,580.54 पर बंद हुआ. सेंसेक्स के 30 प्रमुख शेयरों में से 29 शेयरों में गिरावट देखी गई.
क्यों टूटा बाजार?
IRDAI के नए नियम : बीमा नियामक (IRDAI) ने एक नया प्रस्ताव जारी किया है, जिसमें बीमा कमीशन और डिस्ट्रीब्यूशन खर्चों पर सख्त पाबंदियां लगाने की बात कही गई है. इससे उन बैंकों और कंपनियों को बड़ा झटका लगा है जो बीमा बेचकर भारी मुनाफा कमाते हैं (जैसे- Policybazaar/PB Fintech के शेयर में लगभग 30% की ऐतिहासिक गिरावट आई, और एक्सिस बैंक, एचडीएफसी बैंक, बजाज फाइनेंस जैसे बड़े शेयर भी बुरी तरह टूटे). बाजार में इनका वजन सबसे ज्यादा होने के कारण पूरा सूचकांक नीचे आ गया.
कच्चे तेल की कीमतें बढ़ना: अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमत बढ़कर 102 डॉलर प्रति बैरल के पार चली गई है. तेल महंगा होने से भारत का आयात बिल बढ़ता है और देश में महंगाई बढ़ने का डर पैदा हो जाता है.
अमेरिकी बॉंड यील्ड और ग्लोबल संकेत: अमेरिका में 10 साल के सरकारी बॉंड की यील्ड बढ़कर 5.11% के आसपास पहुंच गई है. इसके चलते अमेरिकी शेयर बाजारों (Wall Street) में कमजोरी आई थी, जिसका असर आज भारतीय बाजारों पर भी देखने को मिला. विदेशी निवेशकों ने पैसा निकाला.
भू-राजनीतिक तनाव : अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के कारण वैश्विक स्तर पर निवेशक जोखिम उठाने से बच रहे हैं, जिससे दुनिया भर के बाजारों में बिकवाली का माहौल है.
सितंबर में अब तक विदेशी निवेशकों की भारतीय इक्विटी से करीब ₹20,974 करोड़ की निकासी की रिपोर्ट सामने आई है.
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सोना-चाँदी में भी नरमी
शेयर बाजार की गिरावट के साथ कीमती धातुओं में भी नरमी दिखाई दी. डॉलर की मज़बूती और वैश्विक बुलियन बाजार में दबाव के बीच घरेलू बाजार में सोने और चाँदी के भाव कमजोर रहे. 24 कैरेट सोने का भाव करीब ₹1,54,360 प्रति 10 ग्राम बताया गया. हालांकि, शहर, ज्वेलर, टैक्स और अन्य शुल्कों के कारण खुदरा कीमत अलग हो सकती है. चाँदी के भाव में भी कमजोरी रही.
अब बाजार की नजर किन संकेतों पर?
आने वाले सत्रों में निवेशकों की नजर विदेशी निवेशकों की गतिविधियों, डॉलर-रुपये की चाल, कच्चे तेल की कीमत, अमेरिकी बाजारों और वैश्विक ब्याज दरों पर रहेगी. एक दिन की तेज गिरावट से बाजार की अगली दिशा तय नहीं होती, इसलिए आगे के कारोबारी सत्रों में इन संकेतकों की चाल महत्वपूर्ण होगी.
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