भारत की अर्थव्यवस्था को मजबूती देने वाले इनविजिबल सेक्टर (Invisible Sector) ने वित्त वर्ष 2025-26 में शानदार प्रदर्शन किया है. भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के ताजा आंकड़ों के अनुसार, विदेशों से सेवाओं, निवेश आय और अन्य माध्यमों से होने वाली कुल कमाई बढ़कर 631.6 अरब डॉलर हो गई, जो पिछले वित्त वर्ष के 576.5 अरब डॉलर की तुलना में 9.6% अधिक है.
वहीं, विदेशों को किए गए कुल भुगतान में मामूली बढ़ोतरी हुई. यह 312.5 अरब डॉलर से बढ़कर 319.6 अरब डॉलर रहा. इसके चलते भारत का नेट इनविजिबल सरप्लस बढ़कर 312 अरब डॉलर पहुंच गया, जो एक साल पहले 264 अरब डॉलर था। यानी देश की शुद्ध विदेशी कमाई में लगभग 48 अरब डॉलर का इजाफा हुआ है.
क्या होता है इनविजिबल सेक्टर?
इनविजिबल सेक्टर में ऐसी विदेशी कमाई शामिल होती है, जिसमें कोई भौतिक सामान नहीं बेचा जाता. इसमें मुख्य रूप से आईटी सेवाएं, बिजनेस कंसल्टिंग, बैंकिंग, वित्तीय सेवाएं, मेडिकल टूरिज्म, शिक्षा, निवेश से होने वाली आय और प्रवासी भारतीयों द्वारा भेजा गया पैसा (Remittances) शामिल हैं.
यही वजह है कि इसे अर्थव्यवस्था की "अदृश्य कमाई" भी कहा जाता है.
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सेवा निर्यात बना सबसे बड़ा आधार
भारत की कुल विदेशी कमाई में सबसे बड़ा योगदान सेवा क्षेत्र (Services) का रहा.
- 2024-25: 387.6 अरब डॉलर
- 2025-26: 421.3 अरब डॉलर
करीब 34 अरब डॉलर की अतिरिक्त कमाई यह दिखाती है कि भारत का आईटी, सॉफ्टवेयर, प्रोफेशनल और बिजनेस सर्विस सेक्टर लगातार वैश्विक बाजार में अपनी पकड़ मजबूत कर रहा है.
विदेशी पर्यटकों से आय घटी
आंकड़ों के अनुसार विदेशी पर्यटकों से होने वाली कमाई में कमी दर्ज की गई.
- यात्रा प्राप्तियाँ
- 2024-25: 34.2 अरब डॉलर
- 2025-26: 31.9 अरब डॉलर
यह संकेत देता है कि भारत में विदेशी पर्यटकों का खर्च पिछले वर्ष की तुलना में कम रहा.
भारतीयों का विदेश यात्रा खर्च बढ़ा
दूसरी ओर विदेश यात्रा पर भारतीयों का खर्च बढ़ा है.
- यात्रा भुगतान
- 2024-25: 34.8 अरब डॉलर
- 2025-26: 35.8 अरब डॉलर
यह बताता है कि भारतीय नागरिक पहले की तुलना में अधिक विदेश यात्रा कर रहे हैं.
मेडिकल टूरिज्म से बढ़ी कमाई
स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में भारत को सकारात्मक परिणाम मिले हैं. विदेशी मरीजों के भारत में इलाज कराने से होने वाली आय बढ़ी है. इससे साफ है कि भारत मेडिकल टूरिज्म के क्षेत्र में अपनी स्थिति लगातार मजबूत कर रहा है.
शिक्षा पर विदेशी खर्च में कमी
विदेशों में पढ़ाई पर भारतीय छात्रों का कुल खर्च पिछले वर्ष की तुलना में थोड़ा कम हुआ है. इसे रुपये की विनिमय दर, बढ़ती लागत या छात्रों की बदलती पसंद से जोड़कर देखा जा सकता है.
भारत के लिए क्यों महत्वपूर्ण है यह आंकड़ा?
भारत हर साल कच्चा तेल, सोना, इलेक्ट्रॉनिक उपकरण और मशीनरी जैसे उत्पादों का बड़े पैमाने पर आयात करता है, जिससे वस्तुओं के व्यापार में अक्सर घाटा रहता है. ऐसे में सेवा निर्यात, रेमिटेंस और अन्य विदेशी आय इस घाटे की भरपाई करने में अहम भूमिका निभाते हैं.
विशेषज्ञों का मानना है कि मजबूत इनविजिबल सेक्टर भारत के Current Account Deficit (CAD) को नियंत्रित रखने और विदेशी मुद्रा भंडार को मजबूत बनाए रखने में महत्वपूर्ण योगदान देता है.
क्या समझें इस आंकड़े से?
भारत की अर्थव्यवस्था अब केवल वस्तुओं के निर्यात पर निर्भर नहीं है. आईटी, सॉफ्टवेयर, प्रोफेशनल सेवाएँ, मेडिकल टूरिज्म और प्रवासी भारतीयों से आने वाला धन देश की विदेशी कमाई का मजबूत आधार बन चुके हैं. वित्त वर्ष 2025-26 के आंकड़े बताते हैं कि सेवा क्षेत्र की बढ़ती ताकत भारत की बाहरी आर्थिक स्थिति को लगातार मजबूत कर रही है.
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"भारत की अर्थव्यवस्था को मजबूती देने वाले इनविजिबल सेक्टर (Invisible Sector) ने वित्त वर्ष 2025-26 में शानदार प्रदर्शन किया है. भारतीय रिजर्व…"
