ये है वारदात की वजह
किश्तवाड़ के जिला आयुक्त (DC) पंकज शर्मा का काफिला एक 'ब्लॉक दिवस' कार्यक्रम के लिए संकरी सड़क से गुजर रहा था. तभी सामने से आ रही एक निजी कार से काफिले की टक्कर होने वाली थी, जिसे सेना का एक जवान (सादे कपड़ों में) चला रहा था. जिससे DC के सुरक्षाकर्मियों ने जब जवान को गाड़ी किनारे लगाने को कहा, तो दोनों पक्षों में तीखी बहस हो गई जिससे मामला बढ़ गया और पुलिस ने तत्काल कार्रवाई करते हुए कार को जब्त कर लिया. इसके बाद वह गाड़ी अथोली पुलिस स्टेशन ले आई गई. हालांकि, बाद में सैन्य अधिकारियों के फोन आने पर कार को छोड़ दिया गया.
पुलिस ने क्या दावा किया?
कार छोड़े जाने के करीब डेढ़ घंटे बाद, किजायी स्थित 17 RR (राष्ट्रीय राइफल्स) कैंप से कथित तौर पर एक पूर्व-नियोजित जवाबी हमला किया गया. कमांडिंग ऑफिसर के आदेश पर लोहे की छड़ों, लाठियों और अन्य हथियारों से लैस 30-40 जवान पुलिस स्टेशन की दीवारें और गेट फांदकर अंदर घुस गए. भीड़ ने तैनात पुलिसकर्मियों पर हमला कर दिया.
एसएचओ (SHO) अमृत कटोच ने बताया कि बीच-बचाव करने पर मेजर शर्मा ने उनपर हमला कर दिया, जिससे उनकी वर्दी फट गई. बाद में एसडीपीओ (SDPO) विजय भगत के साथ भी हाथापाई और मारपीट की गई. फिर SPO सुरेश कुमार ने राइफल के बट से उनके गर्दन पर वार करके उन्हें गंभीर रूप से घायल कर दिया, इतना ही नहीं एआरटीओ (ARTO) तस्लीम जावेद वानी समेत थाने में मौजूद परिवहन अधिकारी और उनके सुरक्षाकर्मियों को भी पीटा गया. हमलावरों ने पुलिस स्टेशन के मुख्य द्वार को क्षतिग्रस्त कर दिया और परिसर में खड़े एआरटीओ, एसएचओ और एसडीपीओ के सरकारी वाहनों में जमकर तोड़फोड़ की. इस मामले की जांच पुलिस सब-इंस्पेक्टर आदर्श कांत को सौंप दी गई है.
इन लोगों को बनाया गया आरोपी
किश्तवाड़ के अथोली पुलिस स्टेशन पर हमले के आरोप में 17 राष्ट्रीय राइफल्स के कमांडिंग ऑफिसर ,मेजर ,नायब सूबेदार समेत 30-40 सैनिकों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है. इन पर झड़प और सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने के आरोप लगा है. आरोपी जवानों के नाम क्रमशः कर्नल एन अरुण गांधी, कमांडिंग ऑफिसर, मेजर विकास शर्मा, नायब सूबेदार शंकर गुरखे, सिपाही (जनरल ड्यूटी) राज कुमार और सिपाही राहुल कुमार, अनूप सिंह और ओमकार इंगले के साथ 30 से 40 अज्ञात लोग शामिल हैं.
आरोपियों पर भारतीय न्याय संहिता (BNS), की धारा 109, 190, 351(2) और 352 शामिल हैं. इसके अलावा बीएनएसएस की धारा 121(1) और सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने से रोकने वाले अधिनियम की धारा 3(1) के तहत आरोप लगाए गए हैं. ये सभी धाराएं गैरकानूनी सभा , दंगा भड़काना, आपराधिक अतिक्रमण, लोक सेवकों पर हमला, हत्या का प्रयास और आपराधिक धमकी के आरोप में लगाई गई हैं.
सेना का घटना पर ये है स्टैंड?
वारदात को लेकर जम्मू स्थित रक्षा प्रवक्ता लेफ्टिनेंट कर्नल सुनील बार्टवाल बोले, "मामले की संस्थागत प्रक्रियाओं के माध्यम से जांच की जा रही है. भारतीय सेना कानूनी प्रक्रिया में पूरा सहयोग करेगी और संयुक्त जांच के बाद उचित कार्रवाई की जाएगी."
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