श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में दान और चढ़ावे में कथित गड़बड़ी के मामले में उत्तर प्रदेश सरकार ने बड़ी कार्रवाई की है. SIT (विशेष जांच दल) की शुरुआती जांच रिपोर्ट के आधार पर पहली FIR दर्ज की गई है. पुलिस ने 8 लोगों के खिलाफ FIR दर्ज की. पुलिस ने पूछताछ के लिए आरोपियों को हिरासत में लिया है.

FIR में अविनाश शुक्ला, अनुकल्प मिश्रा, लवकुश मिश्रा, मनीष कुमार यादव, करुणेश पांडेय, रमाशंकर मिश्रा, सुभाष श्रीवास्तव और श्रीराम शंकर यादव उर्फ टिन्नू के नाम शामिल हैं. FIR में श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय, ट्रस्ट सदस्य डॉ. अनिल मिश्रा और व्यवस्थापक गोपाल राव का नाम शामिल नहीं किया गया है.

राम मंदिर दान मामले में FIR के बाद अखिलेश यादव का  बयान आया, उनका आरोप है कि सरकार 'बड़ी मछलियों' (यानी बड़े और रसूखदार लोगों) को बचा रही है और केवल छोटे कर्मचारियों या 'छोटी मछलियों' पर कार्रवाई कर रही है.

क्या है पूरा मामला?

राम मंदिर में श्रद्धालुओं द्वारा दिए गए नकद दान और चढ़ावे में गड़बड़ी के आरोप लगे थे. शिकायत में कहा गया कि दान की रकम के हिसाब-किताब में हेराफेरी की गई. अब जांच एजेंसियां यह पता लगा रही हैं कि कितनी रकम का गबन हुआ और इस मामले का मुख्य आरोपी कौन है.

श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के सदस्य कृष्णमोहन की शिकायत पर श्रीराम जन्मभूमि थाने में अपराध संख्या 90/2026 के तहत FIR दर्ज की गई. SIT की शुरुआती रिपोर्ट मिलने के बाद पुलिस ने तुरंत कार्रवाई शुरू कर दी.

किस पर क्या आरोप है?

  • रमाशंकर यादव उर्फ टिन्नू: आरोप है कि वह इस पूरे मामले का मुख्य सूत्रधार था. उसके पास दान पेटियों की चाबियां बिना अनुमति के रहती थीं.
  • अनुकल्प मिश्रा: आरोप है कि दान की रकम गिनने के दौरान उसने पैसों में हेराफेरी की और नकदी चुराई.
  • अविनाश शुक्ला: आरोप है कि सेवादार के रूप में काम करते हुए उसने दान की रकम की चोरी में हिस्सा लिया.
  • करुणेश पांडेय: आरोप है कि मंदिर के बैंक खातों का काम संभालते हुए उसने नकदी छिपाने में भूमिका निभाई.
  • मनीष कुमार यादव: आरोप है कि उसने नकदी और आभूषणों की चोरी में अहम भूमिका निभाई.
  • लवकुश मिश्रा: आरोप है कि उसने गबन की गई रकम को छिपाने और ठिकाने लगाने में मदद की.
  • रमाशंकर मिश्रा: आरोप है कि उसने गबन की रकम को ट्रस्ट की नजरों से बचाने में भूमिका निभाई.
  • सुभाष श्रीवास्तव: वह मंदिर में गणना प्रभारी और सेवानिवृत्त बैंक कर्मचारी थे. उन पर आरोप है कि उन्होंने गड़बड़ी की जानकारी छिपाई.

विवाद कैसे शुरू हुआ?

जून के पहले सप्ताह में समाजवादी पार्टी के नेता और पूर्व मंत्री पवन पांडेय ने मंदिर की दान राशि के प्रबंधन पर सवाल उठाए थे. इसके बाद विपक्ष ने मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की थी. इसके बाद समाजवादी पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव ने भी सोशल मीडिया के माध्यम से मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए पारदर्शिता सुनिश्चित करने की आवश्यकता पर जोर दिया था. वहीं, श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने सभी आरोपों से इनकार करते हुए कहा कि दान का पूरा हिसाब पारदर्शी तरीके से रखा जाता है. विवाद बढ़ने के बाद राज्य सरकार ने SIT बनाकर जांच शुरू कराई. इसके बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर 13 जून को तीन सदस्यीय SIT बनाई गई. SIT ने मंगलवार को अपनी शुरुआती रिपोर्ट सरकार को सौंपी थी.

किन धाराओं में दर्ज हुआ केस?

आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 305, 306, 316(5), 317(4), 317(5), 61, 3(5) और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 13(1)(a) के तहत मामला दर्ज किया गया है.

केजरीवाल ने भी साधा निशाना

राम मंदिर के दान और चढ़ावे के मामले को लेकर चल रहे विवाद के बीच आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक और दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल गुरुवार को अयोध्या पहुंचे.

उन्होंने कहा कि वह शुक्रवार को रामलला के दर्शन करेंगे और भगवान राम से न्याय की प्रार्थना करेंगे. केजरीवाल ने आरोप लगाया कि भगवान के घर में चोरी हुई है. उन्होंने कहा कि भगवान की पादुका, माला, गहने और चढ़ावे तक की चोरी कर ली गई, जिससे उनका मन बहुत दुखी है.

केजरीवाल ने SIT की जांच पर भी सवाल उठाए. उनका आरोप है कि जांच में सच्चाई छिपाने की कोशिश की जा रही है और बड़े लोगों को बचाया जा रहा है.

जब उनसे पूछा गया कि वह रामलला से क्या प्रार्थना करेंगे, तो उन्होंने कहा कि इसका जवाब वह शुक्रवार को दर्शन करने के बाद देंगे.

 

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