मौसम बदलते ही तबीयत का मिजाज भी बदलने लगता है. बारिश के बाद मौसम भी करवट लेता है. दिन में गर्मी और उमस रहती है. वहीं सुबह-शाम हल्की ठंडक महसूस होने लगती है.मौसम का यह बदलाव शरीर के लिए आसान नहीं होता.इसी वजह से इस दौरान सर्दी, खांसी, बुखार और वायरल इंफेक्शन के मामले बढ़ने लगते हैं. अस्पतालों की OPD में भी मरीजों की संख्या बढ़ती दिखाई दे रही है. ज्यादातर मरीज बुखार, वायरल फीवर, सर्दी-खांसी और गले में खराश की शिकायत लेकर पहुंच रहे हैं.
कई मरीजों में शरीर दर्द और कमजोरी की समस्या भी देखने को मिल रही है. कुछ जगहों पर डेंगू, मलेरिया और टायफाइड के मामले भी सामने आ रहे हैं.
सितंबर में बढ़े बुखार के मरीज
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, सितंबर के पहले सप्ताह में रोजाना करीब 110 से 120 मरीज बुखार के इलाज के लिए अस्पताल पहुंच रहे थे.
वहीं तीसरे सप्ताह में यह संख्या 150 से ज्यादा हो गई. डॉक्टरों के मुताबिक, इनमें ज्यादातर मरीज वायरल फीवर के हैं.
मौसम बदलने पर क्यों बढ़ता है वायरल इंफेक्शन?
बारिश के बाद मौसम में अचानक बदलाव आता है. कभी गर्मी और उमस बढ़ जाती है. कभी तापमान कम हो जाता है. ऐसे में शरीर को नए मौसम के हिसाब से ढलने में थोड़ा समय लगता है.इस दौरान इम्यूनिटी पर भी असर पड़ सकता है. इससे वायरल इंफेक्शन का खतरा बढ़ सकता है. यही वजह है कि इस मौसम में सर्दी, खांसी, गले में खराश, बुखार, थकान और शरीर में दर्द जैसी परेशानियां देखने को मिलती हैं.
हर बुखार वायरल नहीं होता
बुखार होने पर इसे सिर्फ वायरल फीवर मान लेना सही नहीं है. सर्दी, खांसी और गले में खराश वायरल इंफेक्शन के लक्षण हो सकते हैं. वहीं तेज बुखार के साथ सिरदर्द, शरीर और जोड़ों में दर्द या स्किन पर रैश हो, तो डेंगू की संभावना हो सकती है. मलेरिया में बुखार के साथ ठंड लगना और कंपकंपी हो सकती है. लगातार बुखार के साथ कमजोरी और पेट से जुड़ी परेशानी हो, तो टायफाइड भी एक वजह हो सकती है. हालांकि, सिर्फ लक्षणों के आधार पर किसी बीमारी की पुष्टि नहीं की जा सकती. जरूरत पड़ने पर डॉक्टर जांच की सलाह दे सकते हैं.
बारिश के बाद डेंगू का खतरा क्यों बढ़ता है?
बारिश के बाद कई जगह पानी जमा हो जाता है. कूलर, गमले, पुराने टायर और छोटे-बड़े कंटेनर में जमा पानी मच्छरों के पनपने की जगह बन सकता है. इसी वजह से बारिश के बाद डेंगू का खतरा बढ़ सकता है. डेंगू में तेज बुखार के साथ सिरदर्द, आंखों के पीछे दर्द, शरीर और जोड़ों में दर्द हो सकता है. जी मिचलाना और स्किन पर रैश भी दिखाई दे सकता है. लेकिन इन लक्षणों से अकेले डेंगू की पुष्टि नहीं होती. डॉक्टर जरूरत के हिसाब से ब्लड टेस्ट की सलाह दे सकते हैं.
बदलते मौसम में कैसे रखें अपना ख्याल?
इस मौसम में कुछ छोटी-छोटी सावधानियां बहुत जरूरी हैं. बाहर से आने के बाद हाथ साफ करें. साफ पानी पिएं. शरीर में पानी की कमी न होने दें.
पूरी नींद लें और पौष्टिक खाना खाएं. घर में किसी को बुखार या वायरल इंफेक्शन है, तो साफ-सफाई का ध्यान रखें. मच्छरों से बचने के लिए घर और आसपास पानी जमा न होने दें.
कूलर का पानी समय-समय पर बदलें. कूलर को साफ करते रहें. गमलों और पानी वाले कंटेनर को भी चेक करते रहें. पुराने टायर या ऐसी चीजें हटा दें, जिनमें बारिश का पानी जमा हो सकता है.
बुखार होने पर क्या करें?
बुखार है तो सबसे पहले टेम्परेचर चेक करें. पानी और दूसरे फ्लूइड्स लेते रहें. आराम करें और अपने लक्षणों पर नजर रखें. अगर बुखार लगातार बना हुआ है, बहुत तेज है या बार-बार वापस आ रहा है, तो इसे नजरअंदाज न करें. बुखार के साथ सांस लेने में दिक्कत, बहुत ज्यादा कमजोरी, लगातार उल्टी या ब्लीडिंग जैसे लक्षण हों, तो तुरंत डॉक्टर से सलाह लें.
जरूरत पड़ने पर डॉक्टर CBC, डेंगू, मलेरिया या दूसरी जांचें लिख सकते हैं. कौन-सी जांच करनी है, यह मरीज के लक्षण और हालत देखकर तय किया जाता है. बारिश के बाद बदलता मौसम हर बार किसी बड़ी बीमारी का संकेत नहीं होता. लेकिन इस दौरान सावधानी रखना जरूरी है. साफ पानी पिएं. हाथ साफ रखें. पानी जमा न होने दें. मच्छरों से बचें.
अपनी नींद और खान-पान का ध्यान रखें. और अगर बुखार या कोई दूसरा लक्षण लगातार बना हुआ है, तो खुद से दवा लेने के बजाय डॉक्टर से सलाह लें.
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