लगातार कई कारोबारी सत्रों की तेज़ी के बाद मंगलवार को भारतीय शेयर बाजार में मुनाफ़ावसूली हावी रही. बीएसई सेंसेक्स 77,094.51 अंक के पिछले बंद स्तर के मुकाबले 77,086.81 अंक पर खुला. शुरुआती कारोबार में सूचकांक 77,194.15 अंक के उच्चतम स्तर तक पहुंचा. लेकिन बिकवाली बढ़ने के कारण दिन के निचले स्तर 76,082.32 अंक तक फिसल गया. कारोबार समाप्त होने पर सेंसेक्स 893.70 अंक की गिरावट के साथ 76200.81 अंक पर बंद हुआ.

वहीं एनएसई निफ्टी 50 भी दबाव में रहा. निफ्टी 24,102.80 अंक के पिछले बंद स्तर के मुकाबले 24,071.90 अंक पर खुला. कारोबार के दौरान इसने 24,135.25 अंक का उच्चतम और 23,784.10 अंक का न्यूनतम स्तर छुआ. अंत में निफ्टी 278.35 अंक टूटकर 23,824.45 अंक पर बंद हुआ.

आईटी और मेटल शेयरों में बिकवाली

मंगलवार के कारोबार में सबसे ज्यादा दबाव आईटी और मेटल शेयरों पर देखने को मिला. अमेरिकी अर्थव्यवस्था की रफ्‍़तार को लेकर बढ़ती चिंताओं और वैश्विक तकनीकी कंपनियों के सतर्क रुख ने आईटी शेयरों में बिकवाली बढ़ा दी. निवेशकों को डर है कि यदि अमेरिका में कॉरपोरेट खर्च कम होता है तो भारतीय आईटी कंपनियों की आय पर असर पड़ सकता है.

दूसरी ओर अंतरराष्ट्रीय बाजार में धातुओं की कीमतों में नरमी और ब्याज दरों को लेकर अनिश्चितता के कारण मेटल शेयरों में भी कमजोरी देखने को मिली. हिंडाल्को, नाल्को, वेदांता और अन्य धातु कंपनियों के शेयर दबाव में रहे.

सोना और चाँदी ने बढ़ाई निवेशकों की चिंता

कमोडिटी बाजार में भी कमजोरी का माहौल बना रहा. सोना और चाँदी दोनों की कीमतों में तेज गिरावट दर्ज की गई. डॉलर की मज़बूती और अमेरिकी फेडरल रिजर्व के सख्त रुख के चलते कीमती धातुओं पर दबाव बना हुआ है. विशेषज्ञों का मानना है कि सुरक्षित निवेश की मांग घटने से भी सोना और चाँदी की कीमतों में कमजोरी आई है.

हालांकि बाजार जानकारों का कहना है कि लंबी अवधि के निवेशकों के लिए यह गिरावट अवसर साबित हो सकती है. क्योंकि वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता अभी पूरी तरह समाप्त नहीं हुई है.

कच्चे तेल से मिली राहत

बाजार के लिए राहत की बात यह रही कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें नियंत्रण में बनी हुई हैं. पश्चिम एशिया में तनाव कम होने से तेल की कीमतों में नरमी देखी जा रही है. इससे भारत जैसे आयातक देशों को फायदा हो सकता है. कम तेल कीमतों का असर महंगाई और चालू खाते के घाटे पर सकारात्मक रूप से पड़ता है.

आगे कैसी रह सकती है बाजार की चाल

विश्लेषकों के अनुसार आने वाले दिनों में अमेरिकी फेडरल रिजर्व की ब्याज दर नीति. मानसून की प्रगति. विदेशी निवेशकों की गतिविधियां और कच्चे तेल की कीमतें बाजार की दिशा तय करेंगी. यदि मानसून सामान्य रहता है और वैश्विक हालात स्थिर बने रहते हैं तो भारतीय बाजार में फिर से तेज़ी देखने को मिल सकती है.

फिलहाल निवेशकों को सलाह है कि वे ज़ल्दबाजी में बड़े निवेश से बचें और मजबूत बुनियादी स्थिति वाली कंपनियों में चरणबद्ध निवेश की रणनीति अपनाएं. इससे बाजार की अस्थिरता के बीच जोखिम को बेहतर तरीके से नियंत्रित किया जा सकता है.

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