सुप्रीम कोर्ट ने पश्चिम बंगाल विधानसभा के स्पीकर से कहा है कि वो तृणमूल कांग्रेस (TMC) के 10 बागी विधायकों की अयोग्यता से जुड़ी याचिकाओं पर जल्द फैसला लें. यह याचिका TMC विधायक शोभनदेव चट्टोपाध्याय ने दायर की है. इसमें दल-बदल विरोधी कानून के तहत इन विधायकों की सदस्यता रद्द करने की मांग की गई है.
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी. मोहना की पीठ ने 28 सितंबर को शोभनदेव चट्टोपाध्याय की रिट याचिका का निपटारा कर दिया. पीठ ने 2021 के केशम मेघचंद्र सिंह बनाम स्पीकर (मणिपुर विधानसभा) फैसले का हवाला दिया. उस फैसले में कहा गया था कि अयोग्यता की याचिका पर निर्णय लेते समय स्पीकर एक ट्रिब्यूनल की तरह काम करता है. इसलिए उसे यह फैसला उचित समय के भीतर, यानी तीन महीने में, करना चाहिए.
फैसले में देरी का पैटर्न
याचिकाकर्ता की ओर से वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल और कल्याण बंद्योपाध्याय पेश हुए. सिब्बल ने कोर्ट में कहा कि ऐसी याचिकाओं पर फैसला टालने का एक पैटर्न बन गया है. इसका फायदा टूटकर अलग हुए गुट को मिलता है, क्योंकि उसे खुद को असली पार्टी घोषित करा लेने का मौका मिल जाता है. इस संदर्भ में महाराष्ट्र का उदाहरण दिया जाता रहा है, जहां शिवसेना विधायकों के मामले में स्पीकर ने 2022 से 2024 तक कोई फैसला नहीं लिया था.
विधानसभा सचिवालय पहले ही भेज चुका है नोटिस
विधानसभा सचिवालय ने इससे पहले इन 10 विधायकों को नोटिस भेजकर जवाब मांगा था. इनमें ऋतब्रत बनर्जी और अरुप रॉय भी शामिल हैं. रिपोर्टों के मुताबिक विधायकों को जवाब देने के लिए एक हफ्ते का समय दिया गया था. बागी गुट के प्रवक्ता ऋजु दत्ता ने इसे नियमित प्रक्रिया का हिस्सा बताया है.
क्या है पूरा विवाद?
TMC में फूट की यह लड़ाई अब अदालत और विधानसभा दोनों जगह पहुंच गई है. एक तरफ ममता बनर्जी का गुट है, जिसे ‘कालीघाट कैंप’ कहा जा रहा है. दूसरी तरफ ऋतब्रत बनर्जी की अगुवाई वाला बागी गुट है, जो खुद को ‘असली TMC’ बताता है. बागी गुट का दावा है कि पार्टी के 80 में से 65 विधायक उसके साथ हैं.
रिपोर्टों के अनुसार 22 जून 2026 को बुलाए गए एक विशेष सत्र के बाद ममता गुट ने 8 जुलाई को 10 विधायकों के खिलाफ अयोग्यता याचिकाएं दायर की थीं. शोभनदेव चट्टोपाध्याय ने स्पीकर रथिन बोस को 7 जुलाई को पत्र भी लिखा था. इसके बाद उन्होंने फैसले में देरी का आरोप लगाते हुए सुप्रीम कोर्ट का रुख किया.
आगे क्या?
अब फैसला स्पीकर के पाले में है. अगर स्पीकर तय समय में फैसला लेते हैं और 10 विधायक अयोग्य ठहराए जाते हैं, तो बागी गुट की ताकत और उसके ‘असली TMC’ होने के दावे को बड़ा झटका लगेगा. अगर फैसला बागी गुट के पक्ष में जाता है, तो ममता गुट के पास दोबारा अदालत जाने का रास्ता खुला रहेगा.
-ममता सिंह
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