आप सेंटरों पर एयरफोर्स से प्रश्नपत्र पहुंचाएंगे, वे बायोमेट्रिक में सेंध लगा देंगे. आप दो मिनट लेट होने पर अभ्यर्थियों को रोक देंगे, वे अपने ही आदमी सेंटर पर सेट कर देंगे. तमाम सुरक्षा इंतज़ामों का दावा करते NTA की भद्द एक बार फिर पिटी है. मामला रविवार को हुई नीट यूजी (NEET UG 2026) का है. बिहार के लखीसराय में परीक्षा में सेंधमारी के रैकेट का भंडाफोड़ हुआ है. बायोमेट्रिक सेंधमारी के आरोप में 24 लोगों को गिरफ्तार किया गया है. इससे पहले 3 मई को देशभर में नीट (NEET UG 2026) का आयोजन हुआ था, जिसमें बड़े पैमाने पर धांधली सामने आने के बाद NTA ने 12 मई को परीक्षा रद्द कर दी थी.

वहीं, लखीसराय के चार केंद्रों (केंद्रीय विद्यालय, उच्च विद्यालय हसनपुर, केआरके उच्च विद्यालय एवं डायट लखीसराय) पर परीक्षा का आयोजन किया गया था. शुरुआती जांच के बाद केंद्रीय विद्यालय से सात, उच्च विद्यालय हसनपुर से एक और केआरके उच्च विद्यालय से एक फर्जी परीक्षार्थी को दबोचा गया। दस्तावेजों और पहचान सत्यापन के दौरान फोटो व फिंगरप्रिंट का मिलान न होने पर अधिकारियों को संदेह हुआ, जिसके बाद यह बड़ी कार्रवाई हुई.

मेडिकल स्टूडेंट निकला सरगना

पुलिस जांच में सामने आया है कि नालंदा जिले के पावापुरी मेडिकल कॉलेज का छात्र रविशंकर गिरोह का मुख्य संचालक था. उसने विभिन्न मेडिकल कॉलेजों में पढ़ाई कर रहे छात्रों को सॉल्वर के रूप में तैयार कर परीक्षा में बैठाने की योजना बनाई थी. पटना मेडिकल कॉलेज के चतुर्थ वर्ष के छात्र एवं हाजीपुर निवासी मयंक कश्यप ने बायोमेट्रिक स्टाफ के रूप में काम किया. आरोप है कि इसी माध्यम से गिरोह ने बायोमेट्रिक सत्यापन प्रक्रिया को प्रभावित किया और सॉल्वरों को केंद्र के भीतर प्रवेश दिलाने में सफलता हासिल की. इसके बाद फर्जी परीक्षार्थी वास्तविक अभ्यर्थियों के स्थान पर परीक्षा में शामिल हुए. गिरोह ने ऐसे अभ्यर्थियों को तलाशा, जो मेडिकल कॉलेज में प्रवेश के लिए किसी भी कीमत पर सफल होना चाहते थे.

पुलिस ने अब तक कुल नौ सॉल्वर गिरफ्तार किए हैं, जोकि मेडिकल छात्र बताए जा रहे हैं. इनके अलावा बायोमेट्रिक एजेंसी से जुड़े कर्मियों और गिरोह के अन्य सदस्यों समेत कुल 24 लोगों को गिरफ्तार किया गया है. पुलिस कुछ अन्य संदिग्धों को हिरासत में लेकर पूछताछ कर रही है. अधिकारियों का मानना है कि पूछताछ आगे बढ़ने के साथ गिरोह के नेटवर्क और इसके आर्थिक लेन-देन से जुड़े नए नाम सामने आ सकते हैं.

12 लाख में किया गया सौदा

लखीसराय के एसडीपीओ शिवम कुमार के अनुसार शुरुआती जांच में प्रत्येक अभ्यर्थी से 10 से 12 लाख रुपये में सौदा तय होने की जानकारी मिली है. इसमें एक से दो लाख रुपये पहले ही ले लिए थे, जबकि शेष राशि परीक्षा में सफलता और नामांकन के बाद भुगतान की जानी थी. पुलिस अब बैंक खातों, मोबाइल कॉल डिटेल और डिजिटल लेन-देन की भी जांच कर रही है. इस बीच केंद्रीय विद्यालय लखीसराय के प्रभारी प्राचार्य सह सिटी कोऑर्डिनेटर दिनेश कुमार भगत के आवेदन पर थाना में एफआईआर दर्ज करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है. एसडीपीओ का कहना है कि जांच का दायरा लगातार बढ़ाया जा रहा है और पूरे रैकेट में शामिल प्रत्येक व्यक्ति की भूमिका की पड़ताल की जा रही है.

 

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