प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारत के 80वें स्वतंत्रता दिवस के मौके पर लाल किले की प्राचीर से देश को संबोधित किया. इस ऐतिहासिक स्मारक से यह उनका लगातार 13वां भाषण था. उन्होंने असम में हाल ही में आई बाढ़ से प्रभावित परिवारों के प्रति संवेदना जताते हुए अपनी बात शुरू की. मोदी ने कहा कि कोई देश तभी आगे बढ़ता है जब वह बड़े सपनों, पक्के इरादे और मज़बूत क्षमता के साथ काम करता है. उन्होंने कहा कि जब 2047 में आज़ादी के 100 साल पूरे होंगे तब भारत एक 'विकसित भारत' बनने के लक्ष्य को पूरा करेगा. उन्होंने पिछले 12 सालों में देश भर के नागरिकों के योगदान की सराहना की और कहा कि भारत, जो कभी 'फ्रैजाइल फाइव' (कमज़ोर अर्थव्यवस्थाओं) का हिस्सा था, अब दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्थाओं में से एक है.
प्रधानमंत्री के भाषण का आधार 'सप्त धारा' फ्रेमवर्क
प्राचीन 'सप्त सिंधु' की अवधारणा से प्रेरित होकर, प्रधानमंत्री ने आने वाले वर्षों में भारत के विकास को दिशा देने के लिए 'सप्त धारा' नामक सात-सूत्रीय फ्रेमवर्क पेश किया. इन सात सेक्टरों में मैन्युफैक्चरिंग, कृषि और फूड प्रोसेसिंग, टेक्नोलॉजी और इनोवेशन, गति शक्ति के माध्यम से कनेक्टिविटी, रक्षा उत्पादन, ग्रीन और ब्लू इकोनॉमी और भारत की सॉफ्ट पावर (जिसमें योग, आयुर्वेद, फिल्में और डिजिटल कंटेंट जैसे क्षेत्र आते हैं) शामिल है.
न्यूक्लियर एनर्जी, सेमीकंडक्टर और एआई (AI) स्किलिंग पर खास जोर
मोदी ने खादी और ग्रामोद्योग, इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग, रेलवे कोच प्रोडक्शन और मोबाइल फोन प्रोडक्शन में भारत की तरक्की के साथ-साथ इंटरनेट के इस्तेमाल, पेटेंट और डिजिटल ट्रांजैक्शन में हुई बढ़ोतरी का भी जिक्र किया. उन्होंने एनर्जी सिक्योरिटी के बारे में बात करते हुए बताया कि भारत का लक्ष्य 2047 तक 100 GW न्यूक्लियर पावर हासिल करना और इस दशक में पांच नए न्यूक्लियर रिएक्टर शुरू करना है, उन्होंने साथ ही फास्ट ब्रीडर न्यूक्लियर टेक्नोलॉजी में तरक्की होने का भी ज़िक्र किया. उन्होंने भारत के तीन चालू सेमीकंडक्टर प्लांट का भी ज़िक्र किया और आने वाले सालों में कई और प्लांट लगाने की योजना के बारे में भी बताया. अन्य घोषणाओं में एक करोड़ युवाओं को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की ट्रेनिंग देना और विधानसभाओं व संसद में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण का समर्थन करना शामिल रहा.
आंतरिक सुरक्षा के मुद्दे पर मोदी ने कहा कि माओवादी सोच रखने वाले लोग ने बरसों से सत्ता के गलियारों में अपनी जगह बनाई हुई थी और सरकारी कमेटियों में सलाहकार जैसे पदों पर रहकर नीतियां तय करती थी. उन्होंने कहा कि हथियारबंद नक्सलियों को जंगलों से भगाकर देश को उस खतरे से तो बचा लिया गया है लेकिन उन्होंने आगाह किया कि "दिमागी नक्सली" यानी वो लोग जो नक्सलियों जैसी ही सोच रखते हैं, वो अभी भी मौजूद हैं. ये लोग अलग-अलग तरीकों से हिंसा और अशांति फैलाने का मौका ढूढ़ते है. उन्होंने कहा कि ऐसे लोगों को पहचानना और उन्हें बाकी समाज से अलग करना ज़रूरी है. साथ ही, देश के युवाओं को विकसित भारत बनाने के मुख्य प्रयासों से जोड़ना चाहिए, ताकि वे सही दिशा में आगे बढ़ सके.
-ईशिता रंजन
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