NCERT ने कक्षा 11वीं और 12वीं की पॉलिटिकल साइंस की नई किताबें तैयार करने के लिए 20 सदस्यों वाली टीम का दोबारा गठन किया है. इस टीम का काम NEP 2020 और नेशनल करिकुलम फ्रेमवर्क फॉर स्कूल एजुकेशन (NCF-SE) 2023 के अनुसार नया सिलेबस तय करना और उसी आधार पर नई पाठ्यपुस्तकें तैयार करना होगा.

इस टीम की जिम्मेदारी निट्टे डीम्ड यूनिवर्सिटी, बेंगलुरु के वाइस प्रेसिडेंट और अकादमिक व राजनीतिक विश्लेषक प्रो. संदीप शास्त्री को दी गई है. डॉ. वंथांगपुई खोबुंग और डॉ. सुभाष सिंह को सदस्य समन्वयक बनाया गया है. दोनों NCERT के साथ टीम का संवाद, बैठकों और प्रकाशन से जुड़े जरूरी नियमों की जानकारी सदस्यों तक पहुंचाने का काम करेंगे.

टीम में RSS और ABVP से जुड़े सदस्यों का दावा

नई टीम को लेकर यह दावा भी सामने आया है कि इसके कम से कम चार सदस्य RSS, उसके छात्र संगठन ABVP या उससे जुड़े संगठनों से जुड़े रहे हैं.

इनमें शिक्षा मंत्रालय की नेशनल सिलेबस एंड टीचिंग-लर्निंग मैटेरियल कमेटी के वरिष्ठ सलाहकार यदुनाथ देशपांडे का नाम शामिल है. ABVP के रिकॉर्ड के मुताबिक, वह महाराष्ट्र में संगठन के संयुक्त राज्य संगठन सचिव और मुंबई-कोंकण क्षेत्र के संगठन सचिव रह चुके हैं.

टीम में पुणे की ज्ञान प्रबोधिनी के टीचर एजुकेशन सेंटर एंड रिसर्च प्रोग्राम के प्रमुख डॉ. प्रशांत दिवेकर भी शामिल हैं. ज्ञान प्रबोधिनी की स्थापना 1962 में RSS प्रचारक विनायक विश्वनाथ ने की थी.

इसके अलावा JNU की प्रोफेसर वंदना मिश्रा भी टीम का हिस्सा हैं. वह ABVP की पूर्व राष्ट्रीय सचिव रह चुकी हैं. JNU के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. रवि रमेश चंद्र शुक्ला का नाम भी RSS से जुड़े रहने के संदर्भ में सामने आया है.

पहले तैयार होगी कक्षा 11वीं की किताब

NCERT ने किताबें तैयार करने के लिए समय-सीमा भी तय की है. कक्षा 11वीं की पॉलिटिकल साइंस की नई किताब को 30 नवंबर 2026 तक तैयार करने का लक्ष्य है. इसके बाद कक्षा 12वीं की किताब पर काम पूरा करने की समय-सीमा 30 जुलाई 2027 रखी गई है.

नई किताबों को NEP 2020 और NCF-SE 2023 में बताए गए बदलावों के आधार पर तैयार किया जाएगा. टीम में यूनिवर्सिटी, लॉ इंस्टीट्यूट, ओपन लर्निंग और शिक्षा के दूसरे क्षेत्रों से जुड़े विशेषज्ञ और शिक्षक शामिल हैं.

भारतीय ज्ञान प्रणाली पर रहेगा खास फोकस

नई किताबों में इंडियन नॉलेज सिस्टम यानी भारतीय ज्ञान प्रणाली को प्रमुख विषयों में शामिल किया जाएगा. इसके साथ भारतीय संस्कृति और सांस्कृतिक जुड़ाव पर भी ध्यान दिया जाएगा.

किताबों में समानता और समावेशन, उम्र के अनुसार सीखने की प्रक्रिया, मूल्य शिक्षा, पर्यावरण शिक्षा और सूचना एवं संचार तकनीक जैसे विषयों को भी जगह दी जाएगी.

टीम को NCERT के इंडियन नॉलेज सिस्टम, सोशल साइंस, भाषाओं, पर्यावरण शिक्षा और नई शिक्षण पद्धतियों से जुड़े समूहों के साथ चर्चा करनी होगी. हर चैप्टर की समीक्षा में यह देखा जाएगा कि इन विषयों को उसमें किस तरह शामिल किया गया है.

कई स्तरों पर होगी किताबों की समीक्षा

नई किताबें सीधे प्रकाशित नहीं की जाएंगी. पहले 20 सदस्य मिलकर किताबों के चैप्टर तैयार करने, उनकी समीक्षा, भाषा को बेहतर बनाने और अलग-अलग विषयों के बीच संबंध स्थापित करने में योगदान देंगे.

कंटेंट तैयार करने से पहले सदस्यों को संबंधित विषय के साहित्य और उपलब्ध सामग्री की समीक्षा करनी होगी. इसके बाद तैयार किए गए चैप्टर पूरी टीम के साथ साझा किए जाएंगे.

फिर टेक्स्टबुक कोर ग्रुप समय-समय पर इन चैप्टर की जांच करेगा और जरूरी सुझाव देगा. NCERT की संबंधित समिति भी किताबों की समीक्षा करेगी. सभी जरूरी प्रक्रियाएं पूरी होने और अंतिम मंजूरी मिलने के बाद ही किताबें प्रकाशित कर छात्रों के लिए उपलब्ध कराई जाएंगी.

जरूरत पड़ने पर NCERT किसी खास चैप्टर के लिए बाहरी विशेषज्ञ, शिक्षक, इलस्ट्रेटर या डिजाइनर की मदद भी ले सकता है.

 


 

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