नेपाल में भारतीय राजदूत नवीन श्रीवास्तव ने सोमवार को प्रधानमंत्री बालेंद्र शाह से मुलाकात की. मार्च में पद संभालने के बाद शाह की किसी विदेशी राजदूत के साथ यह पहली मुलाकात थी.

करीब एक घंटे चली इस बैठक में दोनों के बीच विभिन्न पहलू पर बातचीत हुई. यह मुलाकात प्रधानमंत्री शाह की विदेशी राजदूत(Foreign Ambassadors) के साथ व्यक्तिगत बैठकों की शुरुआत मानी जा रही है. इससे उनकी सीधे और आमने-सामने की कूटनीति पर जोर देने की नीति भी साफ होती है.

इसी दौरान भारतीय राजदूत नवीन श्रीवास्तव ने सिंह दरबार में नेपाल की मंत्रिपरिषद से भी मुलाकात की.

भारत-नेपाल संबंधों पर हुई चर्चा

नेपाल के प्रधानमंत्री कार्यालय(PMO) के मुताबिक, बैठक में नेपाल-भारत रिश्तों के कई पहलुओं पर चर्चा हुई. दोनों पक्षों ने आपसी हित, विकास साझेदारी और जारी सहयोग पर बात की.

राजदूत नवीन श्रीवास्तव ने प्रधानमंत्री बालेंद्र शाह को शुभकामनाएं दीं. उन्होंने भारत की ओर से दोनों देशों के रिश्तों को और मजबूत करने का संकल्प भी जताया.

प्रधानमंत्री शाह ने दोनों पड़ोसी देशों के ऐतिहासिक रिश्तों को और मजबूत करने की बात कहीं है. उन्होंने दोनों देश के हितों वाले क्षेत्रों में मिलकर काम करने पर भी जोर दिया है.

यह बैठक पद  किसी विदेशी दूत के साथ प्रधानमंत्री शाह की पहली निजी बातचीत थी. इससे पहले शाह राजदूतों के साथ अलग-अलग बैठकों के पक्ष में नहीं थे. वह समूह में बातचीत को तवज्जो देते थे.

अमेरिकी और चीनी राजदूत से भी करेंगे मुलाकात

भारतीय राजदूत नवीन श्रीवास्तव के बाद शाह चीनी राजदूत झांग माओमिंग से भी मुलाकात करेंगे. इसके बाद बुधवार को अमेरिकी चार्ज डी'अफेयर्स स्कॉट अर्बोम के साथ उनकी बैठक होगी.

प्रधानमंत्री के करीबी सूत्रों के अनुसार, इन बैठकों की तैयारी कई हफ्ते पहले ही पूरी हो गई थी. 

1951 से जारी है भारत का विकास सहयोग

भारत नेपाल के प्रमुख विकास साझेदारों में से एक है. दोनों देशों के बीच विकास सहयोग काफी पुराना है. इसकी शुरुआत 1951 में काठमांडू के गौचर हवाई अड्डे के निर्माण से हुई थी. यह परियोजना 1954 में पूरी हुई थी.

इसी वर्ष नेपाल में भारतीय सहायता मिशन भी स्थापित किया गया था. इसका उद्देश्य कनेक्टिविटी, स्वास्थ्य, शिक्षा और बिजली समेत कई क्षेत्रों में विकास परियोजनाओं में सहयोग करना था.

पिछले 70 सालों में भारत और नेपाल के बीच विकास को लेकर सहयोग काफी बढ़ा है. अब दोनों देश कई अलग-अलग क्षेत्रों में साथ काम कर रहे हैं. इनमें स्वास्थ्य, शिक्षा, बिजली, खेती, व्यापार और सड़क जैसी कनेक्टिविटी से जुड़े काम शामिल हैं.

इसके अलावा पुरानी इमारतों और सांस्कृतिक विरासत को बचाने, पुरातत्व और क्षमता बढ़ाने जैसे क्षेत्रों में भी दोनों देश मिलकर काम कर रहे हैं. भारत की तरफ से चलने वाली परियोजनाएं नेपाल की जरूरतों को ध्यान में रखकर तय की जाती हैं. ये प्रोजेक्ट नेपाल के अलग-अलग हिस्सों में चल रहे हैं.


 

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