भारत में शेयर बाजार का दायरा तेज़ी से बढ़ रहा है. अब छोटे शहरों और कस्बों के लोग भी मोबाइल ऐप के जरिए निवेश कर रहे हैं. इसके बावजूद देश में होने वाले कुल शेयर कारोबार का सबसे बड़ा हिस्सा आज भी मुंबई से होता है.

भारतीय शेयर बाजार की वार्षिक रिपोर्ट 2025-26 के अनुसार, हर 10 में लगभग 6 शेयर ट्रेड मुंबई/ठाणे से किए जाते हैं. वर्ष 2025-26 में मुंबई/ठाणे की हिस्सेदारी 60.1 प्रतिशत रही, जबकि अहमदाबाद 16.5 प्रतिशत के साथ दूसरे स्थान पर रहा.

क्या मुंबई के लोग ही सबसे ज्यादा निवेश करते हैं?

यह आंकड़ा ब्रोकर टर्मिनल के आधार पर तैयार किया गया है, यानी यदि कोई निवेशक कानपुर, पटना, जयपुर, लखनऊ या भोपाल में बैठकर किसी ऐसे ब्रोकरेज प्लेटफॉर्म से ट्रेड करता है, जिसका ट्रेडिंग टर्मिनल मुंबई में है, तो वह कारोबार भी मुंबई के खाते में दर्ज हो सकता है. इसलिए यह आंकड़ा निवेशकों के रहने की जगह नहीं, बल्कि ट्रेडिंग इंफ्रास्ट्रक्चर के स्थान को दर्शाता है.

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आखिर मुंबई इतना आगे क्यों है?

हालांकि रिपोर्ट इसके कारण नहीं बताती, लेकिन भारतीय वित्तीय व्यवस्था को देखें तो इसके पीछे कई बड़े कारण हैं.

1. देश की वित्तीय राजधानी

मुंबई को भारत की वित्तीय राजधानी कहा जाता है। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI), सेबी (SEBI), बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) और नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) जैसे प्रमुख वित्तीय संस्थानों के मुख्यालय यहीं हैं। इससे बाजार से जुड़ी अधिकांश गतिविधियां मुंबई में केंद्रित रहती हैं.

2. बड़े ब्रोकिंग हाउस यहीं से काम करते हैं

देश की कई बड़ी ब्रोकिंग और निवेश कंपनियों के प्रमुख कार्यालय मुंबई में हैं. इनके जरिए हर दिन करोड़ों रुपये के सौदे होते हैं। इसलिए कारोबार का बड़ा हिस्सा मुंबई के नाम दर्ज होता है.

3. विदेशी और संस्थागत निवेशकों का केंद्र

विदेशी संस्थागत निवेशक (FPI/FII), घरेलू संस्थागत निवेशक (DII), म्यूचुअल फंड और बड़े पोर्टफोलियो मैनेजर मुख्य रूप से मुंबई से अपना कारोबार संचालित करते हैं. इनके बड़े सौदों का असर कुल ट्रेडिंग में साफ दिखाई देता है.

4. बड़ी कंपनियों का मुख्यालय

रिलायंस, टाटा समूह, आदित्य बिड़ला समूह, एलएंडटी और कई अन्य बड़ी कंपनियों के मुख्यालय मुंबई में हैं. इससे वित्तीय सेवाओं का पूरा इकोसिस्टम वहीं विकसित हुआ है.

अहमदाबाद क्यों तेज़ी से आगे बढ़ रहा है?

रिपोर्ट के अनुसार अहमदाबाद की हिस्सेदारी बढ़कर 16.5 प्रतिशत हो गई है. गुजरात में निवेश और कारोबार की मजबूत संस्कृति तथा उद्योगों की बड़ी मौजूदगी ने इसे देश का दूसरा सबसे बड़ा ट्रेडिंग केंद्र बना दिया है.

बेंगलुरु की बढ़ती ताकत

बेंगलुरु की हिस्सेदारी बढ़कर 5.2 प्रतिशत पहुंच गई है. आईटी उद्योग, स्टार्टअप कंपनियां और युवा निवेशकों की बढ़ती संख्या इसके प्रमुख कारण माने जाते हैं.

दिल्ली, कोलकाता और हैदराबाद क्यों पीछे?

दिल्ली, कोलकाता और हैदराबाद में भी लाखों निवेशक हैं, लेकिन इन शहरों में बड़े संस्थागत ट्रेडिंग डेस्क और वित्तीय कंपनियों की संख्या मुंबई की तुलना में कम है. इसलिए इनकी हिस्सेदारी अपेक्षाकृत कम दिखाई देती है, हालांकि इसका मतलब यह नहीं है कि इन शहरों के लोग कम निवेश करते हैं.

आम आदमी के लिए इसका क्या मतलब है?

यदि आप किसी छोटे शहर या गांव में रहते हैं, तो चिंता की कोई बात नहीं है. आज डीमैट अकाउंट, यूपीआई और मोबाइल ट्रेडिंग ऐप्स की मदद से देश के किसी भी हिस्से से शेयर बाजार में निवेश किया जा सकता है. 

 

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