नेताओं की बगावत और राजनीतिक हिंसा के बीच टूटती पार्टी को बचाने ममता बनर्जी अपने पुराने अंदाज में आ गई हैं. सत्ता से लोहा लेना दीदी ने आंदोलन का नंदीग्राम और सिंगूर वाला रास्ता दुबारा अपना लिया है. दरअसल, पूर्व सीएम और टीएमसी सुप्रीमो ममता बनर्जी बुधवार को लगभग 3 बजे कोलकाता के एस्प्लेनेड क्षेत्र में वरिष्ठ नेताओं के साथ बैठ गईं. यह प्रदर्शन भतीजे अभिषेक बनर्जी और सांसद कल्याण बनर्जी सहित पार्टी के कई वरिष्ठ नेताओं पर हुए हालिया हमलों को लेकर हो रहा है.

इस दौरान भारी पुलिस बल और समर्थकों के बीच बनर्जी ने पार्टी कार्यकर्ताओं पर हुई हिंसा का मुद्दा उठाया, साथ ही लोकतंत्र को बचाने इंडिया गठबंधन का भी जिक्र किया.

धरना कहां हुआ

यह प्रदर्शन कोलकाता स्थित रानी रश्मोनी एवेन्यू पर होना था, लेकिन अनुमति न मिलने के बाद ममता बनर्जी लगभग 3 बजे कोलकाता के एस्प्लेनेड क्षेत्र में धरने पर बैठ गईं. धरना स्थल पर पहुंचने से पहले बनर्जी ने अपने कालीघाट स्थित आवास से भीमराव अंबेडकर की प्रतिमा तक पदयात्रा भी की. डॉ. अंबेडकर पर पुष्पांजलि अर्पित की और अपने हाथों में भारत के संविधान की एक प्रति लेकर मार्च किया. इस दौरान माया मित्रा, कुणाल घोष, कल्याण बनर्जी, डोला सेन और असीम पात्रा सहित पार्टी के अन्य वरिष्ठ नेता ममता के साथ रहे. वहां से वे टीएमसी की चैनल एमसीडी कार्यालय पहुंचीं, जहां भारी पुलिस बल तैनात था.

खबरों के मुताबिक, पुलिस ने मंगलवार दोपहर 12:30 बजे ही पार्टी को सूचित किया कि चांदनी चौक के लिए दी गई अनुमति रद्द कर दी गई है और उसके लिए नए आवेदन की आवश्यकता होगी.

ममता क्या बोलीं

तृणमूल समर्थकों के बीच पुराने अंदाज में उतरी ममता बोली, “हमारे विधायक, पार्षद और पार्टी प्रत्याशी डराए जा रहे हैं. लेकिन, ममता बनर्जी किसी से डरने वाली नहीं हैं. हमारे कार्यकर्ताओं का राजनीतिक षड्यंत्र के तहत दमन किया जा रहा है. हमारे विधायक अपने घरों से बाहर नहीं निकल पा रहे हैं क्योंकि पुलिस उनसे मिलने वालों को गिरफ्तार कर रही है.

पार्टी तोड़ने पर बोली

ममता ने अपने समर्थकों की ओर इशारा करते हुए पूछा कि, टीएमसी को कौन तोड़ेगा? हम इस पार्टी के साथ शुरुआत से जुड़े हैं और इसके चुनाव चिह्न के साथ रहे हैं. क्या वे लोकतंत्र पर बुलडोज़र चलाएँगे? हमारे विधायकों और सांसदों को मत डराइए. लोगों को आत्महत्या के लिए मत उकसाइए.”

PM मोदी से बोली

ममता बनर्जी अपने पुराने भाई प्रधानमंत्री मोदी का नाम लिए बिना बोलीं, “देखिए, किसकी जिम्मेदारी है वो देखे क्या हो रहा है. पश्चिम बंगाल के साथ जो हुआ, उसकी जिम्मेदारी आपको लेनी होगी.” उन्होंने इशारों में मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी का जिक्र करते हुए कहा, “मोदी ने बंगाल को ऐसे असामाजिक और बुलडोज़र समर्थक नेताओं के हाथों में छोड़ दिया है, जो राज्य को अंधेरे की ओर धकेल रहे हैं.”

