भारतीय रिज़र्व बैंक (आरबीआई) ने वित्त वर्ष 2025-2026 के लिए वार्षिक सर्वेक्षण प्रारंभ किया है, जिसके माध्यम से आरबीआई म्यूचुअल फंड कंपनियों के विदेशी देनदारियाँ एवं परिसंपत्तियाँ तथा सेवा क्षेत्र के कम्प्यूटर सॉफ्टवेयर और सूचना प्रौद्योगिकी आधारित सेवाओं के निर्यात का विवरण जुटाएँगी.
क्या है म्यूचुअल फंड सर्वेक्षण
भारतीय रिज़र्व बैक प्रत्येक वर्ष म्यूचुअल फंड सर्वेक्षण कराती है. सर्वेक्षण के माध्यम से यह जानकारी जुटाई जाती है कि देश के म्यूचुअल फंड कंपनियों के पास कितनी विदेशी सम्पत्तियाँ हैं और उसके पास कितनी विदेशी देनदारियाँ है. पहले यह सर्वेक्षण एक्सेल आधारित ई-मेल सिस्टम पर था, लेकिन इसमें अब बदलाव करके ऑनलाइन CIMS पोर्टल पर कर दिया गया है.
कंपनियों से यह जानकारी मार्च 2026 तक के आकड़े के लिए माँगी गई है. सर्वेक्षण में शामिल होने के लिए सभी कंपनियों को 7 जुलाई 2026 तक का समय दिया गया है. इस डेटा का इस्तेमाल भारत के बाहरी आर्थिक आंकड़ों (External Sector Statistics) को तैयार करने के लिया किया जाएगा।
कम्प्यूटर सॉफ्टवेयर और आईटीईस निर्यात का सर्वेक्षण
यह सर्वेक्षण कम्प्यूटर सॉफ्टवेयर और सूचना प्रौद्योगिकी आधारित सेवाओं के निर्यात की सम्पूर्ण आकड़े प्रस्तुत करता है.
यह बतलाता है कि देश से कौन-कौन सी सेवाएँ एवं कितनी मूल्य की सेवाओं का निर्यात होता है. देश की सभी छोटी एवं बड़ी आईटी कंपनियाँ इसमें सम्मिलित होंगी.
यह आकड़े देश की आर्थिक दिशा को तय करने में मदद करते है. देश की 55 प्रतिशत जीडीपी सेवा क्षेत्र पर निर्भर है. सेवा निर्यात के आकड़े जितने अच्छे होंगे देश के राजस्व के लिए उतना ही लाभकारी रहेगा. इस सर्वेक्षण के लिए भी CIMS पोर्टल के माध्यम से ऑनलाइन आवेदन करना होंगा.
क्या है आईटीईस निर्यात
आईटीईस(ITES) जिसका पूर्ण रूप इंफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी इनेबल्ड सर्विसेस है, जिसको हिंदी में सूचना प्रौद्योगिकी आधारित सेवाएँ कहते है. इन सेवाओं में कॉल सेंटर और बिजनेस प्रोसेसिंग आउटसोर्सिंग (बीपीओं), ई-कॉमर्स सपोर्ट जैसे अमेजन और फ्लिपकार्ट में शॉपिंग के दौरान ग्राहकों के ऑडर और सवालों का हल बतलाना, डिजिटल मार्केटिंग, डेटा इंट्री, कंपनियों का लेखा-जोखा (अकाउटिंग) इत्यादि शामिल है.
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