बुधवार को संसद में संसदीय समिति ने NEET-UG परीक्षा व्यवस्था की समीक्षा की और NTA के महानिदेशक अभिषेक सिंह तथा NMC के अध्यक्ष अभिजीत चंद्रकांत शेठ सहित स्वास्थ्य एवं शिक्षा मंत्रालय के कई अधिकारियों से मुलाकात की. अधिकारियों ने 21 जून को होने वाली 'Re-NEET' परीक्षा की तैयारियों की जानकारी दी. अधिकारियों ने समिति को आश्वस्त किया कि 21 जून को होने वाली परीक्षा का आयोजन पूरी पारदर्शिता के साथ किया जाएगा.
समिति ने परीक्षाओं के कारण बच्चों में बढ़ते तनाव और हाल ही में पेपर लीक की वजह से आत्महत्या करने वाले छात्रों के प्रति गहरी चिंता व्यक्त की. समिति ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि परीक्षाओं का डर बच्चों की जान पर भारी नहीं पड़ना चाहिए.
साथ ही, समिति ने NTA और NMC को चीन के Gaokao और अमेरिका के परीक्षा मॉडल का अध्ययन करने का निर्देश दिया. समिति ने कहा कि जिस तरह से वे इतने बड़े स्तर की परीक्षाएं आयोजित कर रहे हैं, हमें भी उसी प्रकार की व्यवस्था अपनानी पड़ेगी. संसदीय समिति के सदस्यों ने साल में 2-3 बार NEET-UG आयोजित करवाने का सुझाव भी दिया, ताकि छात्रों को परीक्षा पास करने के कई मौके मिल सकें और वे उन कारणों से परेशान न हों, जो उनके नियंत्रण से बाहर हैं.
हालांकि, 2023 में नेशनल मेडिकल कमीशन (NMC) ने कहा था कि साल में दो बार NEET-UG आयोजित करना व्यावहारिक नहीं होगा, क्योंकि MBBS की सभी सीटें एक ही काउंसलिंग प्रक्रिया के जरिए भरी जाती हैं.
वहीं, समिति के समक्ष पेपर लीक मामले की जांच कर रही सीबीआई के डायरेक्टर प्रवीण सूद ने पूरी घटना की जानकारी देते हुए बताया कि 3 मई को जब पेपर लीक की खबर सामने आई, तो कई गिरोहों ने परीक्षा को प्रभावित किया था. इसके चलते 12 मई को परीक्षा रद्द करनी पड़ी थी.
इसके कुछ दिनों बाद ही कई अलग-अलग शहरों से छात्रों की आत्महत्या की खबरें आने लगी थीं, जिसने पूरे देश में खलबली मचा दी थी. गौरतलब है कि इस परीक्षा में 565 शहरों के 5400 से ज्यादा केंद्रों पर करीब 22.8 लाख छात्रों ने हिस्सा लिया था.
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