अर्न्स्ट एंड यंग (EY) की हाल ही में जारी इकोनॉमी वॉच रिपोर्ट के मई संस्करण में बताया गया है कि भारत को अपने उपभोक्ताओं को वैश्विक अनिश्चितताओं से बचाने के लिए तेल, उर्वरक, रेयर अर्थ मेटल और दवाओं के बड़े भंडारण की आवश्यकता है। रिपोर्ट के अनुसार, मिडिल ईस्ट संकट ने आयातित ऊर्जा और अन्य महत्वपूर्ण आपूर्ति वस्तुओं पर भारत की निर्भरता को उजागर किया है।

रिपोर्ट की प्रमुख बातें:

  • भारत के पास घरेलू खपत के लिए केवल 4 से 5 दिन का कच्चे तेल का भंडार है, जो जापान और चीन की तुलना में काफी कम है।
  • कच्चे तेल की औसत कीमत 103.9 डॉलर प्रति बैरल है, जो पिछले 4 वर्षों के वैश्विक औसत से अधिक है।
  • भारत 2045 तक अमेरिका और 2063 तक चीन को पीछे छोड़ सकता है।
  • प्रति व्यक्ति आय धीरे-धीरे बढ़ेगी और 2065 तक वैश्विक औसत को पार कर सकती है।
  • अप्रैल में जीएसटी संग्रह ₹2.4 लाख करोड़ रहा, जिसकी वृद्धि दर 2.4% है।
  • निर्यात में 13.8% वृद्धि के बावजूद व्यापार घाटा बढ़कर 24.8 बिलियन डॉलर हो गया है।
  • 2030 तक जीडीपी के मुकाबले कर्ज घटकर 77.7% हो सकता है।
  • वित्त वर्ष 2027 में महंगाई दर 4.6% और जीडीपी वृद्धि दर 6.9% रहने का अनुमान है।
  • सेवा क्षेत्र में मजबूती है, जबकि मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर अपेक्षाकृत कमजोर दिख रहा है।
  • मार्च 2026 में विदेशी निवेशकों ने 11.6 बिलियन डॉलर की निकासी की, जिससे बाजार में दबाव बना हुआ है।
  • वाहन और आवास ऋण में तेजी देखी गई है, जबकि कंज्यूमर ड्यूरेबल लोन में कमी आई है।
  • पर्सनल लोन की वृद्धि दर मार्च 2026 में बढ़कर 16.2% हो गई, जो फरवरी में 15.2% थी।
"अर्न्स्ट एंड यंग (EY) की हाल ही में जारी इकोनॉमी वॉच रिपोर्ट के मई संस्करण में बताया गया है कि भारत को अपने उपभोक्ताओं को वैश्विक अनिश्चितता…"