जम्मू और कश्मीर इन दिनों दो पुस्तकों को लेकर चर्चा में हैं. इनमें पुस्तकों में सरकारी स्कूल की लाइब्रेरी के लिए एक किताब में इस इलाके को भारत के कब्जे वाला कश्मीर (India-occupied Kashmir ) और भारत के नियंत्रण वाला कश्मीर (Indian-held Kashmir) बताया गया था। यहां तक कि प्रतिबंधित JKLF के संस्थापक मकबूल भट को शहीद कहा गया था। 

विपक्षी BJP ने शिक्षा मंत्री सकीना इटू के इस्तीफ़े की मांग की, किताब पर तुरंत रोक लगाने और ज़िम्मेदार लोगों के ख़िलाफ़ आपराधिक कार्रवाई करने को कहा। वहीं, उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने मामले को लेकर तगड़ा एक्शन लिया है. प्रशासन ने स्कूल शिक्षा विभाग के आठ अधिकारियों को सस्पेंड, लेखकों और पब्लिशर्स को ब्लैकलिस्ट कर दिया. वही, सरकारी स्कूलों की लाइब्रेरी से दोनों किताबें हटा ली गई हैं.

आठ शिक्षा अधिकारियों को किया निलंबित 

उपराज्यपाल के निर्देश पर विभाग ने गंभीर अनियमितताओं और लापरवाही के आरोप में आठ अधिकारियों को निलंबित कर दिया. इनमें प्रधानाचार्य, शैक्षणिक अधिकारी, लेक्चरर और लाइब्रेरी कोऑर्डिनेटर शामिल हैं. निलंबन अवधि के दौरान ये सभी स्कूल शिक्षा विभाग से संबद्ध रहेंगे.

इसके अलावा, स्कूल शिक्षा के प्री-प्राइमरी से कक्षा 12 तक के स्तर पर लाइब्रेरी समन्वयक के साथ काम करने वाले संविदा कंप्यूटर सहायक की सेवाएं तुरंत खत्म कर दी गईं.

किन पुस्तकों को ब्लैकलिस्ट किया गया?

ब्लैकलिस्ट की गई दो पुस्तकें जिनमे "ग्रेट पर्सनैलिटीज ऑफ जम्मू एंड कश्मीर", जिसे डॉ. सुहंत गिरी ने लिखा है और दिल्ली स्थित ऑरोरा प्रकाशन ने प्रकाशित किया है और "पर्सनैलिटीज एंड लीजेंड्स ऑफ जे एंड के", जिसे डॉ. हिलाल अहमद और संतोष मीणा ने लिखा है और जम्मू स्थित ओबेरॉय बुक सर्विस ने प्रकाशित किया है, शामिल हैं.

पूरा विवाद तब शुरू हुआ जब जम्मू-कश्मीर पीपुल्स फोरम (JKPF) ने आरोप लगाया कि समग्र शिक्षा योजना के तहत सरकारी स्कूलों में बांटी जा रही इन पुस्तकों में अलगाववादियों और आतंकवादियों को जम्मू-कश्मीर की "महान हस्तियां" और "दिग्गज" बताया गया है.

दावा किया गया कि इन पुस्तकों में जम्मू-कश्मीर लिबरेशन फ्रंट (JKLF) के संस्थापक मोहम्मद मकबूल भट, जिन्हें 1984 में दिल्ली की तिहाड़ जेल में फांसी दी गई थी, जेल में बंद अलगाववादी नेता मसर्रत आलम, मारे गए अलगाववादी नेता अब्दुल गनी लोन और दिवंगत अलगाववादी नेता सैयद अली शाह गिलानी पर अध्याय शामिल हैं.

BJP ने बताया अकादमिक जिहाद 

इन पुस्तकों में जम्मू-कश्मीर को "इंडियन हेल्ड कश्मीर" और "इंडियन ऑक्यूपाइड कश्मीर" भी बताया गया है. जम्मू-कश्मीर भाजपा के वरिष्ठ नेता और विधानसभा में विपक्ष के नेता सुनील शर्मा ने इस मामले को "अकादमिक जिहाद" करार देते हुए इन पुस्तकों पर तत्काल रोक लगाने और राज्य के सभी सरकारी पुस्तकालयों तथा शैक्षणिक संस्थानों से हटाने की मांग की है. 

शर्मा का आरोप है कि इन पुस्तकों में आतंकवादी गतिविधियों और अलगाववाद में शामिल लोगों को "दिग्गज" और "स्वतंत्रता सेनानी" बताया गया है और भारत व भारतीय सुरक्षा बलों पर हुए हमलों को सहानुभूतिपूर्ण तरीके से प्रस्तुत किया गया है.

शर्मा ने कहा,

"इस तरह की लिखावट का उद्देश्य इतिहास को विकृत करना और युवाओं को गुमराह करना था. ऐसी सभी प्रतियां जब्त कर नष्ट कर दी जानी चाहिए."

 

जम्मू-कश्मीर कांग्रेस ने भी शिक्षा विभाग द्वारा ऐसी पुस्तकों को शामिल किए जाने पर चिंता जताई है और जिन पर अलगाववाद और आतंकवाद को बढ़ावा देने का आरोप है.

विवाद बढ़ने के बाद जम्मू-कश्मीर सरकार ने दोनों पुस्तकों को सरकारी लाइब्रेरी से हटा दिया, जबकि उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने पूरे मामले की जांच के आदेश दिए हैं. 

सरकारी स्कूलों में बांटी गई थीं ये पुस्तकें

सरकारी आदेश के अनुसार, "पर्सनैलिटीज एंड लीजेंड्स ऑफ जे एंड के" की 123 कॉपी जम्मू, रामबन और उधमपुर जिलों के स्कूलों में बांटी गई थीं, जबकि "ग्रेट पर्सनैलिटीज ऑफ जम्मू एंड कश्मीर" की 128 कॉपी जम्मू और बारामूला जिलों के स्कूलों में भेजी गई थीं.

शिक्षा विभाग ने अपने आदेश में कहा,

“विभाग के संज्ञान में आया है कि इन पुस्तकों में अत्यंत आपत्तिजनक सामग्री शामिल है. यह स्पष्ट है कि ऐसी पुस्तकों की सिफारिश करते समय गंभीर लापरवाही, कर्तव्य में चूक और उचित जांच पड़ताल का अभाव रहा, जबकि इनमें अलगाववाद से जुड़ी सामग्री थी, जिससे कानून व्यवस्था की स्थिति प्रभावित हो सकती थी.”

 

सरकार ने इस मामले की जांच के लिए बिजली विकास विभाग के वित्तीय आयुक्त (अतिरिक्त मुख्य सचिव) अश्विनी कुमार, आईबीएस को जांच अधिकारी नियुक्त किया है. सामान्य प्रशासन विभाग के अतिरिक्त सचिव रोहित शर्मा को प्रेजेंटिंग ऑफिसर बनाया गया है.जांच अधिकारी को 30 दिनों के भीतर अपनी रिपोर्ट सौंपने के निर्देश दिए गए हैं.

"जम्मू और कश्मीर इन दिनों दो पुस्तकों को लेकर चर्चा में हैं. इनमें पुस्तकों में सरकारी स्कूल की लाइब्रेरी के लिए एक किताब में इस इलाके को भार…"