भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) ने हाल ही में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए कर्नाटक के गोकक जिले स्थित 'श्री महालक्ष्मी अर्बन को-ऑपरेटिव क्रेडिट बैंक लिमिटेड' का बैंकिंग लाइसेंस रद्द कर दिया है. 16 जून, 2026 को जारी इस आदेश के साथ ही, बैंक ने 18 जून, 2026 को कारोबार की समाप्ति के साथ अपना बैंकिंग परिचालन बंद कर दिया है.
बैंक के कर्नाटक में कुल 9 शाखाएँ उपस्थित है. इसके साथ ही बैंक में 18985 सदस्य पूर्ण रूप से जुड़े हुए है. बैंक के पास कुल जमा राशि 604 करोड़ रुपये है एवं बैंक की कुल ऋण वितरण 463 करोड़ रुपये है.
लाइसेंस रद्द होने के मुख्य कारण
आरबीआई ने बैंकिंग विनियमन अधिनियम, 1949 की धारा 22 और 56 के तहत यह सख्त कार्रवाई की है. इसके पीछे मुख्य कारण निम्नलिखित हैं:
- अपर्याप्त पूंजी: बैंक के पास पर्याप्त पूंजी और कमाई की संभावनाएं नहीं हैं, जो बैंकिंग नियमों के अनुरूप नहीं है.
- नियमों का उल्लंघन: बैंक बैंकिंग विनियमन अधिनियम की विभिन्न धाराओं का पालन करने में विफल रहा है.
- जमाकर्ताओं के हितों पर खतरा: आरबीआई का मानना है कि बैंक का संचालन जारी रखना उसके जमाकर्ताओं के हितों के लिए हानिकारक होगा.
- वित्तीय स्थिति: बैंक की वर्तमान वित्तीय स्थिति ऐसी नहीं है कि वह अपने सभी जमाकर्ताओं का भुगतान करने में सक्षम हो.
- जनहित: बैंक को बैंकिंग व्यवसाय जारी रखने की अनुमति देना जनहित में नहीं है.
जमाकर्ताओं के लिए क्या है स्थिति?
लाइसेंस रद्द होने के बाद, बैंक पर बैंकिंग गतिविधियाँ करने (जैसे जमा स्वीकार करना या भुगतान करना) पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी गई है. हालांकि, जमाकर्ताओं की सुरक्षा के लिए निम्नलिखित प्रावधान किए गए हैं:
बीमा कवर: प्रत्येक जमाकर्ता, जमा बीमा और क्रेडिट गारंटी निगम (DICGC) के नियमों के अनुसार, ₹5,00,000 (पांच लाख रुपये) तक की जमा राशि का दावा प्राप्त करने का हकदार है.
बैंक द्वारा उपलब्ध कराए गए आंकड़ों के अनुसार, लगभग 97.90% जमाकर्ता अपनी पूरी जमा राशि प्राप्त करने के पात्र हैं. इसके अतिरिक्त, 9 जून, 2026 तक, DICGC पहले ही योग्य जमाकर्ताओं को ₹88.21 करोड़ का भुगतान कर चुका है.
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