उत्तर प्रदेश के ऊर्जा मंत्री अरविंद कुमार शर्मा ने पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड  (UPPCL) के चेयरमैन और IAS अधिकारी डॉ. आशीष कुमार गोयल को एक बेहद सख्त पत्र लिखा है. 

इस पत्र में ऊर्जा मंत्री ने विभाग के कामकाज के तरीकों पर गहरी नाराजगी जताते हुए कई गंभीर आरोप लगाए हैं. ऊर्जा मंत्री का साफ कहना है कि विभाग में सरकार की मंशा के विपरीत काम हो रहा है.

अपने पत्र में ऊर्जा मंत्री ने मुख्य रूप से चार गंभीर मुद्दे उठाए हैं. पहला बड़ा आरोप यह  कि विभाग ने बिना उन्हें कोई जानकारी दिए या बिना उनसे विचार-विमर्श किए ही उपभोक्ताओं के बिजली बिलों में 10 प्रतिशत की बढ़ोतरी कर दी है. ऊर्जा मंत्री ने इस मनमाने फैसले पर अपनी कड़ी आपत्ति दर्ज कराई है. 

जाति-धर्म देख नियुक्ति का आरोप

ऊर्जा मंत्री ने भ्रष्टाचार का आरोप लगाते हुए कहा कि UPPCL से अनुभवी और कुशल कर्मचारियों को बेवजह निकाला जा रहा है और उनकी जगह पर नई भर्तियां जाति, धर्म और पैसों के लेन-देन के आधार पर की जा रही हैं. मंत्री ने बताया कि उनके बार-बार मना करने के बावजूद यह छंटनी नहीं रोकी गई.

उन्होंने सहारनपुर का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां के मंडल उपाध्यक्ष ने शिकायत की थी कि बेहट डिवीजन में 15 साल से काम कर रहे एक लाइनमैन को हटाकर किसी और की भर्ती कर दी गई है. ऊर्जा  मंत्री ने स्पष्ट किया कि बेवजह अभियान चलाकर कुशल कर्मचारियों को निकालना तकनीकी और प्रशासनिक रूप से एक बड़ी समस्या बन चुका है.

गर्मियों के इस  समय का जिक्र करते हुए मंत्री ने कहा कि जहां ज्यादातर बिजली कर्मचारियों ने पूरी निष्ठा से काम किया है, वहीं कुछ कर्मचारियों ने जानबूझकर लापरवाही बरती है, जिससे सरकार की बदनामी हुई है. उन्होंने UPPCL चेयरमैन को सख्त निर्देश दिया है कि ऐसे लापरवाह कर्मचारियों के खिलाफ तुरंत अनुशासनात्मक कार्रवाई कर उनका तबादला किया जाए और इसकी पूरी  रिपोर्ट उन्हें सौंपी जाए.

चेयरमैन पर भी सवाल

साथ ही, ऊर्जा मंत्री ने खुद चेयरमैन के रवैये को लेकर भी गंभीर सवाल खड़े किए हैं. उन्होंने लिखा कि मई के अंत  में आए आंधी-तूफान के कारण बिजली व्यवस्था को भारी नुकसान पहुंचा था. मरम्मत के काम को युद्ध स्तर पर कराने के लिए 30 मई को एक अहम समीक्षा बैठक बुलाई गई थी.

लेकिन जब चेयरमैन डॉ. आशीष कुमार गोयल से संपर्क किया गया, तो पता चला कि इतने गंभीर हालात में भी वह हेडक्वार्टर से बाहर हैं और 31 तारीख तक बाहर ही रहेंगे. मंत्री ने एक उच्च अधिकारी के इस व्यवहार को बेहद गैर-जिम्मेदाराना और जनहित के खिलाफ बताया है. 

उन्होंने कड़े निर्देश दिए हैं कि भविष्य में हेडक्वार्टर छोड़ने से पहले उन्हें इसकी सूचना अनिवार्य रूप से दी जाए.

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