भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) ने देश के गैर-बैंकिंग वित्तीय संस्थानों (NBFC) के लिए स्केल आधारित विनियमन  के तहत वर्ष 2026-27 के लिए अपर लेयर (NBFC-UL) की नई सूची जारी कर दी है. इस सूची में कुल 17 बड़ी एनबीएफसी को शामिल किया गया है.

इन कंपनियों पर अब आरबीआई की ओर से अधिक कड़ी नियामकीय निगरानी और सख्त अनुपालन संबंधी नियम लागू होंगे. यह सूची 31 मार्च 2026 तक उपलब्ध वित्तीय आंकड़ों के आधार पर तैयार की गई है.

क्या है एनबीएफसी अपर लेयर?

आरबीआई ने एनबीएफसी क्षेत्र को उनके आकार, जोखिम और वित्तीय प्रणाली पर प्रभाव के आधार पर चार श्रेणियों में विभाजित किया है. इनमें बेस लेयर, मिडिल लेयर, अपर लेयर और टॉप लेयर शामिल हैं. अपर लेयर में उन्हीं कंपनियों को रखा जाता है, जिनका वित्तीय प्रणाली पर बड़ा प्रभाव होता है और जिनके लिए अतिरिक्त नियामकीय निगरानी आवश्यक मानी जाती है.

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किन-किन कंपनियों को किया गया शामिल?

आरबीआई द्वारा जारी सूची में निम्नलिखित प्रमुख कंपनियां शामिल हैं-

  • आरईसी लिमिटेड (REC)
  • पावर फाइनेंस कॉर्पोरेशन लिमिटेड (PFC)
  • इंडियन रेलवे फाइनेंस कॉर्पोरेशन (IRFC)
  • बजाज फाइनेंस लिमिटेड
  • श्रीराम फाइनेंस लिमिटेड
  • एलआईसी हाउसिंग फाइनेंस लिमिटेड
  • चोलामंडलम इन्वेस्टमेंट एंड फाइनेंस कंपनी लिमिटेड
  • टाटा कैपिटल लिमिटेड
  • टाटा संस प्राइवेट लिमिटेड
  • मुथूट फाइनेंस लिमिटेड
  • आदित्य बिड़ला कैपिटल लिमिटेड
  • हाउसिंग एंड अर्बन डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन (HUDCO)
  • महिंद्रा एंड महिंद्रा फाइनेंशियल सर्विसेज लिमिटेड
  • एलएंडटी फाइनेंस लिमिटेड
  • बजाज हाउसिंग फाइनेंस लिमिटेड
  • एचडीबी फाइनेंशियल सर्विसेज लिमिटेड
  • पिरामल फाइनेंस लिमिटेड

क्यों महत्वपूर्ण है यह सूची?

अपर लेयर में शामिल कंपनियों को पूंजी पर्याप्तता, जोखिम प्रबंधन, कॉरपोरेट गवर्नेंस, प्रकटीकरण और नियामकीय अनुपालन से जुड़े अधिक कठोर मानकों का पालन करना होगा. इसका उद्देश्य वित्तीय प्रणाली को अधिक सुरक्षित और स्थिर बनाना है तथा बड़े वित्तीय संस्थानों से जुड़े संभावित जोखिमों को कम करना है.

पीएनबी हाउसिंग फाइनेंस और सम्मान कैपिटल पर क्या होगा?

आरबीआई के अनुसार, पीएनबी हाउसिंग फाइनेंस लिमिटेड और सम्मान कैपिटल लिमिटेड इस बार नए मानदंडों के अनुसार अपर लेयर की सूची में शामिल नहीं हैं. इसके बावजूद, नियामकीय प्रावधानों के तहत कोई भी एनबीएफसी एक बार अपर लेयर में वर्गीकृत होने के बाद कम से कम पांच वर्षों तक उसी श्रेणी के कड़े नियामकीय नियमों के अधीन रहती है, इसलिए इन दोनों कंपनियों पर भी पहले की तरह सख्त नियामकीय प्रावधान लागू रहेंगे.

आम लोगों पर क्या होगा असर?

इस निर्णय का सीधा प्रभाव ग्राहकों के ऋण, ब्याज दरों या सेवाओं पर नहीं पड़ेगा, हालांकि, इससे बड़ी एनबीएफसी कंपनियों की निगरानी और जोखिम प्रबंधन व्यवस्था अधिक मजबूत होगी, जिससे वित्तीय क्षेत्र की स्थिरता बढ़ेगी और निवेशकों तथा ग्राहकों का भरोसा मजबूत होने की उम्मीद है.

 

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