नीट (यूजी) 2026 की री-एग्ज़ाम रविवार, 21 जून को देशभर और विदेशों में कड़े सुरक्षा इंतज़ामों के बीच आयोजित की गई. यह परीक्षा शाम करीब सवा पाँच बजे तक चली. नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (एनटीए) के अनुसार, इस री-एग्ज़ाम में 20 लाख से अधिक छात्रों ने हिस्सा लिया। परीक्षा का आयोजन भारत के 5,440 केंद्रों और विदेशों के 14 केंद्रों पर किया गया. इसे 13 भाषाओं में कराया गया ताकि सभी उम्मीदवारों को समान अवसर मिल सके.
एनटीए ने बताया कि परीक्षा के दौरान सुरक्षा व्यवस्था काफी सख्त रखी गई थी. केंद्रों पर पुलिसकर्मी, ऑब्ज़र्वर और परीक्षा स्टाफ सहित लगभग सात लाख कर्मचारियों को तैनात किया गया. सुरक्षा के लिए आधार-आधारित बायोमेट्रिक वेरिफिकेशन, फेस ऑथेंटिकेशन, सीसीटीवी कैमरों की निगरानी और जैमर जैसी तकनीकों का इस्तेमाल किया गया. इसका उद्देश्य परीक्षा में किसी भी प्रकार की नकल या अनियमितता को रोकना था.
व्यवस्थाएं और सुविधाएं
राज्य सरकारों ने भी परीक्षा के संचालन में सहयोग दिया. कई जगहों पर छात्रों और उनके अभिभावकों के लिए परीक्षा केंद्रों के बाहर छांव, पीने के पानी और भोजन की व्यवस्था की गई थी. कुछ राज्यों में मुफ्त परिवहन और एंबुलेंस जैसी मेडिकल सुविधाएं भी उपलब्ध कराई गईं, ताकि छात्रों को किसी भी तरह की असुविधा न हो.
अबू धाबी सेंटर विवाद
हालांकि परीक्षा से पहले एक बड़ा विवाद सामने आया। एक उम्मीदवार ने दावा किया कि उसका परीक्षा केंद्र नागपुर की जगह अबू धाबी कर दिया गया. यह मामला सोशल मीडिया पर तेजी से चर्चा में आया. एनटीए ने इस पर सफाई देते हुए कहा कि परीक्षा केंद्र में बदलाव कैंडिडेट के लॉग-इन और करेक्शन विंडो के दौरान किए गए थे. एजेंसी ने यह भी कहा कि रिकॉर्ड में एक ही यूज़र द्वारा कई बार लॉग-इन करने और बदलाव करने के संकेत मिले हैं.
एनटीए के अनुसार, उम्मीदवार ने पहले अबू धाबी केंद्र चुना था, लेकिन बाद में परीक्षा से करीब 48 घंटे पहले नागपुर में बदलाव का अनौपचारिक अनुरोध किया गया था. एजेंसी ने बताया कि उन्होंने नियमों के अनुसार प्रक्रिया पूरी करने की कोशिश की और उम्मीदवार के पिता से भी संपर्क किया गया था ताकि औपचारिकताएं पूरी की जा सकें. एनटीए ने यह भी दावा किया कि कैंडिडेट के लॉग-इन का कई बार उपयोग हुआ और केंद्र चयन से जुड़ी गतिविधियाँ दर्ज की गईं.
दूसरी ओर, उम्मीदवार के परिवार ने एनटीए के दावों पर सवाल उठाए. परिवार का कहना था कि छात्र ने नागपुर को ही अपना परीक्षा केंद्र चुना था और अचानक अबू धाबी का केंद्र मिलने से वे हैरान रह गए. परिवार ने यह भी कहा कि छात्र के पास पासपोर्ट नहीं है और विदेश जाकर परीक्षा देना उनके लिए संभव नहीं था. इस कारण पूरा परिवार मानसिक तनाव में आ गया.
राजनीतिक प्रतिक्रिया और विवाद
इस घटना पर राजनीतिक प्रतिक्रिया भी देखने को मिली. कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने इस मामले की आलोचना करते हुए कहा कि ऐसी घटनाएँ छात्रों पर अनावश्यक दबाव डालती हैं और परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता की कमी को दिखाती हैं. अन्य विपक्षी नेताओं ने भी एनटीए की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए और सुधार की मांग की.
यह पूरा मामला पहले से चल रहे नीट पेपर लीक विवाद के बीच सामने आया है. पेपर लीक के कारण इस परीक्षा को पहले रद्द किया गया था और बाद में इसे दोबारा आयोजित किया गया। एनटीए ने रिकॉर्ड 37 दिनों के भीतर री-एग्ज़ाम कराने का दावा किया और इसे बड़ी उपलब्धि बताया.
परीक्षा से पहले सुरक्षा व्यवस्था और भी कड़ी कर दी गई थी। कई रिपोर्टों के अनुसार, प्रश्नपत्रों को सुरक्षित तरीके से कुछ केंद्रों तक पहुँचाने के लिए विशेष इंतज़ाम किए गए थे. कई परीक्षा केंद्रों पर मॉक ड्रिल भी की गई ताकि किसी भी तरह की सुरक्षा चूक न हो। सभी केंद्रों पर सीसीटीवी कैमरे, पुलिस बल और केंद्रीय सुरक्षा बलों की तैनाती की गई.
कुल मिलाकर, नीट (यूजी) 2026 की री-एग्ज़ाम बड़े स्तर पर सफलतापूर्वक आयोजित की गई, लेकिन सेंटर आवंटन विवाद और पेपर लीक के मुद्दों ने इसे फिर से सुर्खियों में ला दिया. इस परीक्षा ने एक बार फिर देश की परीक्षा प्रणाली की पारदर्शिता और प्रबंधन पर सवाल खड़े कर दिए हैं.
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