राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (NSO) ने जुलाई 2025 से जून 2026 के बीच राष्ट्रीय नमूना सर्वेक्षण (NSS) के 80वें दौर के तहत दो बड़े सर्वेक्षण शुरू किए हैं. इनमें घरेलू पर्यटन व्यय सर्वेक्षण (Domestic Tourism Expenditure Survey-DTES) और राष्ट्रीय घरेलू यात्रा सर्वेक्षण (National Household Travel Survey-NHTS) शामिल हैं. इन सर्वेक्षणों से पहली बार देशभर में घरेलू पर्यटन और यात्रा व्यवहार का व्यापक डेटाबेस तैयार होगा.
यह पहल ऐसे समय में की जा रही है जब भारत दुनिया के सबसे तेज़ी से बढ़ते उपभोक्ता बाजारों में शामिल है और सरकार पर्यटन तथा परिवहन क्षेत्र को आर्थिक वृद्धि के प्रमुख इंजन के रूप में देख रही है.
क्यों महत्वपूर्ण है यह सर्वे?
भारत में घरेलू पर्यटन का आकार लगातार बढ़ रहा है. धार्मिक यात्राओं से लेकर मेडिकल टूर और अवकाश यात्राओं तक, करोड़ों लोग हर साल यात्रा करते हैं. इसके बावजूद सरकार के पास यह बताने के लिए सीमित आंकड़े हैं कि इन यात्राओं पर वास्तविक खर्च कितना होता है और खर्च का स्वरूप क्या है.
DTES के माध्यम से सरकार यह जानने की कोशिश करेगी कि लोग यात्रा के दौरान परिवहन, होटल, भोजन, खरीदारी और अन्य सेवाओं पर कितना खर्च करते हैं. यह डेटा पर्यटन मंत्रालय द्वारा तैयार किए जाने वाले टूरिज्म सैटेलाइट अकाउंट (TSA) के लिए आधार बनेगा. TSA के जरिए किसी अर्थव्यवस्था में पर्यटन क्षेत्र के वास्तविक योगदान का आकलन किया जाता है.
नीति विशेषज्ञों का मानना है कि पर्यटन क्षेत्र का आर्थिक प्रभाव अक्सर आधिकारिक आंकड़ों में कम आंका जाता है क्योंकि इसका बड़ा हिस्सा कई अलग-अलग क्षेत्रों में बंटा होता है. नया सर्वे इस अंतर को कम कर सकता है.
रेलवे मंत्रालय की नजर भी इस डेटा पर
सर्वे का दूसरा हिस्सा यानी NHTS सीधे तौर पर रेलवे मंत्रालय की जरूरतों से जुड़ा है. सरकार यह समझना चाहती है कि लोग एक स्थान से दूसरे स्थान तक जाने के लिए रेल, सड़क या हवाई मार्ग में से किसे चुनते हैं और क्यों चुनते हैं.
रेलवे के लिए यह जानकारी महत्वपूर्ण है क्योंकि अगले दशक में यात्री परिवहन ढांचे पर बड़े निवेश की योजना है. सर्वे के जरिए विभिन्न क्षेत्रों के बीच यात्रा प्रवाह (Origin-Destination Matrix) का आकलन किया जाएगा. इसके अलावा यह भी समझने की कोशिश होगी कि किराये में बदलाव का यात्रा मांग पर कितना प्रभाव पड़ता है.
परिवहन अर्थशास्त्रियों के अनुसार भारत में इस तरह के राष्ट्रीय स्तर के यात्रा सर्वेक्षण लंबे समय से नहीं हुए हैं. ऐसे में यह अध्ययन रेलवे, मेट्रो, बस नेटवर्क और क्षेत्रीय कनेक्टिविटी परियोजनाओं के लिए महत्वपूर्ण संदर्भ साबित हो सकता है.
24,780 नमूना इकाइयों का सर्वे
NSO ने इस सर्वे के लिए देशभर में 24,780 प्रथम चरण इकाइयों (FSU) का चयन किया है. इनमें 14,372 ग्रामीण और 10,408 शहरी इकाइयां शामिल हैं.
राज्यों की बात करें तो उत्तर प्रदेश में सबसे अधिक 3,712 नमूना इकाइयां चुनी गई हैं. इसके बाद बिहार (2,004), महाराष्ट्र (1,952), मध्य प्रदेश (1,548) और पश्चिम बंगाल (1,512) का स्थान है.
बड़े नमूना आकार के कारण सरकार को क्षेत्रीय स्तर पर भी उपयोगी निष्कर्ष मिलने की उम्मीद है।
उपभोग और यात्रा के बीच संबंध समझने की कोशिश
सर्वे की एक दिलचस्प विशेषता यह है कि परिवारों को उनके उपभोग व्यय के आधार पर वर्गीकृत किया जाएगा. इसके लिए यूजुअल मंथली पर कैपिटा कंजम्पशन एक्सपेंडिचर (UMPCE) का इस्तेमाल होगा.
इससे यह समझने में मदद मिलेगी कि उच्च आय और निम्न आय वर्गों के यात्रा व्यवहार में क्या अंतर है. उदाहरण के लिए क्या अधिक खर्च करने वाले परिवार हवाई यात्रा को प्राथमिकता दे रहे हैं? क्या निम्न आय वर्ग की यात्राओं में धार्मिक और पारिवारिक कारण प्रमुख हैं? ऐसे कई सवालों के जवाब इस सर्वे से मिलने की उम्मीद है.
नीति निर्माण में होगा उपयोग
सरकार के लिए यह सर्वे केवल आंकड़े जुटाने की क नहीं है। इसके निष्कर्ष पर्यटन अवसंरचना, रेलवे नेटवर्क, सार्वजनिक परिवहन और क्षेत्रीय विकास की नीतियों को प्रभावित कर सकते हैं।
यदि किसी क्षेत्र में यात्रा मांग तेज़ी से बढ़ती हुई दिखाई देती है तो वहां नई रेल सेवा, सड़क संपर्क या पर्यटन सुविधाओं के विकास की संभावना बढ़ सकती है। इसी तरह घरेलू पर्यटन खर्च का पैटर्न राज्यों को अपनी पर्यटन रणनीति तैयार करने में मदद करेगा।
आगे क्या?
सर्वेक्षण जून 2026 तक चलेगा और इसके बाद आंकड़ों का विश्लेषण किया जाएगा। विशेषज्ञों का मानना है कि परिणाम सामने आने के बाद भारत में पर्यटन और परिवहन क्षेत्र को लेकर कई स्थापित धारणाओं की नई परीक्षा होगी।
संभव है कि यह सर्वे पहली बार बताए कि भारतीय अर्थव्यवस्था में घरेलू पर्यटन और यात्रा गतिविधियों की वास्तविक ताकत कितनी बड़ी है।
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