26 राज्यसभा सीटों पर 18 जून को राज्यसभा चुनाव होने हैं. राज्यसभा के लिए चुनाव 12 राज्यों में होने हैं, लेकिन मीनाक्षी नटराजन की खारिज उम्मीदवारी और परिमल नाथवानी की वैध दावेदारी ने मध्य प्रदेश और झारखंड को सुर्खियों में ला दिया है. कांग्रेस को आरोप है कि दोनों ही मामलों में गड़बड़ियां समान थीं, फिर भी मीनाक्षी का नामांकन अधूरी जानकारी के आधार पर तत्काल खारिज हो गया, वहीं परिमल नाथवानी को सुधार के लिए एक दिन का समय दिया गया.

मीनाक्षी नटराजन के मामले को लेकर कांग्रेस सांसद और वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है. खबरों के मुताबिक शीर्ष अदालत ने सुनवाई के लिए 12 जून की तारीख तय की है. इसी बीच कई सवाल उठ रहे हैं. क्या दोनों मामलों में अंतर हैं? क्या सुप्रीम कोर्ट चुनाव आयोग के इन फैसलों पर दखल दे सकती है? कांग्रेस का झारखंड और मध्य प्रदेश प्रकरण पर क्या पक्ष है? और सिंघवी का क्या तर्क है.

मामला क्या है

मध्य प्रदेश की तीन और झारखंड की दो राज्यसभा सीटें चुनाव के लिए खाली हुई थीं. इन राज्यों में विधायकों के अंकगणित के आधार पर, मध्य प्रदेश में भाजपा को दो और कांग्रेस को एक सीट मिलना तय था. वहीं झारखंड में दोनों सीटें INDIA गठबंधन के पाले में जाने के लिए तैयार थीं. कांग्रेस और झारखंड मुक्ति मोर्चा ने आपसी रंजिश सुलझाकर, प्रणव झा और वैद्यनाथ राम के नाम पर सहमति बना ली थी.

दोनों राज्यों में मामला उस वक्त फंस गया, जब भाजपा ने अतिरिक्त उम्मीदवार मैदान में उतार दिए. मध्य प्रदेश में महेश केवट और झारखंड में परिमल नाथवानी की उम्मीदवारी ने राज्य के राजनीतिक समीकरण फंसा दिए.

उम्मीदवारी खारिज

कांग्रेस नेता मीनाक्षी नटराजन का राज्यसभा नामांकन 9 जून को रद्द कर दिया गया. रिटर्निंग ऑफिसर के अनुसार मीनाक्षी ने अपने नामांकन के साथ दाखिल किए गए शपथपत्र (फॉर्म-26) में तेलंगाना की एक अदालत में लंबित मामले की जानकारी नहीं दी. भाजपा उम्मीदवार महेश केवट ने आपत्ति दर्ज कर आरोप लगाया था कि नटराजन ने अपने खिलाफ लंबित शिकायत का खुलासा नहीं किया.

इसी तर्ज पर कांग्रेस ने भी परिमल नाथवानी पर आरोप लगाए थे. कांग्रेस का आरोप था कि नामांकन के दस्तावेजों में कुछ जगह नाम 'परिमल नाथवानी' और कुछ जगह 'नाथवानी परिमल' दर्ज है. इसके अलावा आपराधिक मामले वाला कॉलम भी खाली छोड़ दिया गया था. इन शिकायतों के बावजूद, चुनाव आयोग ने परिमल नाथवानी का नामांकन रद्द नहीं किया, बल्कि 9 जून को आपत्तियों के कारण होल्ड पर रख दिया. साथ ही परिमल को 10 जून की सुबह 11:00 बजे तक का समय दिया गया और उसी दिन शाम को नामांकन वैध घोषित कर दिया गया.

कांग्रेस का पक्ष

कांग्रेस नेता अभिषेक मनु सिंघवी ने मीनाक्षी नटराजन का नामांकन रद्द किए जाने को "अवैध, पक्षपातपूर्ण और दुर्भावनापूर्ण" करार देते हुए कहा कि भाजपा जिस तेलंगाना मामले का हवाला दे रही है, वह केवल एक निजी शिकायत है, जिस पर अभी तक अदालत ने संज्ञान भी नहीं लिया है.

सिंघवी के अनुसार, कानून की नजर में किसी आपराधिक मामले को तभी लंबित माना जाता है जब अदालत उस पर संज्ञान ले और आगे की कार्रवाई शुरू कर दे. उन्होंने तर्क दिया कि जन प्रतिनिधित्व अधिनियम के तहत उम्मीदवार को केवल उन्हीं मामलों की जानकारी देनी होती है जिनमें आरोप तय हो चुके हों और दो वर्ष या उससे अधिक की सजा का प्रावधान हो. ऐसे में नटराजन पर जानकारी छिपाने का आरोप पूरी तरह निराधार है.

उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा के दबाव में यह फैसला लिया गया, जिससे चुनावी मैदान में समान अवसर के सिद्धांत को नुकसान पहुंचा है. कांग्रेस नेता ने संविधान के अनुच्छेद 324 का हवाला देते हुए चुनाव आयोग से तत्काल हस्तक्षेप कर नामांकन बहाल करने की मांग की है. साथ ही उन्होंने सुप्रीम कोर्ट में भी तत्काल सुनवाई का अनुरोध करते हुए कहा कि राज्यसभा चुनाव नजदीक हैं, इसलिए उम्मीदवार को लंबी कानूनी प्रक्रिया में उलझाने के बजाय आयोग और अदालत को तुरंत राहत देनी चाहिए.

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