भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (सेबी) ने पूंजी बाजार से जुड़े दो महत्वपूर्ण फैसले लिए हैं. सेबी ने कंपनियों को दोबारा ओपन मार्केट के जरिए शेयर बायबैक की अनुमति दे दी है, वहीं म्यूचुअल फंड हाउसों को ‘इंट्रा-डे बॉरोइंग’ (दिन के दौरान उधार लेने) की सुविधा भी प्रदान की है. इन कदमों का उद्देश्य बाजार में पारदर्शिता बढ़ाने के साथ-साथ वित्तीय संस्थानों की परिचालन क्षमता को मजबूत करना है.

कंपनियां फिर कर सकेंगी ओपन मार्केट बायबैक

सेबी ने 1 अप्रैल 2025 से ओपन मार्केट बायबैक पर रोक लगा दी थी. नियामक का मानना था कि इस व्यवस्था में पारदर्शिता और निवेशकों के साथ समान व्यवहार सुनिश्चित करने की जरूरत है. अब नए नियमों के साथ इस प्रक्रिया को फिर से शुरू करने की मंज़ूरी दे दी गई है.

नई व्यवस्था के तहत कंपनियों को बायबैक प्रक्रिया 60 दिनों या 66 कार्य दिवसों के भीतर पूरी करनी होगी. इसके अलावा, प्रमोटरों को ओपन मार्केट बायबैक में भाग लेने की अनुमति नहीं होगी, जिससे सभी निवेशकों के लिए समान अवसर सुनिश्चित किया जा सके.

सेबी ने यह भी स्पष्ट किया है कि बायबैक के लिए अलग से ट्रेडिंग विंडो खोलने की आवश्यकता नहीं होगी। यह नई व्यवस्था 1 अगस्त 2026 से प्रभावी होगी.

फंड के उपयोग पर सख्त नियम

ओपन मार्केट बायबैक को अधिक जवाबदेह बनाने के लिए सेबी ने फंड उपयोग से जुड़े नियम भी तय किए हैं. अब कंपनियों को घोषित बायबैक राशि का कम से कम 40 प्रतिशत हिस्सा छह महीने के भीतर खर्च करना अनिवार्य होगा.

यदि कोई कंपनी निर्धारित न्यूनतम राशि का उपयोग नहीं करती है, तो इसे नियमों का उल्लंघन माना जाएगा और सेबी उसके खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई कर सकेगा. इससे यह सुनिश्चित होगा कि कंपनियां केवल घोषणा करके निवेशकों को आकर्षित न करें, बल्कि वास्तव में बायबैक योजना को लागू भी करें.

क्या होता है शेयर बायबैक?

शेयर बायबैक वह प्रक्रिया है, जिसमें कोई कंपनी बाजार से अपने ही जारी किए गए शेयरों को वापस खरीदती है. आमतौर पर कंपनियां तब बायबैक का फैसला करती हैं, जब उन्हें लगता है कि उनका शेयर बाजार में अपनी वास्तविक कीमत से कम मूल्य पर कारोबार कर रहा है.

बॉयबैक के बाद बाजार में उपलब्ध शेयरों की संख्या घट जाती है, जिससे प्रति शेयर आय (EPS) में सुधार हो सकता है. साथ ही यह कंपनी प्रबंधन के अपने कारोबार और भविष्य की संभावनाओं के प्रति विश्वास का संकेत भी माना जाता है. अक्सर बायबैक की घोषणा को शेयरधारकों के लिए सकारात्मक कदम के रूप में देखा जाता है.

म्यूचुअल फंड को मिली ‘इंट्रा-डे बॉरोइंग’ की सुविधा

सेबी ने म्यूचुअल फंड उद्योग को राहत देते हुए ‘इंट्रा-डे बॉरोइंग’ की अनुमति भी दे दी है. इसके तहत म्यूचुअल फंड हाउस दिन के दौरान अस्थायी नकदी जरूरतों को पूरा करने के लिए अल्पकालिक उधार ले सकेंगे.

हालांकि, इस सुविधा का उपयोग निवेश पर अतिरिक्त दांव लगाने या लेवरेज बढ़ाने के लिए नहीं किया जा सकेगा. एसेट मैनेजमेंट कंपनियों (AMCs) को लिया गया पूरा उधार उसी कारोबारी दिन के अंत तक चुकाना होगा.

बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि इन दोनों फैसलों से एक ओर कंपनियों को पूंजी प्रबंधन में अधिक लचीलापन मिलेगा, वहीं दूसरी ओर म्यूचुअल फंड उद्योग की तरलता प्रबंधन क्षमता भी मजबूत होगी. सेबी के ये कदम भारतीय पूंजी बाजार को अधिक पारदर्शी, व्यवस्थित और निवेशक-अनुकूल बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं.

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