मच्छरों की भनभनाहट से शायद ही कोई परेशान न होता हो. खासकर रात के समय जब आप सोने की कोशिश कर रहे हों और मच्छर बार-बार कान के पास आकर आवाज करने लगें. ऐसे में ज्यादातर लोग मच्छरों को भगाने के लिए कॉइल जला देते हैं.
कई घरों में तो रात को सोने से पहले कॉइल जलाना रोज की आदत बन गई है. लोगों को लगता है कि इससे मच्छर दूर रहेंगे और चैन की नींद आएगी. लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि मच्छरों को भगाने के लिए जलाई जाने वाली यही कॉइल आपकी सेहत को नुकसान पहुंचा सकती है?
दरअसल, कॉइल जलने पर निकलने वाला धुआं सिर्फ मच्छरों के लिए ही नहीं, बल्कि इंसानों के लिए भी नुकसानदायक हो सकता है. खासकर अगर आप इसे बंद कमरे में जलाते हैं, तो इसका धुआं कमरे में फैलता रहता है और सांस के जरिए शरीर में पहुंच सकता है.
कॉइल के धुएं में क्या होता है?
मच्छर भगाने वाली कॉइल में कुछ खास तरह के केमिकल मिलाए जाते हैं, जो मच्छरों को भगाने और मारने में मदद करते हैं. लेकिन जब कॉइल जलती है, तो इन केमिकल्स के साथ कई दूसरे नुकसानदायक पदार्थ भी धुएं में मिल जाते हैं.
नेशनल लाइब्रेरी ऑफ मेडिसिन (National Library of Medicine) में प्रकाशित एक रिसर्च के मुताबिक, मच्छर भगाने वाली एक कॉइल से निकलने वाले PM2.5 कणों की मात्रा 75 से 137 सिगरेट जलाने के बराबर हो सकती है. वहीं, इससे निकलने वाले फॉर्मल्डिहाइड की मात्रा 51 सिगरेट जलाने से निकलने वाली मात्रा के बराबर या उससे ज्यादा हो सकती है.
यह आंकड़ा बताता है कि कॉइल से निकलने वाले धुएं को मामूली समझकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए.
खांसी से लेकर सांस की परेशानी तक हो सकती है
कॉइल का धुआं सांस के साथ शरीर में पहुंचता है. इससे नाक और गले में जलन, खांसी, छींक और आंखों में पानी आने जैसी परेशानियां हो सकती हैं.
जिन लोगों को पहले से अस्थमा या एलर्जी की समस्या है, उन्हें इससे ज्यादा परेशानी हो सकती है. कई बार इसका धुआं सांस की तकलीफ को बढ़ा सकता है. बच्चों और बुजुर्गों को भी इसके धुएं से दूर रखना जरूरी है.
इसके अलावा, कॉइल जलने से कार्बन मोनोऑक्साइड जैसी गैस भी निकल सकती है. यह शरीर में ऑक्सीजन पहुंचने की प्रक्रिया को प्रभावित करती है. इसके संपर्क में आने से सिरदर्द, थकान और जी मिचलाने जैसी दिक्कतें हो सकती हैं.
बंद कमरे में कॉइल जलाना क्यों है खतरनाक?
अक्सर लोग मच्छरों से बचने के लिए कमरे के दरवाजे और खिड़कियां बंद कर देते हैं और फिर कॉइल जला लेते हैं. लेकिन ऐसा करना नुकसानदायक हो सकता है.
बंद कमरे में कॉइल का धुआं बाहर नहीं निकल पाता और धीरे-धीरे कमरे की हवा में फैलता रहता है. ऐसे में सोते समय भी आप लगातार इस धुएं के संपर्क में रहते हैं.
इसलिए बंद कमरे में रातभर कॉइल जलाकर सोने से बचना चाहिए.
मच्छरों से बचने के लिए क्या करें?
इसका मतलब यह नहीं है कि मच्छरों से बचने के लिए कोई तरीका ही न अपनाया जाए. बल्कि ऐसे तरीके चुनना जरूरी है, जिनसे मच्छरों से भी बचाव हो और सेहत को नुकसान भी न पहुंचे.
इसके लिए सोते समय मच्छरदानी का इस्तेमाल करें. घर के दरवाजों और खिड़कियों पर जाली लगवाएं, ताकि मच्छर अंदर न आ सकें. घर के आसपास पानी जमा न होने दें, क्योंकि मच्छर वहीं पनपते हैं.
इसके अलावा मच्छर भगाने वाले लोशन या इलेक्ट्रिक रिपेलेंट का इस्तेमाल भी किया जा सकता है. इन्हें इस्तेमाल करते समय पैकेट पर दिए गए निर्देश जरूर पढ़ें.
मच्छरों से बचना जितना जरूरी है, उतना ही जरूरी यह भी है कि हम अपने बचाव के लिए जो चीजें इस्तेमाल कर रहे हैं, उनके बारे में भी जानें. क्योंकि कई बार छोटी-सी आदत भी हमारी सेहत पर असर डाल सकती है.
"मच्छरों की भनभनाहट से शायद ही कोई परेशान न होता हो. खासकर रात के समय जब आप सोने की कोशिश कर रहे हों और मच्छर बार-बार कान के पास आकर आवाज करन…"













