अयोध्या राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामला लगातार नए खुलासों के साथ चर्चा में बना हुआ है. जांच आगे बढ़ने के साथ इस मामले में कई अहम पहलू सामने आ रहे हैं. अब तक पुलिस इस मामले में आठ आरोपियों को गिरफ्तार कर चुकी है. गिरफ्तार आरोपियों में अविनाश शुक्ल, अनुकल्प मिश्र, लवकुश मिश्र, मनीष यादव, करुणेश पांडेय, रामशंकर मिश्र, सुभाष श्रीवास्तव और रामशंकर यादव शामिल हैं. पुलिस मामले की गहन जांच कर रही है और चोरी से जुड़े पूरे नेटवर्क की पड़ताल में जुटी है.

ट्रस्ट को थी पहले से जानकारी?

इस बीच आरोपी अविनाश शुक्ला के घर के बाहर का एक CCTV वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है. दावा किया जा रहा है कि राम मंदिर दान चोरी की बात खबरों में आने के पहले ही जांच एजेंसियां हरकत में थीं. यह फुटेज 5 जून का बताया जा रहा है. दावा है कि इस घोटाले की भनक लगते ही राम मंदिर ट्रस्ट और स्थानीय पुलिस की संयुक्त टीम ने सीक्रेट कार्रवाई शुरू की थी. 

वायरल हो रहे सीसीटीवी फुटेज में दिख रहा है कि राम मंदिर ट्रस्ट की एक विशेष टीम पुलिस बल के जवानों के साथ मंदिर के आरोपी कर्मचारी अविनाश शुक्ला के घर पहुंची थी. टीम ने घर के भीतर गहन तलाशी अभियान चलाया. इसके बाद जब पुलिस और ट्रस्ट की टीम मकान से बाहर निकली, तो एक पुलिसकर्मी के हाथ में एक काला बैग देखा गया.  

बताया जा रहा है कि इस काले बैग में चढ़ावे की चोरी की गई एक बहुत बड़ी रकम छुपाकर रखी गई थी. पुलिस ने अविनाश शुक्ला के ठिकाने से मौके पर ही बरामद कर सील कर दिया था. हालांकि, शुरुआती दिनों में इस रिकवरी को बेहद गोपनीय रखा गया था ताकि गिरोह के अन्य सदस्यों को सतर्क होने का मौका न मिले.

आर्थिक लेनदेन की भी होगी जांच

पुलिस अब केवल बरामद नकदी या दस्तावेजों तक सीमित नहीं रहना चाहती. जांच का अगला चरण आरोपियों के बैंक खातों, आर्थिक लेनदेन और हाल के वर्षों में हुई संपत्ति खरीद की जांच पर केंद्रित रहेगा. सूत्रों का कहना है कि यदि जरूरत पड़ी तो आय के स्रोत, बैंक ट्रांजैक्शन और अन्य वित्तीय रिकॉर्ड भी खंगाले जा सकते हैं. इससे यह स्पष्ट करने की कोशिश होगी कि कथित चोरी की रकम का उपयोग आखिर कहां और किस रूप में किया गया. हालांकि कई गिरफ्तारियां हो चुकी हैं और लगातार छापेमारी भी चल रही है.

सियासत तेज 

इस पूरे मामले को लेकर राजनीतिक बयानबाजी भी तेज हो गई है. इस मुद्दे पर पहली टिप्पणी अखिलेश यादव ने अपने X पोस्ट से 7 जून को की थी. तभी से लगातार वो इस मुद्दे पर सक्रिय है. उनके साथ साथ अरविंद केजरीवाल, उद्धव ठाकरे, तृणमूल कांग्रेस (TMC) की राज्यसभा सांसद सागरिका घोष ने भी भारतीय जनता पार्टी (BJP) पर तंज कसा है.

यह राजनीतिक विवाद तब और गहरा गया जब श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय और ट्रस्टी अनिल मिश्रा ने चंदा गबन मामले में नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए इस्तीफा दे दिया. शुक्रवार को अयोध्या की एक अदालत ने इस मामले में आठ आरोपियों को 29 जून तक न्यायिक हिरासत में भेज दिया था. फिलहाल फैजाबाद बार एसोसिएशन के वकीलों ने आरोपियों का पक्ष लेने से इंकार कर दिया है. वहीं बार एसोसिएशन के सचिव शैलेंद्र जायसवाल ने कहा कि मंदिर के चढ़ावे में चोरी से वकीलों की भावनाएं आहत हुई हैं और अधिकांश वकील आरोपियों की पैरवी नहीं करना चाहते.

 

 

 

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