22 लाख छात्रों के भविष्य और दुनिया की सबसे बड़ी आबादी वाले देश की स्वास्थ्य व्यवस्था के साथ लापरवाही बरतने के बाद, अब सरकार ने 21 जून को होने वाली अगली NEET परीक्षा की बागडोर सेना के जिम्मे सौंप दिया है. दरअसल, खबरों के मुताबिक, मोदी सरकार ने फैसला लिया है कि, नीट के पेपर को परीक्षा केंद्रों तक भारतीय वायुसेना (IAF) के विमानों द्वारा पहुंचाया जाएगा. प्रधानमंत्री आवास से तो यहां तक खबरें आ रहीं हैं कि पेपर से जुड़े घटनाक्रमों पर पीएम मोदी खुद नजर रख रहे हैं.

3 मई को हुए पेपर लीक विवाद ने कई जानें ले ली हैं. खबरों के मुताबिक कई छात्रों ने सुसाइड कर लिया है. इस फजीहत के बाद सरकार पूरी तरह सतर्क हो गई है. केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) भी पेपर लीक मामले में तेजी बरत रही है, केस दर्ज कर, टीमों का गठन कर दिया गया है. देश भर में छापेमारी कर अब तक 13 आरोपियों को गिरफ्तार भी किया जा चुका है.

वायुसेना पर फैसला

इस बड़े कदम को लेकर दिल्ली में एक उच्च स्तरीय बैठक आयोजित की गई थी, जिसमें रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान और संचार मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया शामिल थे. दिल्ली में रक्षा मंत्री के आवास पर आयोजित हुई इसी बैठक में वायुसेना के इस्तेमाल पर विचार किया गया है. मंत्रियों और वरिष्ठ अधिकारियों की इस बात पर चर्चा हुई है कि क्या 21 जून की परीक्षा के प्रश्नपत्रों के ट्रांसपोर्टेशन के लिए वायुसेना के विमानों को काम पर लगाया जा सकता है.

हालांकि इसको लेकर कोई तय फैसला नहीं हो सका है, क्योंकि पीएम मोदी की हामी अभी बाकी है. लेकिन अगर ऐसा होता है तो यह पहला मौका होगा जब किसी परीक्षा की जिम्मेदारी भारतीय सेना के हाथों में सौंपी जाएगी.

PMO की नजर

NEET परीक्षा के प्रश्नपत्र लीक होने से पनपे विवाद के बाद, केंद्र सरकार अब काफी सक्रिय हो गई है. सरकारी सूत्रों के हवाले से तो यह भी खबर आ रही हैं कि, प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) के अधिकारी अब परीक्षा प्रक्रिया की पूरी श्रृंखला पर चौकस नजर रखेंगे. पेपर के हर प्रत्येक चरण, मसलन, तैयार करने, छापने, छपाई, और परीक्षा केंद्रों तक भेजने तक PMO की निगरानी रहेगी. और हर कदम की खबर पीएम मोदी की मेज तक पहुंचेंगी.

तारीखें

3 मई को एनटीए (NTA) ने देश 23 लाख छात्रों के लिए 551 शहरों और 14 विदेशी केंद्रों पर नीट-यूजी परीक्षा आयोजित की थी. जुम्मे-जुम्मे चार दिन ही हुए थे कि 7 मई की शाम को एनटीए की विफलता सार्वजनिक हो गई. इसके बाद 8 मई की सुबह एनटीए आनन-फानन में, केंद्रीय एजेंसियों के पास पहुंचा. पेपर लीक के आरोपों के बीच आखिरकार 12 मई को एनटीए ने नीट-यूजी परीक्षा रद्द कर दी और 21 जून को पुनर्परीक्षा (री-एग्जामिनेशन) आयोजित करने की घोषणा कर दी.

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