मुंबई, अगस्त 18: महाराष्ट्र के हिंगोली जिले में एक जिला परिषद स्कूल के प्रिंसिपल को शराब के नशे में रहने के आरोप में निलंबित कर दिया गया है. यह कार्रवाई कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक अभिजीत दिपके की मांग और ग्रामीणों के अनशन के बाद हुई.  यह मामला एक बार फिर सरकारी स्कूलों की बदहाल व्यवस्था और प्रशासनिक निगरानी की कमी को लेकर चर्चा में है.

कैसे शुरू हुआ मामला
दो दिन पहले अभिजीत दिपके ने हिंगोली जिले के संतुक पिंपरी गांव स्थित जिला परिषद स्कूल का निरीक्षण किया था.  इस दौरे में उन्होंने स्कूल के प्रिंसिपल पर शराब के नशे में स्कूल आने और ड्यूटी के दौरान नशे में रहने का आरोप लगाया.  दिपके ने इसे बच्चों की शिक्षा और सुरक्षा के साथ सीधा खिलवाड़ बताते हुए प्रशासन से तत्काल कार्रवाई और प्रिंसिपल के निलंबन की मांग रखी थी.  उनके इस दौरे के वीडियो और आरोपों ने स्थानीय स्तर पर हलचल मचा दी, जिसके बाद ग्रामीण भी एकजुट हो गए थें.

मंगलवार को दिपके ने एक बार फिर गांव का दौरा किया, इस दौरान वे स्कूल की बेहतर व्यवस्था की मांग को लेकर अनशन पर बैठे ग्रामीणों से मिले. ग्रामीणों का कहना था कि लंबे समय से स्कूल में शिक्षकों की कमी, बुनियादी सुविधाओं के अभाव और प्रशासनिक उदासीनता के चलते बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हो रही थी.

चार नए शिक्षक नियुक्त, बेंच भी पहुंचीं
दिपके के मुताबिक, ग्रामीणों के अनशन और लगातार दबाव के बाद आखिरकार प्रशासन को झुकना पड़ा.  उन्होंने बताया कि प्रशासन ने ग्रामीणों की सभी प्रमुख मांगें मान ली हैं.  इसके तहत प्रिंसिपल को निलंबित करने के साथ-साथ स्कूल में तत्काल प्रभाव से चार नए शिक्षकों की नियुक्ति पर भी सहमति बन गई है.  इसके अलावा, बच्चों के बैठने के लिए लंबे समय से मांगी जा रही बेंचें भी स्कूल में पहुंचा दी गई हैं.  दिपके ने इसे ग्रामीणों की एकजुटता और लगातार संघर्ष का नतीजा बताया.

देशभर में फैल रहा 'स्कूल ठीक करो' अभियान
अभिजीत दिपके का कहना है कि हिंगोली अकेला मामला नहीं है, यह एक बड़े राष्ट्रव्यापी आंदोलन का हिस्सा है.  उनके अनुसार, देश के कई राज्यों में Gen Alpha पीढ़ी के युवा सरकारी स्कूलों की बदहाल हालत के खिलाफ आवाज़ उठा रहे हैं और स्थानीय प्रशासन पर बेहतर सुविधाएं मुहैया कराने का दबाव बना रहे हैं.  दिपके के मुताबिक यह अभियान अलग-अलग राज्यों में स्थानीय स्तर पर संगठित होकर स्कूलों के निरीक्षण, ग्रामीणों को जोड़ने और प्रशासन से सीधे जवाबदेही मांगने के तरीके पर काम कर रहा है.

दिपके ने सरकार पर आरोप लगाते हुए कहा कि सरकारी तंत्र स्कूलों की वास्तविक स्थिति को जनता से छुपाने की कोशिश करता रहा है, लेकिन उनका मानना है कि जमीनी हकीकत को दबाकर बदला नहीं जा सकता.  उनका कहना है कि जब तक स्थानीय लोग खुद आगे आकर सवाल नहीं उठाएंगे, तब तक व्यवस्थागत बदलाव संभव नहीं होगा.

अब्दुल और उसके पिता की मौत का भावुक ज़िक्र
इस मौके पर दिपके ने अपने साथी अब्दुल का भावुक ज़िक्र किया.  उन्होंने बताया कि अब्दुल पहले उनके साथ जंतर मंतर पर हुए प्रोटेस्ट में शामिल था.  जब दिपके ने 'स्कूल ठीक करो' अभियान की शुरुआत की, तो अब्दुल बंगाल चला गया और वहां जाकर सरकारी स्कूलों की स्थिति का निरीक्षण करने लगा.

दिपके के आरोप के अनुसार, इस दौरान अब्दुल के साथ मारपीट की घटना हुई.  जब अब्दुल को बचाने के लिए उसके पिता मौके पर पहुंचे, तो मारपीट में उनकी मौत हो गई.  दिपके ने भावुक होते हुए कहा कि अब्दुल उनके लिए परिवार की तरह है, उनका भाई है.  उन्होंने आरोप लगाया कि पिछले दस वर्षों में देश में "नफरत की राजनीति" लगातार बढ़ी है, और अब्दुल व उसका परिवार भी इसी माहौल का शिकार बना.

दिपके ने हिंगोली में प्रिंसिपल के निलंबन को इसी संदर्भ में देखते हुए इसे अब्दुल और उसके पिता की "जीत" करार दिया, यानी उनके अनुसार यह कार्रवाई सिर्फ एक प्रशासनिक फैसला नहीं, बल्कि उस संघर्ष और बलिदान का प्रतीक है जो अभियान के दौरान हुआ.

अभियान जारी रहने का ऐलान
दिपके ने साफ किया कि यह अभियान यहीं नहीं रुकेगा.  उनका कहना है कि जब तक देशभर के सभी सरकारी स्कूलों की स्थिति में सुधार नहीं होता, चाहे वह शिक्षकों की कमी हो, बुनियादी ढांचे की बदहाली हो या प्रशासनिक लापरवाही, तब तक 'स्कूल ठीक करो' अभियान अलग-अलग राज्यों में जारी रहेगा.  उन्होंने ग्रामीणों और स्थानीय समुदायों से आगे भी इसी तरह लामबंद होकर आवाज़ उठाने की अपील की.

 

-ममता सिंह 

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