अभी देश दिल्ली के मालवीय नगर अग्निकांड के भयावह दृश्यों को भुलाने की कोशिश कर ही रहा था कि लखनऊ से वैसे ही दृश्य सामने आने लगे. वजह सिर्फ़ एक, नीचे से ऊपर तक लापरवाहियों का पुलिंदा. किसे कोसा जाए, किस की कमियां निकाली जाएं या सब कुछ छोड़कर उन्हें दिलासा दिया जाए जिनके अपने जिगर के टुकड़े हमेशा के लिए छिटक गये. दरअसल हम बात कर रहे हैं, लखनऊ में हुए अग्निकांड के बारे में.
लखनऊ में एक बार फिर आग ने कई परिवारों की खुशियां छीन लीं. कुछ समय पहले झुग्गियों में लगी भीषण आग ने लोगों का आशियाना छीन लिया था, और अब अलीगंज के इस दर्दनाक अग्निकांड ने 15 परिवारों की दुनिया उजाड़ दी. हर हादसे के बाद जांच होती है, वादे होते हैं, कार्रवाई की बातें होती हैं, लेकिन सवाल वही रहता है, आखिर सबक कब लिया जाएगा?
पीड़ित मां का दर्द और प्रशासन पर सवाल
इस हादसे के बाद एक पीड़ित मां का दर्द भी लोगों को झकझोर रहा है. अपने बेटे को खो चुकी मां ने आरोप लगाते हुए कहा,
“मुख्यमंत्री के आने पर जिस तरह पूरा प्रशासन और मशीनरी सक्रिय हो गई, अगर वही तेजी बच्चों को बचाने के लिए दिखाई गई होती, तो शायद कई जानें बच सकती थीं.”
ये सिर्फ एक मां का बयान नहीं, बल्कि उन तमाम परिवारों का दर्द है जिन्होंने इस हादसे में अपनों को खो दिया.
सूत्रों के मुताबिक, आग की शुरुआत एसी सिस्टम में हुए शॉर्ट सर्किट से हुई. लेकिन क्या यही पूरी सच्चाई है? शायद नहीं. क्योंकि जिस इमारत का नक्शा 2014 में केवल आवासीय उपयोग के लिए पास किया गया था, उसे मकान मालिको ने अवैध व्यावसायिक निर्माण में बदल दिया, जिसके बाद 2016 में इस बिल्डिंग को गिराने के आदेश जारी कर दिये गए लेकिन, भ्रष्टाचार और प्रशासनिक लापरवाही के चलते वर्षों तक यह बिल्डिंग ऐसे ही खड़ी रही. फिर इस बिल्डिंग में हुए हादसे ने 15 परिवारों की खुशियां छीन ली.
बायोमेट्रिक गेट ने रोका बाहर जाने का मार्ग
इस बिल्डिंग में बायोमेट्रिक एंट्री सिस्टम लगा था. आग लगने के बाद जैसे ही बिजली चली हुई, गेट अपने आप लॉक हो गए और अंदर फंसे लोगों के लिए बाहर निकलने का रास्ता बंद हो गया. हैरानी की बात यह है कि इमारत में कोई इमरजेंसी एग्जिट भी नहीं था.
जान बचाने के लिए लोग बाथरूम और कमरों में छिप गए, लेकिन आग से ज्यादा जहरीले धुएं और दम घुटने की वजह से अधिकांश लोगों की मौत हो गई.
सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब 2016 में इस अवैध निर्माण के खिलाफ कार्रवाई का आदेश दिया जा चुका था, तो फिर यह इमारत 10 साल तक कैसे चलती रही? और अगर समय रहते कार्रवाई हो जाती, तो क्या आज 15 जिंदगियां बच सकती थीं?
आखिर इन 15 मौतों का जिम्मेदार सिर्फ शॉर्ट सर्किट है, या फिर वह सिस्टम भी जिसने खतरे को जानते हुए नजरअंदाज किया?
"अभी देश दिल्ली के मालवीय नगर अग्निकांड के भयावह दृश्यों को भुलाने की कोशिश कर ही रहा था कि लखनऊ से वैसे ही दृश्य सामने आने लगे. वजह सिर्फ़ ए…"