इंडिया गठबंधन पर बोली

राज्य और देश की सत्तारूढ़ दल भाजपा को हराने का संकल्प लेते हुए टीएमसी सुप्रीमो ने कहा कि “सभी भाजपा-विरोधी दल” जल्द ही एक साझा मंच पर आएंगे. उन्होंने कहा, “बहुत जल्द सभी भाजपा-विरोधी दल दिल्ली में मिलेंगे और 8 जून को इंडिया गठबंधन की बैठक में शामिल होंगे. मैं भाजपा को छोड़कर सभी राजनीतिक दलों से सहमत हूं. हालांकि, मैंने उन भाजपा सदस्यों की भी मदद की है, जिन्होंने मुझसे सहायता मांगी."

अनुमति नहीं दी

ममता के पुराने साथी और प्रदेश के तत्कालिक मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने 2000 के दशक में ममता के साथ रोड नापे हैं. वह जानते हैं कि ममता ने बतौर विपक्ष वाम सरकार में खलबली पैदा कर दी थी. इसलिए, सुवेंदु रिस्क नहीं लेंगे. इसी कारण की वजह से ममता को अनुमति नहीं दी गई. इस बात को ममता भी समझती हैं. इस बात की ओर इशारा करते हुए भाजपा सरकार के साथ-साथ पुलिस पर भी निशाना साधते हुए उन्होंने आरोप लगाया कि रानी रश्मोनी एवेन्यू में सभा की अनुमति इसलिए नहीं दी गई क्योंकि प्रशासन को डर था कि लोग वहां बड़ी संख्या में जुटेंगे.

अनुमति नहीं मिलने पर ममता ने कहा, “गद्दार उसी सड़क (रानी रश्मोनी एवेन्यू) का उपयोग करते हैं. बाद में राज्यपाल ने भी वहां कार्यक्रम किया. अगर भविष्य में मुझे रानी रश्मोनी एवेन्यू में अनुमति नहीं दी गई तो मैं अदालत जाऊंगी” उन्होंने आरोप लगाया कि उन्हें यहां विरोध प्रदर्शन नहीं करने दिया गया, लेकिन वे जहां भी संभव होगा, आंदोलन जारी रखेंगी.

राजनीतिक हिंसा

राज्य में चुनाव के तुरंत बाद हुई हिंसा की वारदातों का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा, “देश के पांच राज्यों के साथ-साथ पश्चिम बंगाल में भी चुनाव हुए. फिर केवल पश्चिम बंगाल को ही राजनीतिक हिंसा और अत्याचारों के लिए क्यों बदनाम किया जा रहा है?” राजनीतिक हिंसा को लेकर ममता ने उत्तर 24 परगना में टीएमसी सांसद और भाटपाड़ा नगर पालिका के पूर्व अध्यक्ष अभिषेक बनर्जी पर हुए कथित हमले का भी जिक्र किया. उन्होंने कहा, “उन्होंने मेरे सांसद को डराने की कोशिश की, लेकिन मैं जीवित हूं और अपनी आवाज़ उठाती रहूंगी. जब तक मैं हूं, मैं सिर नहीं झुकाऊंगी.”

मामला क्या है

दरअसल हाल ही में ममता के भतीजे और डायमंड हार्बर से सांसद अभिषेक बनर्जी पर लाठियों-डंडों के साथ हमला हुआ है. कैमरे के सामने हुए इस हमले के आरोप भाजपा कार्यकर्ताओं पर लगे हैं. हिंसा की घटना अभिषेक पर नहीं थमी, बल्कि पार्टी के चर्चित लोकसभा सांसद कल्याण बनर्जी भी राजनीतिक हिंसा का शिकार बने हैं. बतौर ममता, "हमारी पार्टी के लगभग 25 से 30 कार्यकर्ताओं की हत्या कर दी गई है. हमारे 5,000 से 8,000 समर्थकों को उनके घरों से बेघर कर दिया गया है. इसके अलावा, लगभग 3,000 घरों को ध्वस्त कर दिया गया है."

"नेताओं की बगावत और राजनीतिक हिंसा के बीच टूटती पार्टी को बचाने ममता बनर्जी अपने पुराने अंदाज में आ गई हैं. सत्ता से लोहा लेना दीदी ने आंदोलन…"