गांधी परिवार के करीबी और कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने सोनिया गांधी और प्रियंका गांधी वाड्रा की मौजूदगी में दोबारा राज्यसभा की शपथ ले ली है. इसी के साथ खड़गे राज्यसभा में दोबारा नेता प्रतिपक्ष बन गए हैं. गौरतलब है कि 25 जून को खड़गे की राज्यसभा सदस्यता समाप्त हो गई थी और नेता प्रतिपक्ष का पद भी रिक्त हो गया था.

कब हुए थे चुनाव

मल्लिकार्जुन खड़गे ने 6 जून को कांग्रेस उम्मीदवार के रूप में कर्नाटक से राज्यसभा चुनाव के लिए नामांकन दाखिल किया था. राज्य में चार सीटों के लिए चुनाव होना था और मतदान की तारीख 18 जून तय की गई थी. हालांकि, नामांकन पत्रों की जांच और नाम वापसी की प्रक्रिया पूरी होने के बाद चार सीटों के लिए केवल चार उम्मीदवार ही मैदान में बचे थे. इसलिए मतदान की आवश्यकता नहीं पड़ी और 12 जून को खड़गे निर्विरोध निर्वाचित घोषित कर दिए गए थे.

कब और कहां ली शपथ

मल्लिकार्जुन खड़गे ने नई दिल्ली स्थित संसद भवन में राज्यसभा सदस्य के रूप में दूसरी बार शपथ ली है. खड़गे को राज्यसभा के सभापति और उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन ने अपने कक्ष में शपथ दिलाई. खड़गे ने हिंदी में शपथ ली और शपथ के दौरान उनके हाथ में भारतीय संविधान की प्रति थी. इस अवसर पर कांग्रेस संसदीय दल की अध्यक्ष सोनिया गांधी, प्रियंका गांधी वाड्रा, राज्यसभा में सदन के नेता जे. पी. नड्डा, संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू, कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल और राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश भी कक्ष में मौजूद थे.

नेता प्रतिपक्ष

मल्लिकार्जुन खड़गे पहली बार 2020 में कर्नाटक से निर्विरोध राज्यसभा के लिए निर्वाचित हुए थे. अगले ही साल 16 फरवरी 2021 को कांग्रेस ने उन्हें राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष घोषित कर दिया था. जून 2026 में उनका पहला कार्यकाल पूरा होने पर नेता प्रतिपक्ष का पद खाली हो गया था, लेकिन अब दोबारा वे इस जिम्मेदारी को संभालेंगे.

खड़गे क्या बोले

मल्लिकार्जुन खड़गे ने शपथ ग्रहण के बाद सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा कि वे जनता की चिंता, आकांक्षा और आवाज को पूरी ईमानदारी, दृढ़ विश्वास और संकल्प के साथ उठाते रहेंगे. उन्होंने फिर से राज्यसभा सदस्य के रूप में शपथ लेने और उच्च सदन में नेता प्रतिपक्ष की जिम्मेदारी संभालने को गर्व का विषय बताया.

खड़गे का राजनीतिक सफर

मल्लिकार्जुन खड़गे का राजनीतिक सफर पांच दशकों से भी अधिक लंबा रहा है. मुख्यमंत्री बनने के ख्वाबों से भरा यह सफर छात्र राजनीति और श्रमिक आंदोलनों से शुरू हुआ था. 1969 में कांग्रेस में शामिल होने के बाद खड़गे गुलबर्गा (अब कलबुर्गी) सिटी कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष बनाए गए थे. इस दौरान वे श्रमिक अधिकारों के संघर्ष में भी सक्रिय रहे.

खड़गे की पहली राजनीतिक जीत 1972 में दर्ज हुई थी. इस वर्ष वे गुरमिटकल विधानसभा सीट से विधायक चुने गए थे. इसके बाद 1972 से 2009 तक वे लगातार नौ बार विधायक चुने गए. इस दौरान उन्होंने गृह, राजस्व, ग्रामीण विकास, परिवहन और सिंचाई जैसे मंत्रालयों की जिम्मेदारी भी संभाली.

वे दो बार कर्नाटक विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष भी बने और 2005 में कर्नाटक प्रदेश कांग्रेस कमेटी (KPCC) के अध्यक्ष बनाए गए.

2009 में उनका राजनीतिक सफर दिल्ली पहुंचा, जब वे पहली बार कर्नाटक के गुलबर्गा लोकसभा क्षेत्र से सांसद बने. 2014 में वे दोबारा लोकसभा पहुंचे. 2014 से 2019 तक उन्होंने लोकसभा में कांग्रेस संसदीय दल के नेता की भूमिका निभाई. 2019 के लोकसभा चुनाव में उन्हें अपने राजनीतिक जीवन की पहली चुनावी हार का सामना करना पड़ा.

हार के बाद 2020 में कांग्रेस ने उन्हें कर्नाटक से राज्यसभा भेजा और 2021 में उन्हें राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष बनाया. अक्टूबर 2022 में जब अशोक गहलोत ने पार्टी के खिलाफ बगावत कर दी थी, तब खड़गे ने ही पार्टी की कमान संभालकर संगठन की साख बचाई थी.

"गांधी परिवार के करीबी और कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने सोनिया गांधी और प्रियंका गांधी वाड्रा की मौजूदगी में दोबारा राज्यसभा की शपथ …"