दिल्ली हाईकोर्ट के पूर्व जज जस्टिस यशवंत वर्मा के सरकारी आवास से कथित तौर पर बड़ी मात्रा में जली हुई नकदी मिलने का मामला एक बार फिर चर्चा में है. जजेस इंक्वायरी कमेटी ने अपनी जांच रिपोर्ट में जस्टिस वर्मा के खिलाफ लगाए गए तीनों आरोपों को सही माना है. 12 अगस्त को कमेटी की रिपोर्ट संसद के दोनों सदनों में पेश की गई. रिपोर्ट में जांच के दौरान जुटाए गए सबूत और जस्टिस वर्मा के बयानों का भी उल्लेख किया गया है.

4 मार्च 2025 को क्या हुआ था?

यह मामला 14 मार्च 2025 का है. उस वक्त जस्टिस यशवंत वर्मा दिल्ली हाईकोर्ट के जज थे. उनके सरकारी आवास में अचानक आग लग गई. परिवार ने इसकी जानकारी फायर डिपार्टमेंट को दी. इसके बाद दमकल की टीम मौके पर पहुंची. टीम ने आग बुझाना शुरू किया. ज्यादातर जगहों पर आग पर काबू पा लिया गया. लेकिन जब दमकलकर्मी स्टोर रूम में पहुंचे, तो मामला पूरी तरह बदल गया. वहां बड़ी मात्रा में नकदी मिलने की बात सामने आई. रिपोर्टों के मुताबिक, वहां ₹500 के नोटों के बंडल रखे हुए थे. कुछ नोट बोरियों में भी मिले थे. आग की वजह से काफी नोट जल चुके थे. इसके बाद सबसे बड़ा सवाल यही उठा. आखिर इतना कैश जस्टिस वर्मा के घर में आया कहां से?

जांच के लिए बनी कमेटी

मामला सामने आने के बाद जांच शुरू हुई. तत्कालीन सीजेआई संजीव खन्ना ने तीन सदस्यीय कमेटी बनाई. कमेटी को जस्टिस वर्मा पर लगे आरोपों की जांच करनी थी. अब कमेटी की फाइनल रिपोर्ट सामने आ चुकी है. रिपोर्ट में तीनों आरोपों को सही माना गया है.

पहला आरोप क्या था?

पहला आरोप था कि जस्टिस वर्मा अपने घर में रखी नकदी के बारे में जानकारी नहीं दे पाए. कमेटी ने उनसे पूछा कि स्टोर रूम में मिले नोट आखिर आए कहां से? लेकिन कमेटी के मुताबिक, इसका कोई संतोषजनक जवाब नहीं मिला. जस्टिस वर्मा यह नहीं बता पाए कि इतनी बड़ी मात्रा में कैश वहां कैसे पहुंचा. इसलिए कमेटी ने पहला आरोप सही माना.

दूसरा आरोप क्या था?

दूसरा आरोप सबूतों को सुरक्षित रखने से जुड़ा था. कमेटी के मुताबिक, स्टोर रूम को सील करने और जांच शुरू होने से पहले वहां की स्थिति में बदलाव हुआ. बाद में कुछ नोटों के नहीं मिलने की बात भी सामने आई. लेकिन इसका भी कोई साफ जवाब नहीं मिला. कमेटी ने इसे सबूतों को संभालने में गंभीर लापरवाही माना. हालांकि, यहां एक बात साफ है. कमेटी ने यह नहीं कहा कि जस्टिस वर्मा ने खुद नोट हटाए थे. आरोप सबूतों को सही तरीके से सुरक्षित नहीं रखने का था.

तीसरा आरोप क्या था?

तीसरा आरोप जस्टिस वर्मा के जवाबों से जुड़ा था. कमेटी ने खास तौर पर 22 मार्च 2025 को दिए गए उनके जवाब का जिक्र किया. उस समय जस्टिस वर्मा ने कहा था कि उन्हें स्टोर रूम में रखे कैश के बारे में कोई जानकारी नहीं थी. बाद में उनके जवाब में बदलाव आया. उन्होंने घटनास्थल की स्थिति पर सवाल उठाए. उन्होंने नकदी की गिनती और जब्ती को लेकर भी सवाल किए. बाद में हुई सफाई का मुद्दा भी उठाया गया. जस्टिस वर्मा की तरफ से स्टाफ की भूमिका की बात भी कही गई. उन्होंने नकदी को वहां रखे जाने या बाद में हटाए जाने की संभावना भी जताई. लेकिन कमेटी के मुताबिक, इन दावों के समर्थन में कोई ठोस सबूत नहीं दिया गया. कोई ऐसा गवाह भी सामने नहीं आया, जो इन बातों की पुष्टि कर सके. इसलिए कमेटी ने जस्टिस वर्मा के जवाबों को संतोषजनक नहीं माना. रिपोर्ट में कहा गया कि उनका स्पष्टीकरण अधूरा और टालमटोल वाला था.

कमेटी का क्या निष्कर्ष रहा?

रिपोर्ट का सबसे अहम हिस्सा यही है. कमेटी ने साफ कहा कि जस्टिस वर्मा के खिलाफ लगे तीनों आरोप साबित होते हैं. पहला आरोप नकदी के स्रोत को लेकर संतोषजनक जवाब नहीं मिला. दूसरा आरोप सबूतों को सुरक्षित रखने में गंभीर लापरवाही हुई. तीसरा आरोप जस्टिस वर्मा का बचाव कमेटी को संतोषजनक नहीं लगा. कमेटी ने अपनी रिपोर्ट संसद के दोनों सदनों में पेश कर दी है. रिपोर्ट दो हिस्सों में है. इसके साथ जांच के दौरान जुटाए गए दस्तावेज और सबूत भी लगाए गए हैं.

एसआईटी जांच की मांग भी हुई थी

इस मामले में सुप्रीम कोर्ट में भी एक याचिका दाखिल की गई थी. याचिका में जस्टिस वर्मा के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की मांग की गई थी. इसके साथ एसआईटी जांच की मांग भी की गई थी. लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने इस याचिका को खारिज कर दिया. जस्टिस पी.एस. नरसिम्हा और जस्टिस आलोक आराध्य की पीठ ने मामले की सुनवाई की थी. कोर्ट ने याचिका को सस्ती पब्लिसिटी के लिए दाखिल बताया.

अब जस्टिस वर्मा कहां हैं?

जब यह मामला सामने आया था, तब जस्टिस वर्मा दिल्ली हाईकोर्ट में थे. विवाद के बाद उनका तबादला इलाहाबाद हाईकोर्ट कर दिया गया था. इसके बाद अप्रैल 2026 में जस्टिस वर्मा ने इस्तीफा दे दिया. हालांकि, अभी तक उनका इस्तीफा स्वीकार नहीं किया गया है. अब कमेटी की रिपोर्ट संसद में पेश हो चुकी है. तीनों आरोपों को सही माना गया है. ऐसे में अब आगे क्या कार्रवाई होती है, इस पर सबकी नजर है. फिलहाल इतना साफ है कि मार्च 2025 में घर में लगी आग से शुरू हुआ यह मामला अब संसद तक पहुंच चुका है.


 

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