नैनीताल: लंबे सप्ताहांत (weekend) में कुमाऊं की पहाड़ियों में कैंची धाम की ओर जाने वाली सड़क पर कई किलोमीटर लंबा जाम लग गया. गाड़ियां रेंगती रहीं, श्रद्धालु वाहनों से उतरकर सड़क किनारे पैदल चलने को मजबूर हुए और परिवार घंटों इंतज़ार करते रहे. दर्शन के लिए आने वाले वाहनों के साथ मुक्तेश्वर की ओर जाने वाली गाड़ियां भी इसी जाम में फंस गईं.

सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में भीमताल, भोवाली और कैंची के आसपास कारों, बसों और दोपहिया वाहनों की लंबी कतारें दिखीं. कुछ लोगों ने बताया कि जिस सफ़र में आमतौर पर कुछ घंटे लगते हैं, उसमें कहीं ज़्यादा समय लग गया. हालात को देखते हुए नैनीताल प्रशासन अब कैंची धाम पर दबाव कम करने के लिए वैकल्पिक मार्ग खोलने पर विचार कर रहा है.

नैनीताल के ज़िलाधिकारी ललित मोहन ने बताया कि प्रशासन एक नई मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) पर काम कर रहा है. इसके तहत कैंची क्षेत्र को अल्मोड़ा और रानीखेत से जोड़ने वाले मौजूदा बाइपास को खोलकर यातायात का एक हिस्सा उधर मोड़ा जा सकता है. उन्होंने कहा कि भीड़ नियंत्रण के उपायों को अंतिम रूप देने के लिए 6 अक्टूबर को मंदिर प्रबंधन, पुलिस और अन्य संबंधित पक्षों के साथ बैठक होगी.

ललित मोहन ने कहा, ‘आमतौर पर मंदिर में रोज़ करीब 25,000 लोग आते हैं, लेकिन इस सप्ताहांत, यानी 2 अक्टूबर से, हर दिन 35,000 से ज़्यादा श्रद्धालु पहुंचे. श्रद्धालु और स्थानीय लोग एक ही सड़क का इस्तेमाल करते हैं, जो मुक्तेश्वर तक भी जाती है. इसी कारण घंटों जाम लगा रहा.’ उन्होंने बताया कि 4 अक्टूबर को मुक्तेश्वर की ओर का यातायात सुचारु कर दिया गया था.

भीड़ बढ़ने की वजह
ज़िलाधिकारी के मुताबिक भीड़ में इस उछाल की दो मुख्य वजहें हैं. पहली, मानसून का अंत, जिसके बाद बारिश और भूस्खलन के डर से पहाड़ों से दूर रहे सैलानी लौट रहे हैं. दूसरी, नीम करोली बाबा के जीवन और उपदेशों पर बनी फ़िल्म ‘हनुमान अंश’ की रिलीज़.

इंडियन एक्सप्रेस ने पिछले महीने कैंची धाम पर रिपोर्ट की थी, तब करीब दो करोड़ रुपये के कथित बजट में बनी इस फ़िल्म की दुनिया भर में कमाई लगभग 300 करोड़ रुपये तक पहुंच चुकी थी. फ़िल्म की सफलता ने 1973 में देह त्यागने वाले नीम करोली बाबा को उस युवा पीढ़ी तक पहुंचाया है, जिसका उस दौर से कोई सीधा नाता नहीं रहा. जानकारी के अनुसार 2026 के पहले छह महीनों में 24.34 लाख लोग कैंची धाम पहुंचे, जबकि पूरे पिछले साल यह संख्या करीब आठ लाख थी.

भीड़ को देखते हुए फ़िल्म के निर्देशक विशाल चतुर्वेदी ने भी श्रद्धालुओं से अपील की है कि कैंची धाम जाने से पहले वहां के हालात की जानकारी ले लें. उन्होंने कहा कि वहां इस समय बहुत भीड़ है और परिवार के बच्चों व महिलाओं को भीड़ या जाम में घुटन जैसी स्थिति से नहीं गुज़रना चाहिए. उन्होंने यह सुझाव भी दिया कि कैंची में ज़्यादा भीड़ रहने पर श्रद्धालु नीम करोली बाबा से जुड़े अन्य स्थलों के दर्शन कर सकते हैं.

बाइपास का काम जारी
प्रस्तावित डायवर्जन ऐसे समय में सामने आया है, जब उत्तराखंड सरकार सैनेटोरियम से रानीघाट तक 18.15 किलोमीटर लंबा कैंची धाम बाइपास पहले से बना रही है. इसके आठ किलोमीटर हिस्से का निर्माण और हॉट-मिक्सिंग इस साल की शुरुआत में पूरी हो चुकी है, जबकि बाकी 10.15 किलोमीटर में पहाड़ की कटाई का काम हो गया है. बाइपास को भोवाली-अल्मोड़ा हाईवे से जोड़ने के लिए एक मोटर पुल भी बनाया जा रहा है.

