राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (NSO) ने देश में पहली बार बड़े पैमाने पर राष्ट्रीय घरेलू यात्रा सर्वेक्षण (National Domestic Travel Survey) जारी किया है. यह भारत का पहला अखिल भारतीय यात्रा सर्वेक्षण है, जिसमें ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों को गहराई से शामिल किया गया है.

इस सर्वेक्षण का मुख्य उद्देश्य यह समझना है कि भारत के नागरिक कहाँ, क्यों, कितनी दूरी, कितने समय में और किन साधनों से यात्रा करते हैं. इस व्यापक डेटा का उपयोग देश में परिवहन योजनाओं को दुरुस्त करने, इंफ्रास्ट्रक्चर के विकास, नए रूट्स तय करने और सार्वजनिक परिवहन सेवाओं को अधिक सुगम बनाने में किया जाएगा.

'यात्रा' की नई मानक परिभाषा

एनएसओ ने इस सर्वेक्षण के तहत यात्रा की एक स्पष्ट और नई परिभाषा तय की है. इसके अनुसार, यदि कोई व्यक्ति कम से कम 1 किलोमीटर की दूरी तय करता है, तभी उसे आधिकारिक तौर पर 'यात्रा' माना जाएगा। 1 किलोमीटर से कम की दूरी को इस डेटा में शामिल नहीं किया गया है.

सर्वेक्षण का दायरा और समय-सीमा

यह सर्वेक्षण बेहद व्यापक स्तर पर आयोजित किया गया था, जिसके आंकड़े निम्नानुसार हैं:

  • कवर किए गए गांव: 14,274
  • शहरी ब्लॉक्स: 10,377
  • कुल परिवार: 4,92,023
  • शामिल लोग: 20,34,371
  • सर्वेक्षण की अवधि: जुलाई 2025 से जून 2026

यह इस वार्षिक सर्वेक्षण का पहला वर्ष था. सरकार की योजना आगामी वर्षों में इस दायरे को और विस्तार देते हुए अधिक से अधिक गांवों और शहरी क्षेत्रों को इसमें जोड़ने की है.

सर्वे के मुख्य निष्कर्ष: काम पर जाने के साधन

  • सर्वेक्षण के आंकड़ों से भारत में दैनिक यात्रियों (commuters) की आवाजाही को लेकर कई दिलचस्प तथ्य सामने आए हैं:
  • दोपहिया वाहनों का दबदबा: देश में काम पर जाने वाले सबसे अधिक 42.6% लोग दोपहिया वाहन (बाइक/स्कूटर) का इस्तेमाल करते हैं. ग्रामीण क्षेत्रों की तुलना में शहरी क्षेत्रों में 15.2% अधिक श्रमिक दोपहिया वाहन से आवाजाही करते हैं.
  • पैदल चलने वालों की बड़ी संख्या: देश में 28.3% लोग कार्यस्थल तक पैदल ही जाते हैं, जो दोपहिया वाहनों के बाद दूसरा सबसे बड़ा वर्ग है.
  • साइकिल और सार्वजनिक परिवहन: कार्यस्थल तक पहुंचने के लिए 10.7% लोग साइकिल का उपयोग करते हैं. वहीं, बस से 6% और ऑटो-रिक्शा से भी 6% लोग सफर करते हैं।
  • कार का सीमित इस्तेमाल: कारों की बढ़ती बिक्री के बावजूद, पूरे देश में महज 3% लोग ही कार से काम पर जाते हैं.

यह सर्वेक्षण देश की बदलती आवाजाही और ट्रांसपोर्टेशन की प्राथमिकताओं को रेखांकित करता है, जिससे भविष्य की शहरी व ग्रामीण परिवहन नीतियों को नया मोड़ मिलेगा.

 

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