अभी  अयोध्या राम मंदिर चोरी का मामला  थमा भी नहीं था.  की कैलाश  विजयवर्गीय के आरएसएस में शामिल सरकारी कर्मचारी वाला बयान।  एक  बार फिर से   संघ पर सवाल खड़े कर दिए हैं. उनके इस बयान से  सियासी गहमा -गहमी  और  तेज़ हो गई  है. आगे जवाब देते हुए उन्होंने कहा ,'तेज़ी से बढ़ते संगठन में अच्छे लोगों की कमी हो रही है.   इससे वैचारिक मतभेद हो सकता है; हलांकि  यह पहला मौका नहीं है. जब आरएसएस के जुड़ाव पर विवाद हुआ है. इससे पहले 1981 में कांग्रेस नें सरकारी कर्मचारियों को शाखाओं में शामिल होने पर रोक लगाई थी.

साल 2000 में दिग्विजय सिंह नें उठाई थी बात 
कांग्रेस के मुख्यमंत्री  दिग्विजय सिंह नें साल 2000 में इस बात को उठाया था. फिर  बीजेपी सरकर बनते ही  इसे हटा दिया था. 9 जुलाई 2024 को भारत सरकार के कार्मिक लोक शिकायत और पेंशन मंत्रालय ने कार्यालय में ज्ञापन जारी कर सरकारी कर्मचारियों के राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की गतिविधियों पर लगे 58 साल के प्रतिबंध को हटा दिया. विजयवर्गीय के इस बयान पर कांग्रेस नें मोर्चा सँभालते हुए घेरना शुरू कर दिया है.

विजयवर्गीय नें क्या बयान दिया ? 
भोपाल में आयोजित शालिग्राम तोमर स्मृति कार्यक्रम में शामिल हुए थे. इस कार्यक्रम को संबोधित करते हुए उन्होंने ने कहा  ,'हम सरकार में हैं तो कोई अधिकारी आता है और कहता है कि सर मैं शाखा में जाता था. अरे भाई तुम अभी जाते हो, हमारी सरकार बनी उसके पहले तो कभी तुमने बताया नहीं.; हर अधिकारी के मन में कुछ न कुछ रहता है कि मैं भी दिखाऊं कि मैंने भी बेल्ट पहनी है. हर अधिकारी और कर्मचारी यही सोचता है. सरकार आने के बाद सब संघ के हो गए. हर अधिकारी संघ का हो गया. मेरे पिताजी शाखा में जाते थे.

आगे जवाब देते हुए कहते है , 'शालिग्राम जी अच्छे इंसान थे, देवधर जी अच्छे इंसान थे और सदाशिव जी अच्छे इंसान थे. ऐसे लोग कम ही मिलते हैं. संगठन बढ़ रहा है और कहने के लिए विचारधारा भी बढ़ रही है. लेकिन अगर अच्छे इंसान ही न हों, तो उस विचारधारा के महत्व पर हमें चिंतन और मनन करना चाहिए; हलांकि उनके इस बयान पर राष्ट्रीय और प्रदेश स्तर पर किसी ने भी प्रतिक्रिया नहीं दी है.


कांग्रेस ने क्या दी प्रतक्रिया ?
विजयवर्गीय के इस बयान को आड़े  हाँथ  लेते हुए कांग्रेस के उमंग सिंघार ने कहा ,'यह साफ संकेत है की सरकार ने प्रशासनिक व्यवस्था में ऐसा माहौल बना दिया है. जंहा निस्पक्षता नहीं ,बल्कि वैचारिक पहचान को सुरक्षा कवच समझा जा रहा है;.  इसके बाद प्रतिपक्ष  नेता और सांसद राजीव शुक्ला ने एक्स (X ) पर पोस्ट करते हुए कहते हैं ,'कैलाश जी ने बहुत सही बात कही. आज बीजेपी और अफसरों की कलई खोल दी;

जब शाखा में शामिल होनें पर हटी पाबंदी 
कांग्रेस ने साल 2000 में दिग्विजय सिंह के मुख्यमंत्री रहते हुए एक आदेश जारी किया था. इस आदेश में उन्होंने कहा था , अगर कोई सरकारी कर्मचारी शाखाओ या संगठन की गतिविधियों में शामिल  पाया गया तो एमपी सिविल सर्विस (क्लासिफिकेशन ,कंट्रोल एंड अपील ) रूल्स 1966 के तहत करवाई होगी. हलांकि 2006 में तत्कालीन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने यह रोक हटा दी थी.

उस वक्त इंडियन एक्सप्रेस से बात करते हुए हरियाणा सरकार के एक वरिष्ठ अधिकारी ने 2016 लाये हुए नए रूल्स में बताया था.' राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ या जमात-ए -इस्लामी ऐसे राजनीतिक संगठन नहीं हैं जो चुनाव आयोग में रजिस्टर्ड हों;. राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ एक सांस्कृतिक संगठन है. इसलिए हरियाणा सरकार ने केवल गृह मंत्रालय के निर्देशों को दोहराया है. किसी भी सरकारी कर्मचारी को इन संगठनों से जुड़े रहने से प्रतिबंधित नहीं किया गया है. उनका कहना था कि आरएसएस एक 'सामाजिक-सांस्कृतिक संगठन है, राजनीतिक इकाई नहीं है. ऐसा प्रतिबंध पूर्वाग्रह के कारण लगाया गया था;.

 

"अभी  अयोध्या राम मंदिर चोरी का मामला  थमा भी नहीं था.  की कैलाश  विजयवर्गीय के आरएसएस में शामिल सरकारी कर्मचारी वाला बयान।  एक  बार फिर से  …"