राज्य ने इसके अलावा भोवाली बाइपास और शिप्रा नदी पर 30 मीटर लंबा दोहरी लेन का पुल बनाया है. लोक निर्माण विभाग ने तल्ला रामगढ़-रातीघाट सड़क को भी वैकल्पिक मार्ग के रूप में चिह्नित किया है, जो कैंची को रामगढ़, मुक्तेश्वर, लोहाघाट और चंपावत से जोड़ती है. विभाग का कहना है कि इसे मज़बूत करने से यातायात का दबाव काफ़ी घट सकता है.

राज्य के एक नियोजन दस्तावेज़ के अनुसार उत्तराखंड में आने वाले पर्यटकों की संख्या यहां की स्थानीय आबादी के करीब 300 प्रतिशत के बराबर है, जबकि हिमाचल प्रदेश में यह आंकड़ा 185 प्रतिशत है. दस्तावेज़ में चेतावनी दी गई है कि जो पहाड़ी स्थल कभी पैदल घूमने और ट्रेकिंग के लिए जाने जाते थे, वे अब वाहनों के बोझ से दम घुटने की स्थिति में पहुंच रहे हैं.

इस बीच राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) ने हाल ही में केदारनाथ, हेमकुंड साहिब, गंगोत्री और यमुनोत्री जैसे प्रमुख तीर्थस्थलों की वहन क्षमता पर हुए वैज्ञानिक अध्ययन को रिकॉर्ड पर लिया है. यह हिमालय जैसे नाज़ुक क्षेत्र में पर्यटन और तीर्थयात्रा की सीमाओं पर चल रही व्यापक बहस को दर्शाता है.

कैंची धाम की वहन क्षमता पर भी अलग से अध्ययन हो चुका है. पर्यटन विभाग के 2025 के अध्ययन में सामने आया कि 64 प्रतिशत श्रद्धालु केवल दर्शन के लिए आते हैं और उसी दिन लौट जाते हैं, जबकि 82.4 प्रतिशत उत्तराखंड के बाहर से आते हैं. करीब दो-तिहाई श्रद्धालु 15 से 30 वर्ष की उम्र के हैं. सबसे ज़्यादा शिकायत पार्किंग को लेकर थी, जिससे 74 प्रतिशत लोग असंतुष्ट मिले.

मंदिर में स्थिति ‘नियंत्रण में’
मंदिर प्रशासन का कहना है कि हालात संभले हुए हैं. कैंची धाम के लेखा विभाग में कार्यरत प्रदीप भट्ट ने बताया कि मंदिर के अंदर और बाहर अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया है. उन्होंने कहा, ‘लंबे सप्ताहांत की वजह से भीड़ बढ़ गई. पुलिस अतिरिक्त सावधानी बरत रही है. अब तक स्थिति ठीक से संभाली गई है.’

5 अक्टूबर तक संकट काफ़ी हद तक टल चुका था. मंदिर के प्रवेश द्वार के पास पारिवारिक कारोबार चलाने वाले 27 वर्षीय धीरज तिवारी ने कहा कि सबसे ज़्यादा जाम एक-दो दिन ही रहा. उनके मुताबिक, ‘प्रशासन ने सब कुछ साफ़ करा दिया है. आज सब सामान्य दिख रहा है. लंबे सप्ताहांत की वजह से श्रद्धालुओं की आवाजाही बहुत बढ़ गई थी.’

स्थानीय लोगों की परेशानी
स्थानीय निवासियों के लिए यह समस्या अलग तरह से सामने आती है. मंदिर से करीब 500 मीटर दूर होटल मोनाल में पहले काम कर चुके और भोवाली में रहने वाले मनी भारद्वाज ने कहा कि दिक्कत सिर्फ़ पर्यटकों तक सीमित नहीं थी. उन्होंने कहा, ‘आज हालात सामान्य लग रहे हैं, लेकिन सप्ताहांत में स्थानीय लोगों को बहुत परेशानी झेलनी पड़ी. जब हज़ारों गाड़ियां एक ही सड़क पर फंसी हों, तो इसका असर सब पर पड़ता है, चाहे वे काम पर जाने वाले हों, सामान लाने वाले हों, इलाज के लिए जा रहे हों या बस घर लौटना चाहते हों. स्थानीय लोगों के पास कोई अलग सड़क नहीं है. श्रद्धालुओं और स्थानीय निवासियों, दोनों को उसी ढांचे पर निर्भर रहना पड़ता है. हर बार भारी भीड़ आने पर स्थानीय लोग ही परेशानी उठाते हैं. हर लंबे सप्ताहांत का इंतज़ार करने और फिर सड़कों पर ज़्यादा पुलिस लगाने के बजाय एक स्थायी समाधान ज़रूरी है.’

 

-ममता सिंह 

"नैनीताल: लंबे सप्ताहांत (weekend) में कुमाऊं की पहाड़ियों में कैंची धाम की ओर जाने वाली सड़क पर कई किलोमीटर लंबा जाम लग गया. गाड़ियां रेंगती…"